जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में टोल प्लाजा संचालन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर सख्त रुख अपनाया है।
ब्यावर नगर सीमा के पास संचालित टोल प्लाजा को दूसरी जगह शिफ्ट करने के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है।
हाईकोर्ट ने राजस्थान स्टेट हाईवेज अथॉरिटी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर को लंबित आवेदन पर 3 महीने के अंदर फैसला लेने का निर्देश दिया है।
साथ ही अब तक वसूली गई टोल राशि का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और इस रकम का उपयोग सार्वजनिक स्थानों पर छायादार पेड़ लगाने में करने के भी निर्देश दिए हैं।
जस्टिस अनूप कुमार ढंड की एकल पीठ ने कहा कि प्रोजेक्ट डायरेक्टर सभी संबंधित पक्षों को सुनने के बाद कानून के अनुसार फैसला लें।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर तय समय के अंदर फैसला नहीं लिया गया तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई शुरू की जा सकती है।
हाईकोर्ट ने टोल की वसूली को लेकर भी अहम निर्देश दिए।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि अब तक वसूली गई टोल राशि का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए और 15 दिन के भीतर उसका उपयोग सार्वजनिक स्थानों पर छायादार पेड़ लगाने के लिए सुनिश्चित किया जाए।
कलेक्टर के आदेश पर शुरू हुआ विवाद
यह याचिका भंवरलाल बुला और लाल मोहम्मद ने दायर की थी। उन्होंने बताया कि ब्यावर नगर सीमा के पास स्थित राजस्थान स्टेट हाईवेज के टोल प्लाजा को लेकर विवाद है।
जिला कलेक्टर ने 27 फरवरी 2026 को आदेश दिया था कि नियमों के अनुसार इस टोल प्लाजा को नगर सीमा से हटाकर दूसरी जगह शिफ्ट किया जाए।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि कलेक्टर के आदेश के कई महीने बाद भी उस पर अमल नहीं हुआ।
इसी कारण उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट का रुख करते हुए आदेश लागू कराने और टोल प्लाजा को दूसरी जगह शिफ्ट करने के निर्देश देने की मांग की।
क्या कहते हैं नियम?
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि राजस्थान स्टेट हाईवेज फीस (रेट निर्धारण एवं वसूली) नियम, 2015 के नियम-8 के अनुसार किसी नगर निकाय की सीमा से 2 किलोमीटर के भीतर टोल प्लाजा संचालित नहीं किया जा सकता।
उनका कहना था कि इसी नियम के आधार पर जिला कलेक्टर ने टोल प्लाजा को नगर सीमा से करीब 5 किलोमीटर दूर शिफ्ट करने का आदेश दिया था।
इसके बावजूद संबंधित विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की।
महीनों तक लंबित रहा आवेदन
याचिका में यह भी बताया गया कि 21 मई 2026 को राजस्थान स्टेट हाईवेज अथॉरिटी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर को आवेदन देकर कलेक्टर के आदेश को लागू करने की मांग की गई थी।
लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी उस आवेदन पर कोई निर्णय नहीं लिया गया।
हाईकोर्ट ने इस देरी को गंभीरता से लेते हुए प्रोजेक्ट डायरेक्टर को निर्देश दिया कि लंबित आवेदन पर तीन महीने के अंदर फैसला लिया जाए।
साथ ही कहा कि निर्णय लेने से पहले सभी संबंधित पक्षों को सुनवाई का पूरा मौका दिया जाए। इसके बाद कानून के अनुसार फैसला किया जाए।
कलेक्टर के आदेश को माना प्रभावी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के सामने यह भी तथ्य रखा गया कि 27 फरवरी 2026 को जिला कलेक्टर की ओर से टोल प्लाजा को नगर सीमा से बाहर शिफ्ट करने का आदेश दिया गया था।
इस आदेश को अब तक किसी सक्षम प्राधिकरण या कोर्ट में चुनौती नहीं दी गई है।
हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक किसी सक्षम कोर्ट या प्राधिकरण की ओर से इस आदेश को रद्द नहीं किया जाता, तब तक इसे प्रभावी माना जाएगा
ऐसे में प्रोजेक्ट डायरेक्टर लंबित आवेदन पर बिना अनावश्यक देरी किए कानून के अनुसार फैसला करें।
टोल की रकम से लगेंगे पेड़
इस मामले में हाईकोर्ट का सबसे अहम निर्देश टोल की वसूली गई राशि को लेकर रहा।
हाईकोर्ट ने कहा कि अब तक वसूले गए टोल का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए और उसे प्रोजेक्ट डायरेक्टर के सामने पेश किया जाए।
इसके बाद संबंधित अधिकारी 15 दिन के अंदर ऐसा आदेश जारी करें, जिससे इस राशि का इस्तेमाल सार्वजनिक स्थानों पर पेड़ लगाने में किया जा सके।
हाईकोर्ट ने कहा कि पेड़ लगाना केवल पर्यावरण संरक्षण का विषय नहीं है, बल्कि यह व्यापक जनहित से भी जुड़ा है।
इससे लोगों को लंबे समय तक लाभ मिलेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी बेहतर वातावरण तैयार होगा।
अवमानना की भी चेतावनी
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि तीन महीने के भीतर आवेदन पर फैसला होना चाहिए।
अगर संबंधित अधिकारी तय समय में आदेश का पालन नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ अवमानना कानून, 1971 के तहत कार्रवाई शुरू की जा सकती है।
इन्हीं निर्देशों के साथ हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई पूरी कर दी
हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि उसके आदेशों का समय पर पालन करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी।