जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने नागौर जिले में अवैध खनन के खिलाफ दायर 2 जनहित याचिकाओं का निस्तारण करते हुए राज्य सरकार की ओर से की जा रही कार्रवाई पर संतोष जताया है।
हाईकोर्ट ने माना कि अवैध खनन रोकने के लिए विभाग की ओर से मामले दर्ज करने, FIR दर्ज कराने और जुर्माना लगाने जैसी कार्रवाई की जा रही है।
चीफ जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की बेंच ने दोनों PIL का निपटारा करते हुए माइंस डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी को निर्देश दिया कि वह समय-समय पर स्थिति की समीक्षा करते रहें, ताकि बिना अनुमति के अवैध खनन करने वालों की गतिविधियों पर रोक सुनिश्चित हो सके।
इस मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट सत्य प्रकाश शर्मा के साथ एडवोकेट अभिमन्यु खत्री और सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता महावीर बिश्नोई, अतिरिक्त महाधिवक्ता सज्जन सिंह राठौड़ और एडवोकेट दीपक चांडक ने पैरवी की।
नागौर में अवैध खनन रोकने की मांग को लेकर दाखिल हुई थी PIL
यह मामला नागौर जिले की खींवसर तहसील के भेर, बूढ़ी (अर्जनपुरा), तांतवास, भोजासर, भावंडा और बलराथल सहित आसपास के इलाकों में अवैध खनन से जुड़ा था।
याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से मांग की थी कि खान विभाग और अन्य सरकारी एजेंसियां संयुक्त रूप से कार्रवाई कर इन इलाकों में अवैध खनन और खनिकों की अवैध खुदाई पर रोक लगाएं।
2016 से 2022 तक 105 अवैध खनन और 897 अवैध ट्रांसपोर्टेशन के केस
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से विस्तृत शपथपत्र पेश किया गया। इसमें नागौर जिले और खास तौर पर खींवसर तहसील में अवैध खनन के खिलाफ की गई कार्रवाई का पूरा ब्यौरा दिया गया।
सरकार के मुताबिक, 2016 से 2022 के बीच नागौर जिले में अवैध खनन के 105 केस और अवैध ट्रांसपोर्टेशन के 897 केस दर्ज किए गए।
इन मामलों में ₹45.09 करोड़ की पेनल्टी लगाई गई, जबकि ₹7.73 करोड़ से ज्यादा की पेनल्टी वसूल की गई। इस दौरान 173 FIR भी दर्ज की गईं।
2023-24 में भी 78 अवैध खनन और 232 ट्रांसपोर्टेशन केस
सरकार ने वर्ष 2023 और 2024 के आंकड़े भी कोर्ट के सामने रखे। वर्ष 2023 में नागौर जिले में अवैध खनन के 38 मामले और अवैध परिवहन के 118 मामले दर्ज किए गए।
इन मामलों में करीब 5.79 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया और 70 FIR दर्ज हुईं। इनमें से करीब 1.51 करोड़ रुपये की जुर्माना राशि वसूल की गई।
वर्ष 2024 में 25 नवंबर तक अवैध खनन के 40 मामले और अवैध परिवहन के 114 मामले दर्ज किए गए। इस दौरान करीब 21.09 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया और 15 FIR दर्ज हुईं।
खींवसर में भी बड़ी कार्रवाई की गई
खींवसर तहसील में भी अवैध खनन और अवैध परिवहन के खिलाफ कार्रवाई का ब्योरा कोर्ट के सामने रखा गया। 2016 से 2022 के बीच यहां अवैध खनन के 68 और अवैध परिवहन के 252 मामले दर्ज किए गए।
इस दौरान करीब 22.46 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया और 43 FIR दर्ज हुईं। इनमें से करीब 3.24 करोड़ रुपये की राशि वसूल की गई।
वहीं, 2023 से 25 नवंबर 2024 तक खींवसर तहसील में अवैध खनन के 28 और अवैध परिवहन के 44 मामले दर्ज किए गए। इस अवधि में करीब 18.46 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया और करीब 97.88 लाख रुपये की राशि वसूल की गई।
अवैध खनन रोकने के लिए गांवों में बनाई गईं चेक पोस्ट
सरकार ने कोर्ट को बताया कि अवैध खनन और खनिजों की खुदाई रोकने के लिए कुछ गांवों में पुलिस और बॉर्डर होमगार्ड की चेक पोस्ट भी बनाई गई हैं।
भेर गांव में 16 सितंबर 2019 को पुलिस और बॉर्डर होमगार्ड की संयुक्त चेक पोस्ट बनाई गई थी। जो अभी भी काम कर रही है। वहीं बेराथल में 12 जनवरी 2023 को बॉर्डर होमगार्ड की चेक पोस्ट शुरू की गई। लालवास गांव में ग्रामीणों की शिकायत के बाद 7 सितंबर 2022 को चेक पोस्ट बनाई गई।
सरकार का कहा कि इन इलाकों में अवैध खनन रोकने के लिए प्रभावी तरीके से निगरानी की जा रही है। कई जगह पहले ही चेक पोस्ट स्थापित की जा चुकी हैं। जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारी अतिरिक्त चेक पोस्ट भी स्थापित कर सकते हैं।
सरकार की कार्रवाई से संतुष्ट हाईकोर्ट, लगातार समीक्षा के निर्देश
हाईकोर्ट ने अवैध खनन के मामलों, दर्ज FIR और लगाई गई वसूली गई पेनल्टी से जुड़े पूरे रिकॉर्ड को देखने के बाद कहा कि माइनिंग डिपार्टमेंट की ओर से उचित कार्रवाई की जा रही है।
हाईकोर्ट ने दोनों PIL का निपटारा कर दिया। हालांकि, माइंस डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी को निर्देश दिया कि वही समय-समय पर स्थिति की समीक्षा करते रहें और यह सुनिश्चित करें कि बिना अनुमति के किसी भी व्यक्ति द्वारा अवैध खनन गतिविधियां न की जाएं।