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जेजेएम घोटाले में महेश जोशी की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट सख्त, एसीएस होम और डीजीपी को जारी किया नोटिस

Rajasthan High Court Issues Notice Over Arrest of Former Minister Mahesh Joshi in JJM Scam Case

कोर्ट ने पूछा- गिरफ्तारी के दौरान कानूनी प्रावधानों का पालन हुआ या नहीं?; बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर 10 जून को अगली सुनवाई

जयपुर। जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले से जुड़े बहुचर्चित मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने पूर्व मंत्री महेश जोशी की गिरफ्तारी को लेकर राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से जवाब तलब किया है।

हाईकोर्ट ने एसीएस होम और डीजीपी को नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि क्या पूर्व मंत्री की गिरफ्तारी के दौरान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के तहत निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसपी शर्मा और जस्टिस बीएस संधू की खंडपीठ ने यह आदेश महेश जोशी के बेटे रोहित जोशी की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 10 जून को होगी।

बेटे ने दायर की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका

महेश जोशी के बेटे रोहित जोशी ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने 7 मई को उनके पिता को गिरफ्तार किया, लेकिन गिरफ्तारी के समय कानून में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।

याचिका में कहा गया कि गिरफ्तारी के दौरान एसीबी अधिकारियों ने परिवार को गिरफ्तारी के कारणों की लिखित जानकारी नहीं दी।

जबकि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) में स्पष्ट प्रावधान है कि किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी के समय उसके परिजनों को गिरफ्तारी के आधार और कारणों की लिखित सूचना देना अनिवार्य है।

याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष यह भी कहा कि यदि गिरफ्तारी की मूल प्रक्रिया ही कानून के अनुरूप नहीं हुई, तो उसके बाद दिया गया पुलिस रिमांड और आगे की पूरी कार्रवाई भी कानूनी रूप से संदिग्ध हो जाती है।

“गिरफ्तारी से लेकर रिमांड तक पूरी कार्रवाई अवैध”

याचिका में दावा किया गया कि एसीबी ने गिरफ्तारी के दौरान संवैधानिक और वैधानिक अधिकारों की अनदेखी की। याचिकाकर्ता के अनुसार, गिरफ्तारी के कारणों की लिखित सूचना न देना बीएनएसएस के प्रावधानों का सीधा उल्लंघन है।

रोहित जोशी की ओर से कोर्ट में कहा गया कि इस प्रक्रियात्मक खामी के चलते महेश जोशी की गिरफ्तारी “गैर-कानूनी” और “अवैध” हो गई है।

साथ ही गिरफ्तारी के बाद कोर्ट से लिया गया पुलिस रिमांड और आगे की समस्त कार्रवाई भी अवैध मानी जानी चाहिए।

याचिका में अदालत से आग्रह किया गया कि नियमों की अनदेखी और कानूनी प्रक्रिया के उल्लंघन को देखते हुए महेश जोशी को तत्काल रिहा करने के आदेश दिए जाएं।

जेजेएम घोटाले में बढ़ती कानूनी हलचल

जल जीवन मिशन घोटाले को लेकर पहले से ही कई बड़े अधिकारी और कारोबारी जांच के घेरे में हैं। इसी मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल को एसीबी ने 9 अप्रैल को दिल्ली से गिरफ्तार किया था।

अब सुबोध अग्रवाल की जमानत याचिका पर एसीबी कोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है।इसके अलावा मामले के अन्य आरोपियों—शुभांशु दीक्षित, निरील कुमार, सुशील कुमार, दिनेश गोयल और अरुण श्रीवास्तव—की जमानत याचिकाओं पर भी हाईकोर्ट में बहस पूरी हो चुकी है। हाईकोर्ट ने इन मामलों में फैसला सुरक्षित रख लिया है और जल्द आदेश जारी किए जाने की संभावना है।

कानूनी प्रक्रिया पर उठे बड़े सवाल

महेश जोशी की गिरफ्तारी को लेकर दायर याचिका ने एक बार फिर जांच एजेंसियों की कार्रवाई और गिरफ्तारी प्रक्रिया को लेकर बहस छेड़ दी है।

मामला केवल भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब यह गिरफ्तारी के दौरान आरोपी के संवैधानिक अधिकारों और कानूनी सुरक्षा से भी जुड़ गया है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हाईकोर्ट यह पाता है कि गिरफ्तारी के दौरान निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ, तो इसका प्रभाव न केवल महेश जोशी के मामले पर पड़ेगा, बल्कि भविष्य में जांच एजेंसियों की कार्रवाई के मानकों पर भी असर दिखाई दे सकता है।

फिलहाल, पूरे मामले पर सभी की नजरें 10 जून को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं, जहां राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को हाईकोर्ट के समक्ष अपना जवाब प्रस्तुत करना होगा।

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