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दिव्यांग उम्मीदवारों को बड़ी राहत: ‘जनरल कट-ऑफ पार करने पर मिलेगा सामान्य सीट का हक’ सुप्रीम कोर्ट का केंद्र और राज्यों को निर्देश

PwBD Candidates Scoring Above Cut-Off Must Get Unreserved Seats: Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जनरल कट-ऑफ पार करने वाले PwBD उम्मीदवारों को अनारक्षित सीटों पर नियुक्ति मिलनी चाहिए।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांग उम्मीदवारों (Persons with Benchmark Disabilities – PwBD) के अधिकारों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है।

कोर्ट ने कहा है कि जो PwBD उम्मीदवार अपनी योग्यता के आधार पर जनरल कट-ऑफ से अधिक अंक हासिल करते हैं, उन्हें अनारक्षित (Unreserved) सीटों पर नियुक्ति दी जानी चाहिए।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को “अपवर्ड मूवमेंट” नीति को पूरी तरह लागू करने का निर्देश दिया। खंडपीठ ने कहा कि इसे पूरी तरह और सही भावना के साथ लागू किया जाना चाहिए।

क्या था पूरा मामला?

मामला उन PwBD उम्मीदवारों से जुड़ा था, जिन्हें सामान्य श्रेणी के बराबर अंक हासिल करने के बावजूद आरक्षित सीटों में समायोजित किया जा रहा था।

याचिका में कहा गया था कि इससे दिव्यांग आरक्षण का वास्तविक लाभ कम हो जाता है, क्योंकि मेरिट पर चयनित उम्मीदवार भी आरक्षित कोटे की सीटें भर देते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही सितंबर 2025 में इस पर चिंता जताई थी और कहा था कि ऐसा करना दिव्यांग अधिकार अधिनियम, 2016 (RPwD Act) के उद्देश्य के खिलाफ है।

अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा था कि क्या ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, जिससे मेरिट पर चयनित PwBD उम्मीदवारों को जनरल सीटों में समायोजित किया जाए।

केंद्र का जवाब: ‘पहले से मौजूद हैं नियम

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि 2018 और 2022 में जारी ऑफिस मेमोरेंडम (OM) में पहले से स्पष्ट किया गया है कि:

यदि कोई PwBD उम्मीदवार बिना किसी रियायत के अपनी योग्यता के आधार पर चयनित होता है, तो उसे अनारक्षित सीट पर समायोजित किया जाएगा।

जबकि, जो उम्मीदवार आयु सीमा, कट-ऑफ या अन्य छूट का लाभ लेते हैं, उन्हें आरक्षित सीटों में गिना जाएगा।

‘स्क्राइब सुविधा छूट नहीं’-SC

सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि स्क्राइब (scribe) या अतिरिक्त समय जैसी सुविधाओं को “relaxed standards” नहीं माना जाएगा।

अदालत ने कहा कि दिव्यांगता को किसी उम्मीदवार की कमजोरी मानकर उसकी मेरिट कम नहीं आंकी जा सकती।

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जो PwBD उम्मीदवार बिना किसी छूट (relaxation) के अपनी मेरिट पर चयनित होते हैं, उन्हें जनरल (UR) सीटों में समायोजित किया जाएगा और उनका PwBD कोटा सुरक्षित अन्य जरूरतमंद उम्मीदवारों के लिए रहेगा।

कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से कहा कि इस नीति को “letter and spirit” में लागू किया जाए।

कोर्ट ने कहा:

“मेरिट के आधार पर सफल PwBD उम्मीदवारों को अनारक्षित सीटों में स्थान मिलना चाहिए, ताकि समानता, गरिमा और समावेशन का संवैधानिक लक्ष्य पूरा हो सके।”

अदालत ने माना कि “अपवर्ड मूवमेंट” नीति लागू होने से मेरिट वाले उम्मीदवारों का हक सुरक्षित रहेगा और आरक्षण का उद्देश्य भी प्रभावित नहीं होगा।

RPwD Act के पालन पर भी कोर्ट नाराज

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि RPwD Act, 2016 लागू हुए 8 साल से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसका सही पालन अब भी नहीं हो रहा।

अदालत ने राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों (NLUs) को कानून के पालन की निगरानी का जिम्मा सौंपा।

NLU दिल्ली को केंद्र सरकार के स्तर पर RPwD Act के अनुपालन की समीक्षा करने का काम दिया गया।

कोर्ट ने कहा कि निगरानी केवल औपचारिक नहीं होनी चाहिए, बल्कि वास्तविक स्थिति की समीक्षा होनी चाहिए-जैसे अधिकारों का क्रियान्वयन, संस्थागत ढांचा और एक्सेसिबिलिटी।

‘अपवर्ड मूवमेंट’ लागू करने का आदेश

अदालत ने केंद्र सरकार की नीति को सही ठहराते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इसे लागू करने का निर्देश दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतिम आदेश में केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि PwBD उम्मीदवारों के लिए “अपवर्ड मूवमेंट” नीति को पूरी गंभीरता और ईमानदारी से लागू किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतिम निर्णय में कहा कि PwBD उम्मीदवार, जो बिना किसी रियायत के सामान्य श्रेणी की मेरिट सूची में आते हैं, उन्हें अनारक्षित सीटों पर समायोजित किया जाना चाहिए।

कोर्ट ने यह भी माना कि इससे दिव्यांग आरक्षण का उद्देश्य प्रभावित नहीं होगा, बल्कि योग्य उम्मीदवारों को उनका वास्तविक अधिकार मिलेगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि इससे संविधान में निहित समानता, गरिमा और समावेशन (inclusion) के सिद्धांत मजबूत होंगे।

कोर्ट ने मामले को 22 सितंबर 2026 के लिए सूचीबद्ध किया है, जहां अनुपालन रिपोर्ट पेश की जाएगी।

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