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हत्या के मामले में दोषी को नहीं मिलेगा पासपोर्ट रिन्यू कराने का अधिकार, राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- अपील लंबित होने से नहीं बदलेगा नियम

Rajasthan High Court Denies Passport Renewal to Murder Convict, Says Pending Appeal Does Not Remove Legal Restriction

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने पासपोर्ट एक्ट से जुड़े एक अहम मामले में स्पष्ट कर दिया है कि हत्या जैसे गंभीर अपराध में दोषी ठहराए जा चुके व्यक्ति को सजा के 5 साल पूरे होने से पहले पासपोर्ट जारी या रिन्यू कराने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ अपील लंबित होने से दोषी व्यक्ति को पासपोर्ट के मामले में राहत नहीं मिल सकती। जब तक कानून में तय शर्तें पूरी नहीं होतीं, पासपोर्ट जारी या रिन्यू नहीं किया जा सकता।

यानी सिर्फ दोषसिद्धि के खिलाफ अपील हाईकोर्ट में लंबित होने से पासपोर्ट के नियमों में कोई बदलाव नहीं होगा।

जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण  और जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की खंडपीठ ने जिनेंद्र सिंह की ओर से दायर आवेदन खारिज कर दिया। लोअर कोर्ट ने मई 2023 में जिनेंद्र सिंह को हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस सजा के खिलाफ उनकी अपील हाईकोर्ट में लंबित है।

‘2 साल की सजा और 5 साल की अवधि पर पासपोर्ट में रोक’

हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान Passport Act, 1967 की धारा 6(2)(E) और 6(2)(F) के अंतर को समझाया।

हाईकोर्ट ने कहा कि पासपोर्ट एक्ट की धारा 6(2)(E) के तहत किसी व्यक्ति को गंभीर अपराध में 2 साल या उससे ज्यादा की सजा हो चुकी है, तो उस पर पासपोर्ट जारी करने या रिन्यू करने को लेकर रोक लग सकती है।

यह रोक उस स्थिति में लागू होती है, जब पासपोर्ट के लिए आवेदन करने से पहले के 5 साल के दौरान व्यक्ति को ऐसे मामले में दोषी ठहराया गया हो।

यानी अगर किसी व्यक्ति को गंभीर अपराध में कम से कम 2 साल की सजा हुई है और उसकी दोषसिद्धि को 5 साल पूरे नहीं हुए हैं, तो उसे पासपोर्ट जारी या रिन्यू कराने में कानूनी रोक का सामना करना पड़ सकता है।

‘हत्या जैसे गंभीर अपराध में पासपोर्ट पर राहत नहीं’

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि हत्या जैसे गंभीर अपराध को बहुत गंभीर और गलत आचरण वाला अपराध माना जाता है। ऐसे मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति को पासपोर्ट एक्ट में दी गई सामान्य छूट का लाभ नहीं दिया जा सकता।

हाईकोर्ट ने साफ किया कि सिर्फ अपील हाईकोर्ट में लंबित होने से दोषसिद्धि खत्म नहीं हो जाती। इसलिए जब तक दोषसिद्धि पर कोई राहत नहीं मिलती, पासपोर्ट जारी या रिन्यू कराने के मामले में संबंधित कानूनी रोक लागू रहेगी।

हाईकोर्ट ने लंबित केस और दोषसिद्धि में अंतर समझाया

हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की 1993 की अधिसूचना का भी जिक्र किया। इसमें ऐसे मामलों में कुछ राहत दी जा सकती है, जहां व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक केस अभी चल रहा हो और उसे कोर्ट ने विदेश जाने की अनुमति दी हो।

लेकिन जिनेंद्र सिंह के मामले में स्थिति अलग है। उन्हें लोअर कोर्ट पहले ही हत्या के मामले में दोषी ठहरा चुकी है। सिर्फ उस सजा के खिलाफ अपील हाईकोर्ट में लंबित होने से यह नहीं माना जाएगा कि दोषसिद्धि खत्म हो गई है। इसलिए उन्हें पासपोर्ट रिन्यू कराने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

इसी आधार पर हाईकोर्ट ने उनका आवेदन खारिज कर दिया। कोर्ट ने माना कि जब कानून में इस स्थिति के लिए स्पष्ट रोक है, तो उसके खिलाफ जाकर पासपोर्ट जारी करने का आदेश नहीं दिया जा सकता।

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