जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने शारीरिक शिक्षा से जुड़ी एक महत्वपूर्ण और रिपोर्टेबल जजमेंट के जरिसए फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन (BPE) तीन वर्षीय डिग्री को बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन (B.P.Ed) के समकक्ष माना जाएगा और ऐसे अभ्यर्थियों को पीटीआई ग्रेड-III (Physical Training Instructor) पद पर नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।
इस फैसले से प्रदेश के सैकड़ों अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है, जो वर्षों से नियुक्ति से बाहर रखे गए थे।
हाईकोर्ट का स्पष्ट रूख
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस मनीष शर्मा की खंडपीठ ने सभी विशेष अपीलों को एक साथ सुनते हुए स्पष्ट किया कि यह विवाद केवल डिग्री के नाम और शॉर्ट फॉर्म का है, न कि योग्यता के स्तर का।
कोर्ट ने कहा कि BPE तीन वर्षीय पाठ्यक्रम स्वयं में एक पूर्ण व्यावसायिक (Professional) योग्यता है और इसे केवल नाम के आधार पर B.P.Ed से अलग नहीं किया जा सकता।
NCTE की भूमिका और अहम तथ्य
इस मामले में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) को भी पक्षकार बनाया गया था।
NCTE ने अपने जवाब में साफ तौर पर स्वीकार किया कि BPE तीन वर्षीय डिग्री को परिषद द्वारा मान्यता प्राप्त है और इसे B.P.Ed के समकक्ष माना जाता है।
NCTE ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे अभ्यर्थी PTI शिक्षक पद पर नियुक्ति के लिए पात्र हैं। कोर्ट ने NCTE के इस स्पष्टीकरण को निर्णायक माना।
हाईकोर्ट की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि किसी लंबी अवधि वाले पाठ्यक्रम (तीन वर्ष) को केवल इस आधार पर कमतर नहीं ठहराया जा सकता कि B.P.Ed एक वर्षीय है।
कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि केवल “BPE” और “B.P.Ed” जैसे संक्षिप्त नामों के आधार पर अधिक योग्य और मेधावी अभ्यर्थियों को नियुक्ति से वंचित करना अनुचित और मनमाना है।
हाईकोर्ट का आदेश
हाईकोर्ट ने सभी अपीलें स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि BPE तीन वर्षीय डिग्रीधारकों की उम्मीदवारियां मेरिट के आधार पर पुनः विचार की जाएं।
यदि वे विज्ञापन की अन्य शर्तें पूरी करते हैं, तो उन्हें PTI ग्रेड-III पद पर नियुक्ति का लाभ दिया जाए।
नियुक्ति का लाभ नोशनल (काल्पनिक) रूप से उस तिथि से दिया जाए, जब उनसे कम मेरिट वाले अभ्यर्थियों को नियुक्त किया गया था।
वास्तविक वित्तीय लाभ याचिका दायर करने की तिथि से देय होंगे। आदेश का दो माह के भीतर पालन सुनिश्चित किया जाए।
क्या था पूरा विवाद
दरअसल, राजस्थान में पीटीआई ग्रेड-III भर्ती के लिए जारी विज्ञापनों में शैक्षणिक योग्यता के रूप में B.P.Ed अथवा D.P.Ed/C.P.Ed का उल्लेख किया गया था।
कई अभ्यर्थियों के पास BPE (तीन वर्षीय) डिग्री थी, जो उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय, अमरावती विश्वविद्यालय सहित अन्य मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों से प्राप्त की थी।
भर्ती प्रक्रिया में इन अभ्यर्थियों को यह कहते हुए अयोग्य ठहरा दिया गया कि BPE और B.P.Ed अलग-अलग पाठ्यक्रम हैं और BPE को विज्ञापन में मान्य नहीं किया गया है।
इस आधार पर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर कीं।
एकलपीठ द्वारा पूर्व के एक निर्णय (गणेश नारायणमाली प्रकरण) के आधार पर याचिकाएं खारिज कर दी गई थीं, जिसके बाद विशेष अपीलें दायर की गईं।