जयपुर। भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के उपलक्ष्य में राजस्थान में एक अनूठी और रचनात्मक पहल की जा रही है।
प्रदेशभर के विद्यार्थियों के लिए 14 अप्रैल को राजस्थान हाईकोर्ट के सतीशचंद्र सभागार में राज्यस्तरीय डॉक्यूमेंट्री प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा।
यह आयोजन LEGAL संस्थान और राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (RHCBA) के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है, जिसमें युवाओं को अपने विचार और रचनात्मकता प्रदर्शित करने का एक बड़ा मंच मिलेगा।
इस प्रतियोगिता के उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस अशोक कुमार जैन होंगे, जिनकी गरिमामयी उपस्थिति इस आयोजन को विशेष महत्व प्रदान करेगी।
पोस्टर का हुआ भव्य विमोचन
प्रतियोगिता के प्रचार-प्रसार की शुरुआत गुरुवार को एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के साथ हुई, जब राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस अशोक कुमार जैन, जस्टिस गणेशराम मीणा और जस्टिस भुवन गोयल ने प्रतियोगिता के पोस्टर का विमोचन किया।
इस अवसर पर आयोजन से जुड़े कई सदस्य और विधि क्षेत्र के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

इस मौके पर एडवोकेट हिम्मतसिंह जादौन, दीपक मीणा, डॉ प्रेरणा जोशी, अनामिका अरोड़ा, गुडिया सिंह और इशा नटानी मौजूद रहें.
पोस्टर विमोचन के साथ ही प्रतियोगिता को लेकर छात्रों के बीच उत्साह और जिज्ञासा में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल रही है।
खास बात यह है कि यह प्रतियोगिता केवल लॉ के छात्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि नॉन-लॉ कॉलेजों के विद्यार्थी भी इसमें भाग ले सकते हैं।
छात्रों में जबरदस्त उत्साह
आयोजन की घोषणा के बाद से ही प्रदेशभर के कॉलेजों में इस प्रतियोगिता को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।
अब तक कुल 18 टीमों ने अपना पंजीकरण करा लिया है और आने वाले दिनों में इस संख्या के और बढ़ने की उम्मीद है।

यह प्रतियोगिता न केवल छात्रों की रचनात्मकता को मंच प्रदान करती है, बल्कि उन्हें बाबा साहेब अंबेडकर के जीवन, संघर्ष और उनके विचारों को गहराई से समझने का अवसर भी देती है।
आज के युवाओं के लिए यह एक ऐसा माध्यम बनकर सामने आ रही है, जहां वे सामाजिक और संवैधानिक मूल्यों को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत कर सकते हैं।
रचनात्मकता और सामाजिक चेतना का संगम
LEGAL संस्थान की संयोजक ऋषिका अग्रवाल के अनुसार, यह प्रतियोगिता केवल एक प्रतिस्पर्धा नहीं है, बल्कि यह युवाओं के लिए अपने विचारों को प्रभावशाली तरीके से व्यक्त करने का मंच है।
उन्होंने बताया कि प्रतिभागियों को बाबा साहेब अंबेडकर के जीवन के विभिन्न पहलुओं—जैसे उनके संघर्ष, उपलब्धियाँ, दूरदर्शी सोच और कम चर्चित घटनाओं—पर आधारित डॉक्यूमेंट्री तैयार करनी होगी।
इस प्रक्रिया में छात्रों को रिसर्च, स्क्रिप्ट लेखन, वीडियो निर्माण और टीमवर्क जैसे महत्वपूर्ण कौशल सीखने का अवसर मिलेगा, जो उनके भविष्य के करियर में भी सहायक सिद्ध हो सकते हैं।
प्रतियोगिता की मुख्य विशेषताएं
इस राज्यस्तरीय प्रतियोगिता को पूरी तरह ऑफलाइन मोड में आयोजित किया जाएगा। इसमें लॉ और नॉन-लॉ दोनों प्रकार के कॉलेजों के छात्र भाग ले सकते हैं। प्रतियोगिता टीम आधारित होगी, जिसमें प्रत्येक टीम में अधिकतम 5 सदस्य शामिल हो सकते हैं।
प्रतिभागियों को अधिकतम 3 मिनट की डॉक्यूमेंट्री वीडियो तैयार करनी होगी, जिसमें वे बाबा साहेब के जीवन के किसी भी पहलू को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत कर सकेंगे। प्रतियोगिता के लिए ₹500 पंजीकरण शुल्क निर्धारित किया गया है।
कल अंतिम तिथि
प्रतियोगिता के लिए पंजीकरण और वीडियो सबमिशन की अंतिम तिथि 10 अप्रैल 2026 तय की गई है। इसके बाद चयनित टीमों को 14 अप्रैल 2026 को जयपुर में आयोजित फाइनल प्रेजेंटेशन के लिए आमंत्रित किया जाएगा।
फाइनल प्रेजेंटेशन और पुरस्कार वितरण समारोह अंबेडकर जयंती के दिन आयोजित होगा, जिससे इस आयोजन का महत्व और भी बढ़ जाता है।
आकर्षक पुरस्कार और सम्मान
प्रतियोगिता में विजेताओं के लिए आकर्षक पुरस्कारों की घोषणा की गई है।
प्रथम स्थान: ₹5,100
द्वितीय स्थान: ₹3,100
तृतीय स्थान: ₹2,100
इसके अतिरिक्त 11 सांत्वना पुरस्कार भी दिए जाएंगे, जिनमें प्रत्येक विजेता को ₹1,100 की राशि प्रदान की जाएगी। सभी विजेताओं को प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया जाएगा।
युवाओं के लिए सुनहरा अवसर
आयोजन समिति ने प्रदेशभर के छात्रों से अपील की है कि वे इस प्रतियोगिता में अधिक से अधिक भाग लें और अपनी प्रतिभा को एक बड़े मंच पर प्रस्तुत करें।
यह पहल युवाओं को न केवल रचनात्मक दिशा प्रदान करती है, बल्कि उन्हें संविधान, समानता और सामाजिक न्याय जैसे मूल्यों के प्रति जागरूक भी बनाती है।
अंबेडकर जयंती के अवसर पर आयोजित यह प्रतियोगिता निश्चित रूप से युवाओं में नई सोच, जागरूकता और रचनात्मक ऊर्जा का संचार करेगी।
यह आयोजन आने वाले समय में छात्रों के लिए एक प्रेरणास्रोत के रूप में भी उभर सकता है, जहां वे अपने विचारों के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास कर सकें।