हाईकोर्ट का नया स्टैंडिंग ऑर्डर जारी; न्यायिक अधिकारियों, संवेदनशील और न्यायिक मामलों की शिकायतें पहले की तरह मुख्य न्यायाधीश के पास ही रहेंगी
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने शिकायतों और पत्रों के निस्तारण की प्रक्रिया में बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए नया स्टैंडिंग ऑर्डर जारी किया है।
सेवानिवृत्ति से पूर्व वरिष्ठतम जज जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा की प्रशासनिक शक्तियों में कटौती करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने बड़ा बदलाव किया हैं।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजय के अग्रवाल के आदेश से जारी हुए नए स्टैंडिंग आदेश के तहत अब मुख्य न्यायाधीश को संबोधित अधिकांश पत्र और शिकायतें सीधे उनके समक्ष नहीं जाएंगी, बल्कि उन्हें रजिस्ट्रार (प्रशासन) के माध्यम से जस्टिस विनीत कुमार माथुर के समक्ष पेश कि जायेगी।
जिस पर विचार और आवश्यक आदेश के लिए जस्टिस विनीत माथुर ही निर्णय लेंगे।

गौरतलब हैं कि अब तक इन मामलों में या तो मुख्य न्यायाधीश निर्णय लेते रहे हैं या मुख्य न्यायाधीश के बाद सबसे वरिष्ठतम जज को प्रशासनिक जज के रूप में ये निर्णय लेने की शक्तियां रही हैं।
फिलहाल राजस्थान हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश के बाद जस्टिस एस. पी. शर्मा सबसे वरिष्ठतम जज है जो अगले सप्ताह 26 सितंबर को सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं।
उनकी सेवानिवृत्ति का इंतजार किए बिना जारी हुए इस आदेश को लेकर काफी चर्चा हैं।
किन मामलों में नहीं बदलेगी व्यवस्था?
स्टैंडिंग ऑर्डर के तहत हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह नई व्यवस्था सभी मामलों पर लागू नहीं होगी।
न्यायिक अधिकारियों (Judicial Officers) के खिलाफ शिकायतें, अधीनस्थ न्यायालयों (Subordinate Courts) से जुड़े न्यायिक मामले और राजस्थान हाईकोर्ट से जुड़े न्यायिक मामले और अन्य संवेदनशील (Sensitive) मामले पहले की ही तरह मुख्य न्यायाधीश के समक्ष ही रहेंगे।
इन मामलों को छोड़कर अन्य सभी पत्र और शिकायतें अब नई प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत निस्तारित होंगी।
रजिस्ट्रार (प्रशासन) निभाएंगे अहम भूमिका
नए आदेश के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश को संबोधित सामान्य पत्रों और शिकायतों को पहले रजिस्ट्रार (प्रशासन), राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर के पास भेजा जाएगा।
इसके बाद वे उन्हें जस्टिस विनीत कुमार माथुर के समक्ष विचार और आदेश के लिए पेश करेंगे।
रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी इस आदेश की प्रतियां मुख्य न्यायाधीश के रजिस्ट्रार-कम-प्रिंसिपल सेक्रेटरी, सभी न्यायाधीशों के प्राइवेट सेक्रेटरी, रजिस्ट्रार, संयुक्त रजिस्ट्रार, उप रजिस्ट्रार, सहायक रजिस्ट्रार, वरिष्ठ पुस्तकालयाध्यक्ष तथा जोधपुर और जयपुर बेंच के सभी संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को भेजी गई हैं, ताकि नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू की जा सके।
क्या है इस आदेश का महत्व?
हाईकोर्ट के इस प्रशासनिक फैसले को शिकायतों और पत्राचार की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
इससे सामान्य प्रशासनिक शिकायतों और पत्रों के निस्तारण के लिए एक अलग प्रक्रिया तय होगी, जबकि न्यायिक अधिकारियों, न्यायिक मामलों और संवेदनशील विषयों पर मुख्य न्यायाधीश की प्रत्यक्ष निगरानी पहले की तरह बनी रहेगी।
न्यायिक जगत में आदेश की चर्चा
प्रदेश की न्यायपालिका में पिछले दो दिन से इस आदेश को लेकर काफी चर्चा हैं न्यायिक अधिकारियों से लेकर प्रदेश की समस्त ज्यूडिशरी में इस आदेश को एक सख्त संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा हैं।
इस आदेश के जरिए ना केवल हाईकोर्ट के वरिष्ठतम जज को बाईपास किया गया हैं बल्कि हाईकोर्ट रजिस्ट्री के भी कई अधिकारियों को एक बड़ा संदेश दे दिया गया हैं।
इस आदेश को मुख्य न्यायाधीश की आगामी प्रशासनिक कार्यप्रणाली से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
न्यायिक हलकों में इसे इस संकेत के तौर पर चर्चा में लिया जा रहा है कि मुख्य न्यायाधीश राजस्थान की न्यायपालिका से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसलों की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।