जयपुर। राजस्थान बार काउंसिल में दो मनोनीत सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया अब अंतिम दौर में पहुंचती नजर आ रही है।
सूत्रों के अनुसार, राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजय कुमार अग्रवाल ने पिछले सप्ताह जोधपुर प्रवास के दौरान राजस्थान बार काउंसिल के निर्वाचित सदस्यों से इस संबंध में राय-मशविरा किया है।
दो पदों पर मनोनयन को लेकर पिछले कुछ दिनों से हाईकोर्ट और बार से जुड़े स्तरों पर लगातार चर्चा चल रही है।
मुख्य न्यायाधीश की ओर से अलग-अलग अधिवक्ताओं से मुलाकात और संभावित नामों को लेकर फीडबैक लेने के बाद अब प्रक्रिया निर्णायक चरण में मानी जा रही है।
इन महिला अधिवक्ताओं के नाम चर्चा में
सूत्रों के अनुसार, दोनों मनोनीत पदों के लिए जिन महिला अधिवक्ताओं के नाम चर्चा में बताए जा रहे हैं, उनमें गायत्री राठौड़, प्रतिष्ठा दवे, वंदना उदावत, मंजू जोशी, सुमति बिश्नोई और सुरुचि कासलीवाल के नाम शामिल हैं।
हालांकि, इनमें से किसी भी नाम को लेकर अभी आधिकारिक रूप से कोई निर्णय या घोषणा नहीं हुई है।
वरिष्ठ महिला अधिवक्ताओं को किया जाए शामिल
वहीं, नवनिर्वाचित कुछ सदस्यों ने राजस्थान हाईकोर्ट की वरिष्ठ महिला अधिवक्ताओं को शामिल किए जाने के सुझाव पर सहमति जताई है। उनका कहना है कि वरिष्ठ महिला अधिवक्ताओं के पास लंबे समय का अनुभव है और वे महिला अधिवक्ताओं के सामने आने वाली चुनौतियों को बेहतर तरीके से समझती हैं।
नवनिर्वाचित सदस्यों के अनुसार, वरिष्ठ महिला अधिवक्ताओं के अनुभव और मार्गदर्शन का बार काउंसिल में प्रभावी तरीके से उपयोग किया जा सकता है। इससे न केवल महिला अधिवक्ताओं से जुड़े मुद्दों को बेहतर ढंग से समझने और उठाने में मदद मिलेगी, बल्कि जूनियर महिला अधिवक्ताओं को भी मार्गदर्शन और संबल मिल सकेगा।
उनका मानना है कि वरिष्ठ महिला अधिवक्ताओं की भागीदारी से बार काउंसिल में महिला अधिवक्ताओं से जुड़े विषयों पर अनुभव और व्यावहारिक समझ का बेहतर समावेश हो सकता है।
अनुभव को बताया महत्वपूर्ण
निर्वाचित सदस्यों के बीच यह चर्चा भी है कि मनोनयन में केवल वरिष्ठता या व्यक्तिगत पहचान के बजाय बार काउंसिल के कामकाज की समझ और जमीनी अनुभव को भी महत्व दिया जाना चाहिए।
कुछ सदस्यों का मत है कि जिन अधिवक्ताओं ने प्रदेशभर में अधिवक्ताओं के बीच काम किया है, उन्हें काउंसिल में शामिल किए जाने से अधिवक्ताओं की वास्तविक समस्याओं को संस्थागत स्तर पर उठाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, मनोनयन को लेकर अंतिम निर्णय मुख्य न्यायाधीश के स्तर पर होना है और आधिकारिक आदेश जारी होने तक किसी भी नाम को अंतिम नहीं माना जा सकता।
