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राजस्थान हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश: पशुधन सहायक भर्ती में महिला वर्ग के सामान्य और ओबीसी में एक-एक पद रिक्त रखने के आदेश

Rajasthan High Court Orders to Keep One Post Vacant in Livestock Assistant Recruitment for General and OBC (Female) Categories

ओपीजेएस विश्वविद्यालय में अध्ययनरत होने के चलते खेल प्रमाण पत्र नहीं किया गया सत्यापित

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने पशुधन सहायक भर्ती परीक्षा से जुड़े एक अहम मामले में राज्य सरकार और राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) को आदेश दिया है कि वे सामान्य वर्ग (महिला) तथा ओबीसी नॉन-क्रीमी लेयर (महिला) श्रेणी के अंतर्गत एक-एक पद को फिलहाल रिक्त रखें।

जस्टिस मुन्नूरी लक्ष्मण ने यह अंतरिम आदेश महिला याचिकाकर्ता प्रेमी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।

याचिका के अनुसार, याचिकाकर्ता प्रेमी ने पशुधन सहायक पद हेतु आवेदन किया था।

याचिकाकर्ता ने चयन प्रक्रिया में 108.2177 अंक प्राप्त किए, जो कि सामान्य (महिला) वर्ग की कट-ऑफ 107.421 और ओबीसी नॉन-क्रीमी लेयर (महिला) की कट-ऑफ 103.2449 से अधिक हैं।

याचिकाकर्ता का दावा है कि उसने खेल कोटे के अंतर्गत आवेदन किया था और एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज द्वारा वर्ष 2023 में जारी खेल प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत किया था।

यह प्रमाण पत्र उस समय जारी हुआ था जब याचिकाकर्ता ओपीजेएस विश्वविद्यालय, चूरू में अध्ययनरत थीं।

हालांकि, दिसंबर 2023 में विश्वविद्यालय के ब्लैकलिस्ट घोषित हो जाने के कारण बोर्ड ने उनके खेल प्रमाण पत्र का सत्यापन लंबित रख दिया।

इसी आधार पर याचिकाकर्ता का चयन रोक दिया गया, जिससे वह भर्ती प्रक्रिया से वंचित हो गईं।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मोहित शर्मा ने न्यायालय में तर्क दिया कि प्रेमी ने खेल कोटे के आधार पर कोई आयु छूट या अन्य विशेष लाभ नहीं लिया है।

उनके पास पर्याप्त अंक हैं और वह न केवल ओबीसी एनसीएल (महिला) बल्कि सामान्य वर्ग (महिला) की श्रेणी में भी चयन की पात्र हैं।

इस प्रकार, मात्र विश्वविद्यालय के ब्लैकलिस्ट होने के कारण उनके खेल प्रमाण पत्र को संदेह के घेरे में रखना अनुचित है।

हाईकोर्ट ने बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद कहा कि खेल प्रमाण पत्र के सत्यापन के नाम पर यदि भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ती रही तो याचिकाकर्ता के अधिकारों का हनन हो सकता है।

इसलिए न्याय के हित में कोर्ट ने राज्य सरकार और चयन बोर्ड को आदेश दिया कि दोनों श्रेणियों में एक-एक पद फिलहाल रिक्त रखा जाए, ताकि अंतिम निर्णय आने तक याचिकाकर्ता के हित सुरक्षित रह सकें।

मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी 2026 को निर्धारित की गई है।

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