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राजस्थान हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की ‘डबल’ कवायद! पहली बैठक में तबादला, दूसरी में चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश

POCSO Case: Supreme Court Overturns Rajasthan HC Verdict, Acquits Dhanraj Over Evidence Gaps

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने ऐसी कवायद की है, जो हाल के न्यायिक प्रशासनिक घटनाक्रम में बेहद असाधारण मानी जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, राजस्थान हाईकोर्ट के लिए जस्टिस संजय अग्रवाल के नाम को लेकर सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की लगातार दो बैठकें हुईं।

खास बात यह है कि दोनों बैठकों में अलग-अलग संख्या में कॉलेजियम के सदस्यों ने उनके संबंध में महत्वपूर्ण सिफारिशें कीं।

पहली बैठक में 5 जजों ने की तबादले की सिफारिश

जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की एक बैठक में पांच न्यायाधीशों की मौजूदगी में जस्टिस संजय अग्रवाल के तबादले की सिफारिश की गई। इस सिफारिश के तहत उन्हें राजस्थान हाईकोर्ट भेजने का प्रस्ताव सामने आया।

लेकिन इसके बाद कॉलेजियम की दूसरी बैठक ने पूरे घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बना दिया।

दूसरी बैठक में 3 जजों की मौजूदगी में CJR बनाने की सिफारिश

इसके बाद हुई दूसरी बैठक में तीन न्यायाधीशों की कॉलेजियम बैठक में जस्टिस संजय अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश किए जाने की जानकारी सामने आई है।

यानी एक ही न्यायाधीश को लेकर कॉलेजियम स्तर पर पहले तबादले की सिफारिश और उसके बाद मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की गई।

राजस्थान को लेकर कॉलेजियम की तेजी क्यों?

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर राजस्थान हाईकोर्ट के लिए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को इतनी तेजी से कवायद क्यों करनी पड़ी?

क्या कॉलेजियम चाहता था कि जस्टिस संजय अग्रवाल को राजस्थान तत्काल प्रभाव से भेजा जाए, ताकि हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश पद को लेकर चल रही स्थिति का जल्द समाधान किया जा सके?

या फिर इसके पीछे कोई ऐसी प्रशासनिक परिस्थिति थी, जिसके चलते 26 सितंबर तक इंतजार करने के बजाय पहले ही निर्णय लेने की जरूरत महसूस हुई?

Breaking: Rajasthan High Court Acting CJ Says Situation Is Tense as Lawyers Boycott His Court

जस्टिस संजय अग्रवाल के मामले में कॉलेजियम की इस डबल कवायद के पिछे कई कानूनी बिंदू हैं.

जस्टिस अग्रवाल को पहले राजस्थान हाईकोर्ट में ट्रांसफर किया जा सकता है, ताकि वे यहां कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभाल सकें।

बताया जा रहा है कि इसके पीछे प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कारण हो सकता है।

किसी न्यायाधीश के ट्रांसफर के लिए राज्य सरकार की सलाह आवश्यक नहीं होती, जबकि मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति की प्रक्रिया में संबंधित राज्य की सहमति औपचारिक रूप से ली जाती है।

ऐसे में मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति संबंधी सरकारी अधिसूचना जारी होने में समय लगने की स्थिति में पहले ट्रांसफर के जरिए राजस्थान हाईकोर्ट लाकर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की जिम्मेदारी सौंपने का रास्ता अपनाया गया.

26 सितंबर का इंतजार क्यों नहीं?

न्यायिक गलियारों में अब सबसे ज्यादा चर्चा इसी सवाल की है कि क्या सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम 26 सितंबर तक का समय नहीं निकालना चाहता था?

अगर जस्टिस संजय अग्रवाल को पहले केवल राजस्थान हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की सिफारिश की गई और उसके तुरंत बाद उन्हें मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश सामने आई, तो यह घटनाक्रम अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।

राजस्थान हाईकोर्ट में पिछले कुछ दिनों से मुख्य न्यायाधीश के पद और रोस्टर को लेकर जिस तरह के प्रशासनिक एवं न्यायिक घटनाक्रम सामने आए हैं, उसके बीच कॉलेजियम की यह कवायद बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

Supreme Court Judge Raises Serious Concerns Over Rajasthan High Court Administration, Seeks Chief Justice From Another State

क्या राजस्थान हाईकोर्ट को जल्द मिलने वाला है नया चीफ जस्टिस?

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बाद केंद्र सरकार और राष्ट्रपति स्तर पर आगे की प्रक्रिया कितनी तेजी से पूरी होती है।

यदि प्रक्रिया जल्द पूरी होती है, तो जस्टिस संजय अग्रवाल का राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में आगमन राज्य की न्यायिक व्यवस्था में चल रहे मौजूदा घटनाक्रम के बीच बड़ा प्रशासनिक बदलाव साबित हो सकता है।

संभवतया शनिवार तक केन्द्र सरकार की मंजूरी मिलने पर राजस्थान को नए मुख्य न्यायाधीश मिल सकते है.

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