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मदर्स डे पर सेंट्रल पार्क में महिलाओं के लिए विशाल मेडिकल कैंप, मां को याद कर भावुक हुए जस्टिस अनिल कुमार उपमन

Justice Anil Kumar Upman Gets Emotional Remembering His Mother at Mother’s Day Medical Camp in Jaipur

“माँ ही बच्चे की प्रथम शिक्षक होती है”, थॉमस एडिसन और मां के संघर्ष की कहानी सुनाकर दिया भावुक संदेश

जयपुर। मदर्स डे के अवसर पर रविवार को जयपुर के सेंट्रल पार्क में राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (RALSA) और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) की ओर से महिलाओं के लिए विशेष मेडिकल कैंप का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर स्वास्थ्य सेवाओं के साथ मातृत्व, महिला सशक्तिकरण और मां के त्याग को समर्पित भावनात्मक संदेशों ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया।

कार्यक्रम का उद्घाटन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की पत्नी प्रेरणा शर्मा ने किया।

इस दौरान राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस अनिल कुमार उपमन, जस्टिस संगीता शर्मा, जयपुर मेट्रो-1 के जिला एवं सत्र न्यायाधीश बृजेन्द्र कुमार जैन, जयपुर मेट्रो-2 की जिला एवं सत्र न्यायाधीश रीटा तेजपाल तथा जयपुर जिला एवं सत्र न्यायाधीश माधवी दिनकर सहित कई न्यायिक अधिकारी मौजूद रहे।

कार्यक्र्म में राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव हरिओम शर्मा अत्री, DLSA मेट्रो-2 की सचिव पल्लवी शर्मा, DLSA जयपुर के सचिव पवन जीनवाल, रालसा के अधिकारी एवं विभिन्न विभागों के चिकित्सकीय विशेषज्ञ भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

महिलाओं के स्वास्थ्य को समर्पित विशेष कैंप

मदर्स डे के अवसर पर आयोजित इस मेडिकल कैंप में महिला रोग विशेषज्ञों सहित कई चिकित्सकीय विभागों के डॉक्टरों ने महिलाओं की स्वास्थ्य जांच की और उन्हें आवश्यक परामर्श दिया।

कैंप में सामान्य स्वास्थ्य जांच, महिला स्वास्थ्य, रक्तचाप, शुगर, पोषण, मातृ स्वास्थ्य और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के संबंध में परामर्श प्रदान किया गया।

सुबह से ही बड़ी संख्या में महिलाएं स्वास्थ्य परीक्षण और चिकित्सा परामर्श के लिए पहुंचीं।

महिलाओं ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के नि:शुल्क मेडिकल कैंप समाज में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ महिलाओं को समय पर चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

“माँ एक संपूर्ण शब्द है”

कार्यक्रम के दौरान जस्टिस अनिल कुमार उपमन का संबोधन विशेष रूप से भावनात्मक और प्रेरणादायक रहा।

उन्होने मां की शक्ति, त्याग और बच्चों के जीवन निर्माण में उनकी भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि “माँ एक संपूर्ण शब्द है, जिसमें पूरी सृष्टि समाहित है।”

उन्होंने कहा कि एक मां केवल बच्चे को जन्म ही नहीं देती, बल्कि अपने संस्कार, त्याग और प्रेम से उसके भविष्य का निर्माण भी करती है। मां ही बच्चे की पहली गुरु होती है, जो उसे जीवन के मूल संस्कार सिखाती है।

जस्टिस उपमन ने कहा कि जब बच्चा मां की गोद में होता है, तो वह स्वयं को दुनिया में सबसे अधिक सुरक्षित महसूस करता है। भारतीय संस्कृति में मां को सर्वोच्च स्थान दिया गया है और शास्त्रों में भी कहा गया है कि “माँ ही बच्चे की प्रथम शिक्षक होती है।”

अपने संबोधन में जस्टिस अनिल कुमार उपमन ने महान वैज्ञानिक थॉमस अल्वा एडिसन के जीवन की एक प्रेरणादायक घटना का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि बचपन में एडिसन को स्कूल प्रशासन ने “मंद बुद्धि” बताते हुए पढ़ाने से मना कर दिया था।

स्कूल की ओर से उनकी मां को एक पत्र दिया गया, जिसमें लिखा था कि बच्चा पढ़ाई के योग्य नहीं है और उसे स्कूल में नहीं पढ़ाया जा सकता। लेकिन एडिसन की मां ने वह पत्र पढ़कर अपने बेटे से कहा कि स्कूल ने लिखा है— “आपका बच्चा अत्यंत प्रतिभाशाली है और हमारा स्कूल इतना सक्षम नहीं कि उसे शिक्षा दे सके।”

