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Rajasthan Highcourt : स्पेशल एजुकेशन टीचर भर्ती में कोर्ट से बड़ी राहत, सामान्य B.Ed. और दो वर्षीय PG डिप्लोमा को माना जाएगा B.Ed. समकक्ष

Rajasthan High Court Grants Relief to Special Education Teacher Candidates

जयपुर, 3 नवम्बर 2025

Rajasthan Highcourt जोधपुर मुख्यपीठ ने विशेष शिक्षा (स्पेशल एजुकेशन) टीचर भर्ती में दर्जनों अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है।

कोर्ट ने सामान्य बीएड डिग्री के साथ विशेष शिक्षा में दो साल का पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा रखने वाले उम्मीदवारों को बीएड स्पेशल एजुकेशन के समकक्ष मानते हुए राज्य सरकार को नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने के लिए विचार करने का आदेश दिया है।

Rajasthan Highcourt ने इस महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि B.Ed. (General) डिग्री के साथ दो वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन स्पेशल एजुकेशन (PGD-SE) रखने वाले अभ्यर्थियों की योग्यता को B.Ed. इन स्पेशल एजुकेशन के समकक्ष माना जाएगा।

Justice Munnuri Laxman ने राजाराम व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया है।

जस्टिस मुन्नूरी लक्ष्मण की एकलपीठ ने तीन अलग-अलग रिट याचिकाओं में 13 जिलों के कुल 41 अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया है।

यह है मामला

राजस्थान सरकार ने 16 दिसंबर 2022 को शिक्षक ग्रेड-III (Teacher Grade-III Level-II – Special Education) के पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था।

विज्ञापन में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता B.Ed. इन स्पेशल एजुकेशन थी।

याचिकाकर्ताओं के पास सामान्य B.Ed. डिग्री के साथ-साथ दो वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन स्पेशल एजुकेशन की डिग्री थी, लेकिन राज्य सरकार के भर्ती बोर्ड ने इन अभ्यर्थियों को अपात्र मानते हुए उनके आवेदन खारिज कर दिए।

अभ्यर्थियों ने याचिकाएं दायर कर उनकी योग्यता को शामिल करते हुए भर्ती में शामिल करने की मांग की। उनके अनुसार दोनों योग्यताएं मिलकर B.Ed. इन स्पेशल एजुकेशन के बराबर मानी जानी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला

याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने अपने पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले “मनोज कुमार शर्मा बनाम राज्य राजस्थान” का हवाला दिया, जिसमें यह निर्णय दिया गया था कि—

“B.Ed. (General Education) और एक वर्षीय Post Graduate Professional Diploma in Special Education (PG PD-SE) को B.Ed. (Special Education) के समकक्ष माना जा सकता है।”

Rajasthan Highcourt ने कहा कि वर्तमान मामले में याचिकाकर्ताओं के पास दो वर्षीय पीजी डिप्लोमा है, इसलिए उनका मामला सुप्रीम कोर्ट द्वारा विचारित मामले से और भी मजबूत आधार पर खड़ा है।

सरकार की दलील

राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ताओं के मामलों पर विचार केवल रिक्तियों की उपलब्धता और मेरिट के आधार पर किया जाएगा।

राज्य की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि भर्ती प्रक्रिया अब काफी आगे बढ़ चुकी है, इसलिए नियुक्तियों को लागू करने में कुछ प्रशासनिक समय लग सकता है।

हाईकोर्ट का आदेश

Rajasthan Highcourtने अपने फैसले में कहा कि “राज्य सरकार याचिकाकर्ताओं की शैक्षणिक योग्यता — B.Ed. (General) और दो वर्षीय Post Graduate Diploma in Special Education — को B.Ed. (Special Education) के समकक्ष माने और उनके आवेदन पर विधिसम्मत कार्रवाई करे।”

अदालत ने यह भी आदेश दिया कि यह संपूर्ण प्रक्रिया दो माह के भीतर पूरी की जाए।

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