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राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: पेनल्टी जमा कराने के बावजूद खनन पट्टे रद्द कर नीलामी का प्रयास-12 दिसंबर की नीलामी प्रक्रिया पर रोक

Rajasthan High Court Halts December 12 Mining Lease Auction After Penalty Already Deposited by Petitioners

जयपुर, 10 दिसंबर

राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ ने अवैध खनन की पेनल्टी जमा कराने के बावजूद खनन पट्टे रद्द कर उनकी नीलामी निकालने के दो अलग-अलग मामलों पर सुनवाई करते हुए 12 दिसंबर को खनन पट्टों की प्रस्तावित ई-नीलामी प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी है।

जस्टिस संदीप तनेजा की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता अनिल कुमार कसाना और कमल खटाना की अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है।

याचिकाकर्ता की दलीलें

अधिवक्ता अरविंद सोनी ने कोटपुतली के अनिल कसाना और कमल खटाना की ओर से दायर याचिका में पैरवी करते हुए अदालत को बताया कि अवैध खनन के मामले में दोनों याचिकाकर्ताओं पर लगाई गई पेनल्टी जमा करा दी गई है।

विभाग ने खुद स्वीकार किया है कि राशि जमा हो चुकी है और अमनेस्टी योजना के तहत मुकदमे वापस लेने की शर्त भी पूरी हो चुकी है।

ऐसे में विभाग द्वारा लीज़ बहाल किए बिना सीधे नीलामी प्रक्रिया शुरू करना प्रथम दृष्टया अनुचित और न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।

ये है मामला

याचिकाकर्ता अनिल कुमार कसाना को कोटपुतली में चेज़ा स्टोन खनन पट्टा संख्या 40/2010 जारी किया गया था।

याचिका में कहा गया कि जिस क्षेत्र में अवैध खनन हुआ, वह स्थानीय ग्रामीणों और क्रशर मालिकों द्वारा किया गया था, जिसकी शिकायतें उन्होंने बार-बार की थीं। विभाग की निरीक्षण रिपोर्टें भी इसका समर्थन करती हैं।

इसके बावजूद 29 दिसंबर 2017 को उन्हें बिना पूर्व नोटिस दिए 2.23 करोड़ रुपये की पेनल्टी लगा दी गई और बाद में 11 जून 2018 को खनन पट्टा रद्द कर दिया गया।

याचिका में कहा गया कि पेनल्टी जमा करने और अमनेस्टी योजना 2024–25 के तहत मुकदमे वापस लेने के बावजूद विभाग ने उनकी लीज़ बहाल नहीं की और 12 दिसंबर को नीलामी घोषित कर दी।

दूसरा मामला

वहीं दूसरे मामले में याचिकाकर्ता कमल सिंह खटाना को पट्टा संख्या 22/2009 जारी है।

खनन विभाग ने कमल खटाना पर 11.18 करोड़ रुपये की पेनल्टी लगाई और 9 फरवरी 2018 को उनका पट्टा भी बिना सुनवाई रद्द कर दिया।

याचिका में कहा गया कि अमनेस्टी योजना के तहत संपूर्ण पेनल्टी जमा कर दी, लेकिन फिर भी विभाग ने पट्टा बहाल नहीं किया और नीलामी प्रक्रिया आगे बढ़ाई।

हाईकोर्ट का आदेश

बहस सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि दोनों याचिकाकर्ताओं ने पेनल्टी जमा करा दी है और अमनेस्टी योजना के तहत मुकदमे वापस लेने की शर्त भी पूरी हो चुकी है।

ऐसे में विभाग द्वारा लीज़ बहाल किए बिना सीधे नीलामी प्रक्रिया शुरू करना प्रथम दृष्टया अनुचित और न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।

हाईकोर्ट ने 12 दिसंबर को प्रस्तावित नीलामी प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए खनन विभाग से संपूर्ण रिकॉर्ड तलब किया है।

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