राजस्थान हाईकोर्ट में एक दिन में 3400 से अधिक मुकदमे सूचीबद्ध, 50 प्रतिशत मामलों की सुनवाई
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट में आज से शीतकालीन अवकाश शुरू हो गए हैं।
शुक्रवार का दिन शीतकालीन अवकाश से पूर्व अंतिम कार्यदिवस होने के चलते मुकदमों की सुनवाई के मामलों में एक अलग ही रिकॉर्ड बना गया है।
राजस्थान हाईकोर्ट में एक ही दिन में 3400 से अधिक मुकदमों को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था।
हाईकोर्ट की केवल दो अदालतों के समक्ष ही 1425 मुकदमे सूचीबद्ध किए गए थे।
जिसमें सबसे ज्यादा जस्टिस विनोद कुमार भारवानी की बेंच के समक्ष 726 मुकदमों को सुनवाई के लिए रखा गया था।
वहीं जस्टिस अनिल कुमार उपमन की अदालत के समक्ष कुल 699 मुकदमों को सूचीबद्ध किया गया था।
मुकदमों की मैराथन सुनवाई
जहां एक ओर दोपहर बाद राष्ट्रीय लोक अदालत के आयोजन के चलते हाईकोर्ट की अधिकांश अदालतों में नियमित न्यायिक कार्य स्थगित कर दिया गया, वहीं दूसरी ओर जस्टिस अनिल कुमार उपमन की अदालत देर शाम तक नियमित सुनवाई करती रही।
अंतिम कार्यदिवस के चलते अधिवक्ताओं की उम्मीदें बेहद ज्यादा थीं, जिसे जस्टिस उपमन की अदालत ने भी निराश नहीं किया।
शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे से शुरू हुई सुनवाई लगातार शाम 7 बजे तक जारी रही।
इस दौरान जस्टिस उपमन ने बिना थके एक के बाद एक प्रकरणों की सुनवाई की।
जस्टिस अनिल कुमार उपमन की अदालत में इस एक ही दिन के लिए कुल 699 मुकदमे सूचीबद्ध किए गए थे। इनमें से मुख्य वाद सूची (मेन कॉज लिस्ट) में 534 प्रकरण शामिल थे, जबकि पूरक वाद सूची (सप्लीमेंट्री लिस्ट) में 165 मुकदमे सूचीबद्ध थे।
कोर्टरूम में शुरू हुए पंखे
अंतिम कार्यदिवस होने के कारण बड़ी संख्या में अधिवक्ता अपने-अपने मामलों की सुनवाई के लिए अदालत पहुंचे थे।
हालांकि दोपहर बाद राष्ट्रीय लोक अदालत के कारण हाईकोर्ट की अन्य अदालतों में नियमित सुनवाई स्थगित रही, लेकिन जस्टिस उपमन की अदालत में न्यायिक कार्य निरंतर जारी रहा।
उन्होंने भोजनावकाश के दौरान भी केवल कुछ ही मिनटों का अल्प विराम लिया और इसके तुरंत बाद पुनः अदालत में बैठकर सुनवाई प्रारंभ कर दी।
शाम होते-होते जस्टिस उपमन की अदालत में अधिवक्ताओं की संख्या लगातार बढ़ती चली गई।
अपने-अपने मामलों की अर्जेंट मेंशनिंग और सुनवाई के लिए एक समय ऐसा भी आया जब अदालत कक्ष के भीतर 200 से अधिक अधिवक्ता मौजूद थे।
सर्द मौसम के बावजूद अदालत कक्ष में भीड़ के कारण गर्मी और घुटन की स्थिति उत्पन्न हो गई, जिसके चलते अदालत के सभी दरवाजे खोलने पड़े और देर शाम पंखे तक चालू करने पड़े।
देर रात तक चली कार्रवाई
लगातार चली सुनवाई के दौरान शाम करीब 7 बजे तक 418 से अधिक मुकदमों की सुनवाई पूरी की जा चुकी थी।
इसके बाद अधिवक्ताओं की अत्यधिक भीड़ और समय की सीमा को देखते हुए न्यायालय को सुनवाई रोकनी पड़ी।
सुनवाई समाप्त होने के बाद भी न्यायिक कार्य यहीं नहीं रुका। जस्टिस अनिल कुमार उपमन द्वारा पारित आदेशों की कार्रवाई देर रात तक चलती रही।
अदालत के कर्मचारी और स्टाफ रात करीब 10 बजे तक आदेशों को जारी करने और रिकॉर्ड संधारण के कार्य में जुटे रहे।