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सुप्रीम कोर्ट में 5 नए जज नियुक्त: केन्द्र की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति भवन से जारी हुए वारंट, सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़कर 37 हुई

President Approves Appointment Of Five New Supreme Court Judges
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सुप्रीम कोर्ट में पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। नई नियुक्तियों के बाद सुप्रीम कोर्ट में जजों की कुल संख्या बढ़कर 37 हो गई है।

नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सुप्रीम कोर्ट में पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने नियुक्तियों से जुड़ी आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी।

इस फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट में जजों की कुल संख्या बढ़कर 37 हो गई है।

हाल ही में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत अधिकतम संख्या 34 से बढ़ाकर 38 कर दी थी, जिसके बाद इन नई नियुक्तियों का रास्ता साफ हुआ।

किन-किन जजों की हुई नियुक्ति

सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार जिन पांच व्यक्तियों को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया है, वे हैं:

  • बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस चंद्रशेखर
  • पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शील नागू
  • मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव सचदेवा
  • जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अरुण पल्ली
  • वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकिटा सुब्रमणि मोहना

इन सभी नामों की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट की कोलेजियम ने की थी, जिसके बाद केंद्र सरकार ने इसे मंजूरी दी।

नियुक्ति का संवैधानिक आधार

सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत की जाती है। इसी प्रावधान के अनुसार राष्ट्रपति, देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) से परामर्श करने के बाद जजों की नियुक्ति करते हैं। इस मामले में भी यही प्रक्रिया अपनाई गई।

केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि राष्ट्रपति ने मुख्य न्यायाधीश से सलाह लेने के बाद पांच नए जजों की नियुक्ति को मंजूरी दी।

जजों की संख्या बढ़ाने का फैसला

इन नियुक्तियों की एक अहम पृष्ठभूमि भी है। हाल ही में केंद्र सरकार ने एक अध्यादेश के जरिए सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या को 34 से बढ़ाकर 38 कर दिया था। उसी के बाद इन नई नियुक्तियों का रास्ता साफ हुआ।

हालांकि अभी कुल संख्या 37 तक पहुंची है, यानी एक पद अभी भी खाली है।

सुप्रीम कोर्ट की कोलेजियम, जिसकी अगुवाई उस समय मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत कर रहे थे, ने 27 मई 2026 को इन पांच नामों की सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी थी।

दिलचस्प बात यह है कि सरकार ने महज 4 दिनों के भीतर ही इन सिफारिशों को मंजूरी दे दी, जो आमतौर पर होने वाली प्रक्रियाओं की तुलना में काफी तेज मानी जा रही है।

बार से सीधे नियुक्ति

इन नियुक्तियों में सबसे खास बात यह है कि वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकिटा सुब्रमणि मोहना को सीधे बार से सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया है।

इसके साथ ही वे साल 2018 में न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा के बाद बार से सीधे सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त होने वाली दूसरी महिला बन गई हैं। यह कदम न्यायपालिका में महिला प्रतिनिधित्व को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

आमतौर पर सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति हाईकोर्ट के जजों या मुख्य न्यायाधीशों में से की जाती है। लेकिन संविधान के तहत यह प्रावधान भी है कि अनुभवी और योग्य वकीलों (senior advocates) को सीधे सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया जा सकता है।

वेंकिटा सुब्रमणि मोहना की नियुक्ति इसी श्रेणी में आती है, जो यह दर्शाती है कि न्यायपालिका में विविध अनुभवों को महत्व दिया जा रहा है।

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