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10 हजार के इनामी हिस्ट्रीशीटर जाहिद उर्फ बुल्टी को हाईकोर्ट से जमानत, पुलिस मुठभेड़ में दोनों पैरों में लगी थी गोली

Rajasthan High Court Grants Bail to ₹10,000 Rewarded History-Sheeter Jahid Alias Bulti Shot in Police Encounter

जयपुर। प्रदेश की चर्चित मुठभेड़ में शामिल डीग के 10 हजार रुपए के इनामी और हार्डकोर हिस्ट्रीशीटर जाहिद उर्फ बुल्टी को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है।

राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ ने सुनवाई के बाद आरोपी हिस्ट्रीशीटर जाहिद उर्फ बुल्टी की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उसे सशर्त जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।

यह वही आरोपी है जिसे नवंबर 2025 में डीग जिले के खोह थाना क्षेत्र में पुलिस मुठभेड़ के दौरान दोनों पैरों में गोली लगी थी।

क्या था पूरा मामला?

7 नवंबर 2025 को डीग जिले के खोह थाना क्षेत्र में डीएसटी टीम और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के दौरान कुख्यात बदमाश जाहिद उर्फ बुल्टी के साथ मुठभेड़ हुई थी।

पुलिस ने दावा किया था कि आरोपी किसी बड़ी वारदात की फिराक में अवैध हथियार के साथ इलाके में घूम रहा था।

सूचना मिलने पर डीएसटी प्रभारी वीरेंद्र सिंह और उनकी टीम ने मौनी बाबा रोड, जटेरी के पास नाकाबंदी की। पुलिस ने जब बाइक सवार आरोपी को रुकने का इशारा किया तो वह भागने लगा और पीछा करने पर पुलिस पार्टी पर कट्टे से फायरिंग शुरू कर दी।

जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने फायरिंग की, जिसमें आरोपी के दोनों पैरों में घुटनों के नीचे गोली लगी और उसे घायल अवस्था में गिरफ्तार कर लिया गया था।

30 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज

गिरफतारी के समय पुलिस ने दावा किया था कि रिकॉर्ड के अनुसार जाहिद उर्फ बुल्टी के खिलाफ चोरी, लूट, अवैध हथियार रखने, जानलेवा हमला और पुलिस पर फायरिंग जैसे करीब 30 आपराधिक मामले दर्ज हैं।

वह लंबे समय से पुलिस की निगरानी में था और उस पर 10 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया था।

मुठभेड़ के बाद पुलिस ने उसके पास से एक देसी कट्टा, कारतूस और मोटरसाइकिल भी बरामद करने का दावा किया था.

हाईकोर्ट ने क्यों दी जमानत?

राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ में दायर जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए अवकाशकालीन जज जस्टिस चंद्र प्रकाश श्रीमाली ने कहा कि केवल पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड के आधार पर किसी आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में नहीं रखा जा सकता।

हाईकोर्ट ने यह भी नोट किया कि आरोपी 7 नवंबर 2025 से न्यायिक हिरासत में है और मामले के सभी गवाहों के बयान अभी दर्ज नहीं हुए हैं।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मुठभेड़ के दौरान पुलिस फायरिंग में आरोपी के दोनों पैरों में गोली लगी थी और वह लंबे समय से जेल में बंद है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले “प्रभाकर तिवारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य” का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि केवल आपराधिक इतिहास जमानत खारिज करने का एकमात्र आधार नहीं हो सकता।

सख्त शर्तों पर मिली राहत

हाईकोर्ट ने जाहिद उर्फ बुल्टी को सशर्त जमानत देते हुए निर्देश दिया कि वह

1 लाख रुपए का निजी मुचलका और 50-50 हजार रुपए की दो जमानतें पेश करेगा।

मामले के ट्रायल के दौरान हर महीने के पहले सप्ताह में संबंधित पुलिस थाने में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगा।

भविष्य में किसी भी समान प्रकृति के अपराध में शामिल नहीं होगा।

अदालत या पुलिस द्वारा बुलाए जाने पर उपस्थित रहेगा।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आरोपी इन शर्तों का उल्लंघन करता है तो अभियोजन पक्ष उसकी जमानत निरस्त कराने के लिए आवेदन प्रस्तुत कर सकता है।

पुलिस मुठभेड़ पर उठे थे सवाल

इस मुठभेड़ के बाद स्थानीय स्तर पर कई तरह की चर्चाएं भी हुई थीं। पुलिस ने इसे आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई बताया था, जबकि बचाव पक्ष का कहना था कि आरोपी को झूठा फंसाया गया और उस पर अत्यधिक बल प्रयोग किया गया।

हालांकि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की और केवल जमानत के प्रश्न पर विचार करते हुए राहत दी।

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