उन्होंने कहा कि मां के इन सकारात्मक शब्दों ने एडिसन का आत्मविश्वास बदल दिया। उनकी मां ने स्वयं घर पर उन्हें शिक्षित किया और आगे चलकर वही बच्चा दुनिया का महान वैज्ञानिक बना, जिसने इलेक्ट्रिक बल्ब सहित अनेक महत्वपूर्ण आविष्कार किए।

जस्टिस उपमन ने कहा कि वर्षों बाद जब एडिसन को वह वास्तविक पत्र मिला और उन्होंने उसकी सच्चाई पढ़ी, तब उन्हें अपनी मां के विश्वास और त्याग का एहसास हुआ। वह अपनी मां को याद कर लंबे समय तक भावुक रहे।

उन्होंने कहा कि यही “मदर पावर” होती है, जो एक साधारण या कमजोर समझे जाने वाले बच्चे को भी विश्व प्रसिद्ध व्यक्तित्व बना सकती है।

अपनी मां को याद कर हुए भावुक

संबोधन के दौरान जस्टिस अनिल कुमार उपमन अपनी मां को याद कर भावुक हो गए। उन्होंने अपने निजी अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार उनकी मां ने जीवन के हर कठिन समय में उनका साथ दिया और हमेशा उनका हौसला बढ़ाया।

उन्होंने कहा कि मां का प्रेम निस्वार्थ होता है। मां स्वयं कठिनाइयां सह लेती है, लेकिन अपने बच्चों को हर परेशानी से बचाने की कोशिश करती है।

भावुक स्वर में उन्होंने कहा, “भले ही मां आज इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन जब भी आंखें बंद करके उन्हें याद करता हूं तो ऐसा महसूस होता है कि वह आज भी आसपास ही हैं।”

उनके इस भावुक संबोधन के दौरान कार्यक्रम में मौजूद कई लोग भावुक नजर आए।

“मां का त्याग सबसे बड़ा”

जस्टिस उपमन ने अपने संबोधन में सोशल मीडिया पर वायरल एक दृश्य का भी उल्लेख किया, जिसमें एक मादा हिरण अपने बच्चे को मगरमच्छ से बचाने के लिए स्वयं खतरे के सामने खड़ी हो जाती है।

उन्होंने कहा कि यह दृश्य मां के सर्वोच्च त्याग और प्रेम का प्रतीक है। मां अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए किसी भी खतरे का सामना करने को तैयार रहती है।

उन्होंने कहा कि समाज को हमेशा माताओं के योगदान और त्याग का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि मां परिवार और समाज की सबसे मजबूत आधारशिला होती है।

महिला स्वास्थ्य शिविर की सराहना

कार्यक्रम में उपस्थित सभी न्यायिक अधिकारियों और अतिथियों ने महिला स्वास्थ्य शिविर की सराहना की।

जस्टिस संगीता शर्मा ने कहा कि महिलाओं का स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत विषय नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ मुद्दा है।

उन्होंने कहा कि एक स्वस्थ मां ही स्वस्थ परिवार और मजबूत समाज का निर्माण कर सकती है। इसलिए महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है।

राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव हरिओम शर्मा अत्री ने कहा कि विधिक सेवा प्राधिकरण केवल कानूनी सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के स्वास्थ्य, शिक्षा और जागरूकता के क्षेत्र में भी लगातार कार्य कर रहा है।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के मेडिकल कैंप महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य जांच और उचित परामर्श उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

बड़ी संख्या में महिलाओं ने लिया लाभ

सेंट्रल पार्क में आयोजित इस कैंप में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया।

डॉक्टरों ने महिलाओं को नियमित स्वास्थ्य जांच कराने, संतुलित आहार लेने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह दी।

कार्यक्रम में महिलाओं के लिए स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता सामग्री भी वितरित की गई।

कई महिलाओं ने इस आयोजन को उपयोगी बताते हुए कहा कि इस प्रकार के कैंप समाज में स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करते हैं।

मदर्स डे पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक मेडिकल कैंप नहीं रहा, बल्कि मातृत्व, त्याग, प्रेम और महिला सशक्तिकरण का भावनात्मक संदेश देने वाला विशेष आयोजन बन गया।

अंत में सभी अतिथियों और चिकित्सकों का आभार व्यक्त किया गया तथा मातृ शक्ति को नमन करते हुए कार्यक्रम का समापन हुआ।

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