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जुनैद-नासिर हत्याकांड: मोनू मानेसर को राजस्थान हाईकोर्ट से जमानत, अदालत ने लगाई कड़ी शर्तें

Rajasthan High Court Grants Bail to Monu Manesar in Junaid–Nasir Murder Case

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने बहुचर्चित जुनैद–नासिर हत्याकांड के आरोपी मोनू मानेसर (मोहित यादव) को जमानत दे दी है।

फरवरी 2023 में हरियाणा के भिवानी जिले में मिले दो जले हुए शवों से जुड़ा है, जिनकी पहचान राजस्थान के भरतपुर जिले के निवासी जुनैद और नासिर के रूप में हुई थी। इस मामले ने देशभर में काफी चर्चा बटोरी थी।

भरतपुर के गोपालगढ़ थाना क्षेत्र में नासिर और जुनैद की हत्या से जुड़े मामले में जस्टिस अनिल कुमार उपमन की एकलपीठ ने मोनू मानेसर की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया।

राजस्थान हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान मामले की परिस्थितियों, जांच की प्रगति और आरोपी की न्यायिक हिरासत की अवधि को ध्यान में रखते हुए जमानत मंजूर की।

हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी को जमानत का लाभ सख्त शर्तों के साथ दिया जा रहा है और उसे न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग करना होगा।

क्या है जुनैद–नासिर हत्याकांड

मामला 16 फरवरी 2023 को इस्माइल द्वारा गोपालगढ़ थाने में दर्ज कराया गया था।

16 फरवरी 2023 को हरियाणा के भिवानी जिले के लोहारू क्षेत्र में एक जली हुई बोलेरो कार में दो शव मिले थे। बाद में डीएनए जांच से पुष्टि हुई कि ये शव राजस्थान के भरतपुर जिले के घाटमीका गांव के रहने वाले जुनैद और नासिर के थे।

जांच में सामने आया कि दोनों को कथित तौर पर गो-तस्करी के संदेह में कुछ लोगों ने अगवा किया था। आरोप है कि उन्हें बुरी तरह पीटा गया और बाद में कार में जिंदा जलाकर मार दिया गया।

इस मामले में कई लोगों के खिलाफ अपहरण और हत्या के आरोप लगाए गए, जिनमें हरियाणा के गो-रक्षा समूह से जुड़े मोनू मानेसर का नाम भी सामने आया था।

कैसे आया मोनू मानेसर का नाम

जांच के दौरान पुलिस को कई सुराग मिले जिनके आधार पर मोनू मानेसर का नाम आरोपियों की सूची में शामिल किया गया। बाद में राजस्थान पुलिस ने इस मामले में कई लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया।

मोनू मानेसर को सितंबर 2023 में हरियाणा पुलिस ने गिरफ्तार किया था और बाद में राजस्थान पुलिस ने उसे ट्रांजिट रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी।

मामले में अन्य कई आरोपी भी गिरफ्तार किए गए थे और कुछ को अलग-अलग जेलों में रखा गया था।

हाईकोर्ट में क्या हुआ

जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी लंबे समय से जेल में है और ट्रायल की प्रक्रिया अभी जारी है।

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि वह करीब ढाई साल से जेल में बंद है और मामले में पेश 74 गवाहों में से अभी तक एक भी गवाह से जिरह नहीं हुई है, जिससे मुकदमे के जल्द पूरा होने की संभावना कम है।

साथ ही यह भी दलील दी गई कि इसी मामले में सह-आरोपी अनिल कुमार को 28 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। वहीं सरकारी वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि घटना में दो लोगों की मौत हुई है, इसलिए आरोपों की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को जमानत नहीं दी जानी चाहिए।

वकील ने यह भी तर्क दिया कि जांच लगभग पूरी हो चुकी है और आरोपी का ट्रायल में सहयोग करने का इरादा है।

वहीं अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि मामला बेहद गंभीर है और इसमें दो लोगों की हत्या हुई है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ आरोपी को जमानत देने का निर्णय लिया।

अदालत ने लगाई ये शर्तें

हाईकोर्ट ने जमानत देते समय कुछ महत्वपूर्ण शर्तें भी लगाई हैं।

आरोपी को ट्रायल के दौरान नियमित रूप से अदालत में पेश होना होगा

जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करना होगा

किसी भी गवाह को प्रभावित करने या सबूतों से छेड़छाड़ करने की कोशिश नहीं करनी होगी

बिना अनुमति क्षेत्र से बाहर नहीं जा सकेगा

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आरोपी इन शर्तों का उल्लंघन करता है तो उसकी जमानत रद्द की जा सकती है।

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