टॉप स्टोरी

चर्चित खबरें

VIP नंबर घोटाला:- एफआईआर और विभागीय जांच को हाईकोर्ट में चुनौती, राज्य सरकार और परिवहन विभाग को नोटिस

Rajasthan High Court Seeks BSNL Response on Preference for 5-Year NLU Law Degree in Recruitment

जयपुर। राज्य परिवहन विभाग में सामने आए सात अंकों (सेवन डिजिट) के बड़े घोटाले में विभिन्न जिलों के जिला परिवहन अधिकारियों और क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) के खिलाफ दायर एफआईआर के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किए हैं.

सुनील सैनी सहित 10 अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने राज्य सरकार व संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

हाईकोर्ट ने कहा कि सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।

मामले की अगली सुनवाई 19 जनवरी को तय की गयी हैं.

याचिका में परिवहन विभाग द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दर्ज करायी एफआईआर, विभागीय कार्रवाई और जांच समिति की रिपोर्टों की वैधानिकता को चुनौती दी गई है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पूरे मामले में न तो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किया गया और न ही ठोस साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की गई।

500 से 600 करोड़ का घोटाला

VIP नंबर घोटाला सामने आने के बाद परिवहन विभाग द्वारा गठित एक जांच समिति ने 19 जून 2025 को अंतरिम तथा 17 अक्टूबर 2025 को अंतिम जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की।

इन रिपोर्टों के आधार पर विभाग ने 20 नवंबर और 9 दिसंबर 2025 को आदेश जारी कर प्रदेशभर में एफआईआर दर्ज कराने और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिए।

जांच रिपोर्टों में आरोप लगाया गया कि पुराने वाहनों के पंजीकरण नवीनीकरण, तीन अंकों वाले पुराने पंजीकरण नंबरों के संरक्षण तथा वर्ष 2013 से पूर्व के वाहनों के बैकलॉग डेटा को VAHAN सॉफ्टवेयर पर अपलोड करने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुईं, जिससे राज्य सरकार को कथित रूप से 400 से 600 करोड़ रुपये तक का राजस्व नुकसान हुआ।

याचिकाकर्ताओं का तर्क

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता तनवीर अहमद ने अदालत ने पैरवी करते हुए कहा कि जांच रिपोर्टें अनुमानों और कयासों पर आधारित हैं।

अधिवक्ता ने कहा कि कथित राजस्व नुकसान के संबंध में न तो किसी वित्तीय सलाहकार की रिपोर्ट संलग्न है और न ही वाहन-वार विवरण प्रस्तुत किया गया।

अधिवक्ता ने कहा कि रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि किस अधिकारी ने किस नियम का उल्लंघन किया और किस आधार पर आपराधिक मंशा का आरोप लगाया गया।

अधिवक्ता ने कहा कि प्रशासनिक या तकनीकी त्रुटियों को आपराधिक कृत्य बताकर एफआईआर दर्ज कराना कानून के विपरीत है।

VAHAN सॉफ्टवेयर और बैकलॉग डेटा

अदालत को बताया गया कि वर्ष 2013 में VAHAN सॉफ्टवेयर लागू होने से पहले वाहन पंजीकरण ऑफलाइन प्रणाली से होते थे।

इसके बाद पुराने रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में दर्ज करना अनिवार्य हुआ, जिसे बैकलॉग डेटा कहा गया।

यह प्रक्रिया सरकारी निर्देशों के तहत की गई थी और इसमें निजी सेवा प्रदाताओं व सूचना सहायकों की भूमिका रही। ऐसे में बड़े पैमाने पर डेटा एंट्री के दौरान संभावित तकनीकी त्रुटियों को अपराध नहीं माना जा सकता।

पुराने पंजीकरण नंबरों पर विवाद

याचिका में यह भी कहा गया कि तीन अंकों वाले पुराने पंजीकरण नंबरों को जांच समिति ने ‘VIP’ या ‘फैंसी नंबर’ बताकर गंभीर आरोप लगाए, जबकि उस समय ऐसी कोई श्रेणी अस्तित्व में ही नहीं थी।

परिवहन विभाग ने स्वयं समय-समय पर पुराने नंबरों के संरक्षण और स्थानांतरण की अनुमति दी है तथा इसके लिए शुल्क भी निर्धारित किया गया है।

प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन

याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि जांच रिपोर्ट तैयार करते समय उन्हें न तो नोटिस दिया गया और न ही सुनवाई का अवसर।

बिना पक्ष सुने रिपोर्ट तैयार करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है, जिससे पूरी कार्रवाई असंवैधानिक हो जाती है।

सबसे अधिक लोकप्रिय