जयपुर। राज्य में पंचायतों के पुनर्गठन से जुड़े मामलों को लेकर दायर याचिकाओं पर बुधवार को राजस्थान हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई।
हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार को 19 जनवरी तक अपना जवाब पेश करने के आदेश दिए हैं।
जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस रवि चिरानियां ने याचिकाकर्ता मुन्नालाल शर्मा, डॉ. के.एम. भावरिया सहित अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया.
संशोधित अधिसूचनाओं को चुनौती
याचिका में राज्य सरकार द्वारा 20 नवंबर 2025 और 28 दिसंबर 2025 को जारी पंचायत पुनर्गठन से संबंधित संशोधित अधिसूचनाओं को चुनौती दी गई है।
याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि पुनर्गठन की प्रक्रिया में नियमों और दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया तथा इससे स्थानीय नागरिकों और पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी कि पंचायतों की सीमाओं में किए गए बदलावों से प्रशासनिक असुविधा उत्पन्न होगी और आमजन को मूलभूत सुविधाओं तक पहुंच में कठिनाई का सामना करना पड़ेगा।
इन्होने की पैरवी
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता लक्ष्मीकांत शर्मा (मालपुरा), हनुमान चौधरी, प्रदीप कलवानिया, राहुल कामवार और प्रशांत शर्मा सहित अन्य अधिवक्ताओं ने पैरवी की।
अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि पंचायत पुनर्गठन की प्रक्रिया में जनसुनवाई और आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया को नजरअंदाज किया गया है।
उन्होंने यह भी दलील दी कि संशोधित अधिसूचनाएं जल्दबाजी में जारी की गईं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों के नागरिकों को अपनी आपत्तियां दर्ज कराने का समुचित अवसर नहीं मिला।
राज्य सरकार का पक्ष
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता कपिल प्रकाश माथुर ने अदालत के समक्ष सरकार का पक्ष रखा।
उन्होंने कहा कि पंचायतों का पुनर्गठन विधि सम्मत प्रक्रिया के तहत किया गया है और इसका उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना तथा स्थानीय शासन को अधिक प्रभावी बनाना है।
अगली सुनवाई पर निगाहें
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने राज्य सरकार को 19 जनवरी तक विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
इसके साथ ही अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख तय करते हुए कहा कि सरकार के जवाब के बाद याचिकाकर्ताओं की दलीलों पर आगे विचार किया जाएगा।