सुप्रीम कोर्ट के 15 सितंबर के आदेश का दिया हवाला; हाईकोर्ट ने कहा—समान परिस्थिति में आरोपियों को मिलेगी अंतरिम राहत, राज्य के जवाब और SLP के अंतिम परिणाम के अधीन रहेगा आदेश
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट के जोधपुर स्थित नउ भवन में सामने आई संरचनात्मक खामियों और निर्माण संबंधी अनियमितताओं से जुड़े आपराधिक मामले में गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया है।
राजस्थान हाईकोर्ट मुख्यपीठ में मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और जस्टिस विनीत कुमार माथुर की खंडपीठ ने मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों को अंतरिम तौर पर जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने यह राहत मुख्य रूप से सुप्रीम कोर्ट द्वारा 15 सितंबर 2026 को समान परिस्थिति वाले व्यक्ति वरिंदर कुमार गर्ग के मामले में पारित आदेश को ध्यान में रखते हुए दी।
हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह राहत अंतिम जमानत का निर्णय नहीं है।
अंतरिम जमानत का आदेश राज्य सरकार द्वारा दाखिल किए जाने वाले जवाब और सुप्रीम कोर्ट में लंबित एसएलपी के परिणाम के अधीन रहेगा। मामले को अगली सुनवाई के लिए 6 अक्टूबर 2026 को सूचीबद्ध किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
मामला हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से 12 नवंबर 2024 को जोधपुर के कुड़ी भगतासनी थाना, जोधपुर सिटी वेस्ट में दर्ज FIR से जुड़ा है।
एफआईआर में शुरुआत में भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 488 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
जांच के दौरान धारा 409, 336, 120बी और 166ए भी जोड़ी गईं।
एफआईआर राजस्थान हाईकोर्ट भवन, जोधपुर में निर्माण के दौरान सामने आई structural failures से संबंधित है।
24 अगस्त के हाईकोर्ट आदेश का भी रहा संदर्भ
सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से 24 अगस्त 2026 को इसी मामले में हाईकोर्ट की दूसरी पीठ द्वारा पारित आदेश के पैराग्राफ 21 का हवाला दिया गया।
उस आदेश में कहा गया था कि राजस्थान में कोई भी अदालत हाईकोर्ट भवन से जुड़े मामलों में किसी व्यक्ति या अधिकारी को नागरिक अथवा आपराधिक दायित्व से किसी भी प्रकार की सुरक्षा प्रदान करने वाला आदेश पारित नहीं करेगी, जब तक ऐसा आदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ या सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित न किया गया हो।
सुप्रीम कोर्ट के 15 सितंबर के आदेश ने बदला घटनाक्रम
आरोपियों की ओर से कोर्ट को बताया गया कि वरिंदर कुमार गर्ग के मामले में दो दिन पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने 15 सितंबर 2026 को विशेष अनुमति याचिका (SLP) में राहत दी थी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहा गया था कि यदि वरिंदर कुमार गर्ग को चुनौती दिए गए आदेश के अनुपालन में हिरासत में लिया गया है, तो उसे आगे के आदेशों के अधीन तत्काल रिहा किया जाए।
आरोपियों की ओर से इसी आदेश को आधार बनाते हुए कहा गया कि उनकी परिस्थितियां भी समान हैं और उन्हें भी समान राहत दी जानी चाहिए।
राज्य ने जवाब के लिए मांगा समय
सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद तथा अतिरिक्त महाधिवक्ता पक्ष में उपस्थित रहे।
राज्य की ओर से बताया गया कि वर्तमान आवेदकों में से केवल राजेश चंद्र पुरोहित के मामले में जवाब दाखिल किया गया है, जबकि अन्य मामलों में जवाब दाखिल करने और केस डायरी पेश करने के लिए समय की आवश्यकता है। कोर्ट ने राज्य को जवाब दाखिल करने के लिए समय प्रदान किया।
इसके बाद खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के 15 सितंबर के आदेश को ध्यान में रखते हुए वर्तमान आवेदकों को भी समान अंतरिम राहत देना उचित माना।
इन 8 आरोपियों को मिली अंतरिम जमानत
हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार आरोपी राजेश चंद्र पुरोहित, शिव हरे महौर
अजित कुमार सांघी, रामेश्वर दयाल खंडेलवाल, गोपाल लाल खंडेलवाल, अजय किशन मूथा, नवीन चंद्र के. राय और दीपक कुमार मित्तल को अंतरिम तौर पर जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया हैं.
₹1 लाख का व्यक्तिगत बॉन्ड, दो-दो ₹50 हजार की जमानत
खंडपीठ ने प्रत्येक आरोपी को रिहा करने के लिए ₹1 लाख का व्यक्तिगत बॉन्ड और ₹50-50 हजार के दो सक्षम एवं solvent surety bonds प्रस्तुत करने की शर्त लगाई है।
जमानत की औपचारिकताएं संबंधित ट्रायल कोर्ट की संतुष्टि के अनुसार पूरी की जाएंगी।
अंतरिम राहत, अंतिम फैसला नहीं
हाईकोर्ट ने आदेश में साफ किया है कि वर्तमान अंतरिम जमानत राज्य सरकार के जवाब में सामने आने वाले तथ्यों और सुप्रीम कोर्ट में लंबित एसएलपी के अंतिम परिणाम के अधीन रहेगी।
यानी आठों आरोपियों को फिलहाल अंतरिम राहत मिली है, लेकिन मामले की अंतिम कानूनी स्थिति आगे की कार्यवाही पर निर्भर करेगी।