जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत चयनित होने के बावजूद स्कूल में प्रवेश से वंचित रखे गए छह वर्षीय छात्र को बड़ी अंतरिम राहत दी हैं.
राजस्थान हाईकोर्ट ने मामले में संबंधित निजी विद्यालय Warren Academy School को आदेश दिया हैं कि वो छात्र को प्रोविजनल (अस्थायी) प्रवेश दे और उसकी पढ़ाई जारी को जारी रखा जाए.
जस्टिस शुभा मेहता की एकलपीठ ने छात्र मोहक राज पुरोहित द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया हैं.
निवास प्रमाण-पत्र को लेकर रोका गया था प्रवेश
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अक्षय भारद्वाज एवं आयुष अग्रवाल ने याचिका दायर कर अदालत को बताया कि छात्र का शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए आरटीई योजना के तहत चयन हो चुका था।
याचिका में कहा गया कि आवेदन के साथ आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे।
दस्तावेजों में बाद में मूल निवास प्रमाण-पत्र के स्थान पर छात्र और उसके पिता का आधार कार्ड भी प्रस्तुत किया गया, जिनमें निवास का पता अंकित था।
इसके अतिरिक्त सभी दस्तावेजों का सत्यापन मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी द्वारा किया जा चुका था और छात्र को लॉटरी प्रक्रिया के तहत संबंधित विद्यालय में प्रवेश के लिए पात्र घोषित किया गया था।
इसके बावजूद विद्यालय ने निवास संबंधी दस्तावेजों पर आपत्ति उठाकर प्रवेश देने से इनकार कर दिया।
याचिकाकर्ता की मुख्य दलीलें
मामले पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि आरटीई के तहत जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार निवास संबंधी प्रमाण के रूप में आधार कार्ड स्वीकार्य है.
यह भी कहा गया कि दस्तावेजों के सत्यापन का अधिकार केवल मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी के पास है, विद्यालय स्वयं इस आधार पर प्रवेश से इनकार नहीं कर सकता।
याचिकाकर्ता ने अपने पक्ष में उच्चतम न्यायालय तथा राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व निर्णयों का भी हवाला दिया।
सरकार को नोटिस
बहस सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले को विचारणीय मानते हुए स्कूल शिक्षा सचिव, निदेशक सैकेण्डरी स्कूल, सीबीईओ जयपुर वेस्ट और Warren Academy School के प्रिसिंपल को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब तलब किया है.
साथ ही अंतरिम राहत देते हुए स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक छात्र को विद्यालय में प्रोविजनल प्रवेश दिया जाए और उसकी पढ़ाई बाधित नहीं की जाए।