प्रदेश के मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सहित हाईकोर्ट जज होंगे समारोह के अतिथी
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ और हाईकोर्ट जयपुर बार एसोसिएशन आज अपना 50 वां स्थापना दिवस/ बेंच डे मना रही हैं.
इस ऐतिहासिक अवसर पर राजस्थान हाईकोर्ट, जयपुर के फ्रंट लॉन में आज शाम 6 बजे भव्य और गरिमामयी समारोह का आयोजन किया जाएगा।

कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, गृह राज्य मंत्री जवाहरसिंह बेढ़म, राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा सहित हाईकोर्ट के सभी न्यायाधीश, वरिष्ठ अधिवक्ता, प्रशासनिक अधिकारी और विधि जगत से जुड़े गणमान्य अतिथि शिरकत करेंगे।
समारोह के मुख्य अतिथि राज्य के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा करेंगे, जबकि विशेष अतिथि के रूप में गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म की उपस्थिति रहेगी।

50वें स्थापना वर्ष में प्रवेश
राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ का 50 वर्ष पूर्ण कर 50वें स्थापना वर्ष में प्रवेश करना अपने-आप में ऐतिहासिक उपलब्धि है।
इन पांच दशकों में जयपुर पीठ ने न्याय तक सुगम पहुंच, संवैधानिक अधिकारों की रक्षा, विधि के विकास और जनहित याचिकाओं के माध्यम से समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
जयपुर पीठ की इस गौरवशाली यात्रा में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने भी बेंच के साथ कंधे से कंधा मिलाकर न्यायिक प्रणाली को सुदृढ़ बनाने में अहम योगदान दिया है।

बार की नई कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण
स्थापना दिवस समारोह के साथ-साथ राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर की नव-निर्वाचित कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोह भी आयोजित किया जाएगा।
बार एसोसिएशन के 42वें अध्यक्ष राजीव सोगरवाल और महासचिव दीपेश शर्मा सहित संपूर्ण पदाधिकारी और कार्यकारिणी सदस्य अपने-अपने पदों की औपचारिक शपथ लेंगे।
नई कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष अनुराग कलवाटिया और सुनील शर्मा, कोषाध्यक्ष प्रीति शर्मा, पुस्तकालय सचिव बॉबी दत्ता, संयुक्त सचिव हिमांशी मीणा, सोशल सचिव उपासना आर्य तथा कार्यकारिणी सदस्य के रूप में कुलदीप शर्मा, अनुश्री अग्रवाल, शुभम जैन, सौरभ तिवारी, अजय सिंह राजावत, नरेंद्र पारीक, दुष्यंत सिंह नरूका और देवेंद्र शर्मा शामिल हैं।

31 जनवरी: न्यायिक इतिहास की महत्वपूर्ण तिथि
राजस्थान के न्यायिक इतिहास में 31 जनवरी एक अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है। इसी दिन वर्ष 1977 में राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ की विधिवत स्थापना हुई थी।
31 जनवरी 2026 को जयपुर पीठ और हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर अपने 49 वर्ष पूर्ण कर 50वें स्थापना वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं।
इस ऐतिहासिक अवसर को यादगार बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं।
आज़ादी के बाद की न्यायिक पुनर्रचना
भारत की आज़ादी के बाद प्रशासनिक और न्यायिक ढांचे के पुनर्गठन की आवश्यकता महसूस की गई।
वर्ष 1956 में राज्य पुनर्गठन अधिनियम लागू हुआ, जिसके तहत राजस्थान के लिए एक स्वतंत्र हाईकोर्ट की स्थापना का प्रावधान किया गया।
जोधपुर को न्यायिक राजधानी के रूप में स्वीकार किया गया और वहीं राजस्थान हाईकोर्ट की मुख्य पीठ स्थापित हुई।
जयपुर में अस्थायी पीठ की स्थापना तो हुई, लेकिन वर्ष 1958 में उसे समाप्त कर दिया गया। इस निर्णय के बाद जयपुर और आसपास के क्षेत्रों में गहरा असंतोष फैल गया।
संघर्ष से स्थापना तक
जयपुर पीठ की समाप्ति के बाद अधिवक्ता समुदाय, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक नेतृत्व ने मिलकर इसके पुनर्स्थापन के लिए लंबा संघर्ष किया। कार्य बहिष्कार, धरना-प्रदर्शन और आंदोलनों के बाद आखिरकार 8 दिसंबर 1976 को राष्ट्रपति के आदेश से जयपुर पीठ की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ।

31 जनवरी 1977 को, आपातकाल के दौर में, जयपुर पीठ ने विधिवत रूप से कार्य करना शुरू किया। शुरुआती दौर में सीमित संसाधनों और सुविधाओं के बावजूद न्यायिक कार्य पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ संपन्न हुआ।
बार एसोसिएशन का गठन और योगदान
31 जनवरी 1977 को ही राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर का गठन हुआ। यह संगठन आगे चलकर अधिवक्ताओं के हितों की रक्षा के साथ-साथ न्यायिक सुधारों और लोकतांत्रिक आंदोलनों का मजबूत केंद्र बना।
देश को मिलीं अनेक दिग्गज हस्तियां
जयपुर पीठ और जयपुर बार ने देश को अनेक न्यायिक और राजनीतिक हस्तियां दी हैं। इस बार से निकले कई नाम सुप्रीम कोर्ट, विभिन्न हाईकोर्ट और संवैधानिक पदों तक पहुंचे, जिन्होंने देश की न्यायिक व्यवस्था को दिशा दी।

भविष्य की ओर कदम
आज जयपुर पीठ केवल एक न्यायिक संस्थान नहीं, बल्कि लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ बन चुकी है। ई-कोर्ट, डिजिटल फाइलिंग, वर्चुअल सुनवाई और त्वरित न्याय की दिशा में जयपुर पीठ ने उल्लेखनीय प्रगति की है।

50वें स्थापना वर्ष में प्रवेश का यह अवसर अतीत के संघर्षों को स्मरण करने, वर्तमान की उपलब्धियों को सम्मान देने और भविष्य की न्यायिक चुनौतियों के लिए संकल्प लेने का प्रतीक है।