जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ में अधिवक्ताओं के लिए उपलब्ध कराए जा रहे पेयजल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
एक अधिवक्ता ने हाईकोर्ट परिसर में स्थित पानी की प्याऊ के पानी की गुणवत्ता जांचने का दावा करते हुए इसका वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया, जो देखते ही देखते वायरल हो गया।

वीडियो सामने आने के बाद हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं के बीच पेयजल की गुणवत्ता को लेकर नाराजगी देखने को मिल रही है। अधिवक्ताओं के सोशल मीडिया ग्रुप में भी इस मुद्दे पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं और पेयजल की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की जा रही है।
प्याऊ के पानी का TDS 500 से अधिक होने का दावा
वायरल वीडियो में अधिवक्ता पानी की प्याऊ पर उपलब्ध पेयजल का TDS (Total Dissolved Solids) जांचते नजर आ रहे हैं। वीडियो में TDS की रीडिंग 500 से अधिक दिखाई देने का दावा किया गया है।
अधिवक्ता ने वीडियो के जरिए पानी की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए इसे पीने योग्य नहीं होने का दावा किया है। हालांकि, केवल TDS रीडिंग के आधार पर पानी को स्वास्थ्य की दृष्टि से सुरक्षित या असुरक्षित घोषित नहीं किया जा सकता। इसके लिए अधिकृत प्रयोगशाला में पानी की विस्तृत जांच आवश्यक होती है।
वीडियो वायरल होते ही अधिवक्ताओं में आक्रोश
बुधवार को सामने आए इस वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ के अधिवक्ताओं के बीच मामला चर्चा का विषय बन गया। कई अधिवक्ताओं ने सोशल मीडिया ग्रुप में पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई।
अधिवक्ताओं का कहना है कि हाईकोर्ट जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में बड़ी संख्या में अधिवक्ता, न्यायिक अधिकारी, कर्मचारी और पक्षकार प्रतिदिन आते हैं। ऐसे में परिसर में उपलब्ध पेयजल की गुणवत्ता को लेकर किसी भी तरह की आशंका को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट प्रशासन ने लिया प्रसंज्ञान
सोशलमीडिया पर वायरल वीडियो के बाद बिल्डिंग कमेटी ने प्रसंज्ञान लेते हुए बुधवार देर रात ही जांच के आदेश दे दिए, जिसके बाद गुरूवार अल सुबह ही हाईकोर्ट प्रशासन ने सभी स्रोतो की भी जांच कराई हैं.
जानकारी के अनुसार हाईकोर्ट प्रशासन के अधिन आने वाले पानी के सभी स्रोत की जांच करायी गयी हैं वही ये अलग बात हैं कि जो वीडियो वायरल हुआ है वह बार के अधिन आने वाली पानी की प्याउ हैं जो हाईकोर्ट प्रशासन के नियत्रंण में नही हैं.

क्या सिर्फ TDS से तय होती है पानी की गुणवत्ता?
वायरल वीडियो में मुख्य रूप से TDS रीडिंग को आधार बनाया गया है। हालांकि, पानी की वास्तविक गुणवत्ता निर्धारित करने के लिए सिर्फ TDS पर्याप्त नहीं होता। पानी में मौजूद बैक्टीरिया, रासायनिक तत्व, भारी धातुएं और अन्य प्रदूषकों की जांच भी जरूरी होती है।
ऐसे में वायरल वीडियो के बाद उठे सवालों का अंतिम जवाब अधिकृत जल गुणवत्ता परीक्षण के बाद ही सामने आ सकता है।

प्रशासन की जांच में पानी की गुणवता सही
राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से गुरूवार सुबह कि गयी पानी की जांच में सभी जगह पर पानी की गुणवता सही पायी गयी.
हाईकोर्ट प्रशासन ने राजस्थान हाईकोर्ट की छत पर लगी टंकियो से लेकर कॉरिडोर में उपलब्ध कराए जा रहे पानी की गुणवता की जांच की हैं.
इस जांच में पानी की गुणवता 110 से 140 टीडीएस बताई गयी हैं.
हाईकोर्ट प्रशासन ने जिस जगह का वीडियो वारयल हुआ उस पानी की प्याउ की भी जांच की हैं, लेकिन ये प्याउ बार के अधिन होने के चलते फिलहाल प्रशासन इसकी रिपोर्ट बना रहा हैं.
अधिवक्ताओं ने उठाए गंभीर सवाल
वीडियो वायरल होने के बाद अधिवक्ताओं के बीच सवाल उठ रहा है कि हाईकोर्ट परिसर में उपलब्ध पेयजल की नियमित गुणवत्ता जांच होती है या नहीं और यदि होती है तो उसकी रिपोर्ट क्या है।
अधिवक्ता विनायक जोशी ने इसे लेकर गंभीर चिंता जताई हैं विनायक जोशी के अनुसार पानी की गुणवत्ता का मामला वो भी राजस्थान हाईकोर्ट जैसी जगह पर बड़े सवाल खड़े करता हैं अब तक इस मामले में किसी ने भी कोई कार्रवाई नहीं कि ये भी बड़ी बात हैं.

वही अधिवक्ता आर पी सैनी इसे एक बेहद गंभीर चूक मानते हैं आर पी सैनी कहते हैं कि संपूर्ण प्रदेश के लिए अधिवक्ता स्वच्छ पानी से लेकर हर मांग को लेकर संघर्ष करते हैं लेकिन न्याय के सबसे बड़े मंदिर में ही उन अधिवक्ताओं को स्वच्छ पानी नहीं मिल पा रहा है.

फिलहाल वायरल वीडियो ने राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ में अधिवक्ताओं के लिए उपलब्ध पेयजल व्यवस्था पर गंभीर बहस छेड़ दी है।