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पुलिस को यह अधिकार नहीं है कि वह अपनी पसंद या नापसंद से किसी का नाम सर्विलांस रजिस्टर या हिस्ट्रीशीट में दर्ज कर दे- राजस्थान हाईकोर्ट

Rajasthan High Court Quashes Police History Sheet Against Bharatpur Resident | Habitual Offender Ruling

हाईकोर्ट ने कहा 18 वर्ष की आयु के बाद 3 केस में दोषी घोषित होने वाला ही आदतन अपराधी, भरतपुर पुलिस को कप्तान सिंह का नाम हिस्ट्रीशीट से हटाने के आदेश

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने एक महत्वपूर्ण और नागरिक स्वतंत्रता से जुड़े फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल आपराधिक प्रकरण दर्ज होना किसी व्यक्ति को आदतन अपराधी (Habitual Offender) घोषित करने का आधार नहीं हो सकता।

जस्टिस अनूप कुमार धांड की एकलपीठ ने रिपोर्टेबल जजमेंट के जरिए भरतपुर पुलिस द्वारा एक व्यक्ति के खिलाफ खोली गई हिस्ट्रीशीट को अवैध ठहराते हुए उसे निरस्त करने का आदेश दिया है।

हाईकोर्ट ने भरतपुर पुलिस के अधिकारियों को याचिकाकर्ता कप्तान सिंह का हिस्ट्रीशीट की सूची से तुरंत नाम हटाने के आदेश दिए हैं।

याचिकाकर्ता भरतपुर जिले के भुसावर थाना क्षेत्र निवासी कप्तान सिंह ने पुलिस अधीक्षक, भरतपुर द्वारा 23 अप्रैल 2025 को जारी किए गए आदेश को चुनौती दी थी।

एसपी ने इस आदेश के तहत राजस्थान पुलिस नियम, 1965 के नियम 4.9 का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता के खिलाफ हिस्ट्रीशीट खोली गई थी।

राजस्थान हाईकोर्ट ने भरतपुर एसपी द्वारा हिस्ट्रीशीट खोलने के आदेश को रद्द करते हुए विस्तृत फैसला दिया है।

याचिकाकर्ता की दलीलें

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता निखिलेश कटारा एवं विष्णु कुमार शर्मा ने अदालत को बताया कि कप्तान सिंह के खिलाफ वर्षों में कुल 10 आपराधिक मामले दर्ज हुए थे, लेकिन इनमें से अधिकांश मामलों में या तो फाइनल रिपोर्ट नेगेटिव दाखिल हो चुकी है, या फिर अदालत से बरी किया जा चुका है, अथवा संबंधित एफआईआर पहले ही हाईकोर्ट द्वारा रद्द की जा चुकी है।

अधिवक्ता ने बताया कि केवल एक ही प्रकरण में याचिकाकर्ता को दोषसिद्ध किया गया है, जबकि एक मामला अभी विचाराधीन है।

अधिवक्ता ने कहा कि ऐसे में उसे आदतन अपराधी नहीं माना जा सकता।

अधिवक्ता ने राजस्थान आदतन अपराधी अधिनियम, 1953 का हवाला देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को तभी आदतन अपराधी माना जा सकता है, जब उसके खिलाफ कम से कम तीन अलग-अलग अवसरों पर दोषसिद्धि दर्ज हो।

पुलिस नहीं दे सकी जवाब

राज्य सरकार की ओर से उपस्थित लोक अभियोजक ने याचिका का विरोध तो किया, लेकिन वे याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं द्वारा रखे गए तथ्यों का खंडन नहीं कर सके।

कब खोली जाएगी हिस्ट्रीशीट

राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान पुलिस नियम, 1965 के नियम 4.4 और 4.9 का विस्तार से उल्लेख करते हुए कहा कि हिस्ट्रीशीट या सर्विलांस रजिस्टर में नाम दर्ज करना साधारण प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि यह किसी व्यक्ति की निजता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से सीधा जुड़ा हुआ विषय है।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि हिस्ट्रीशीट केवल उन्हीं व्यक्तियों के खिलाफ खोली जा सकती है—

जो घोषित अपराधी हों, जो पहले से दोषसिद्ध हों या जिनके खिलाफ यह ठोस और तर्कसंगत आधार हो कि वे अपराध के आदी हैं।

हाईकोर्ट ने कहा कि केवल एफआईआर दर्ज होना या संदेह के आधार पर किसी नागरिक को निगरानी में रखना संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है।

‘आदतन अपराधी’ कौन ?

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में आदतन अपराधी की परिभाषा स्पष्ट करते हुए कहा कि राजस्थान आदतन अपराधी अधिनियम, 1953 के अनुसार आदतन अपराधी वही व्यक्ति माना जाएगा, जिसके खिलाफ तीन या उससे अधिक दोषसिद्धियां दर्ज हों।

वर्तमान मामले में याचिकाकर्ता के खिलाफ केवल एक दोषसिद्धि है, इसलिए उसे किसी भी स्थिति में आदतन अपराधी नहीं कहा जा सकता।

संविधान और मौलिक अधिकार

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के Govind बनाम मध्यप्रदेश राज्य के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस नियमों को कानून का बल प्राप्त है, लेकिन उनका प्रयोग इस तरह नहीं किया जा सकता कि वह नागरिकों की मौलिक स्वतंत्रता का अतिक्रमण करे।

हाईकोर्ट ने सख्त शब्दों में कहा कि पुलिस को यह अधिकार नहीं है कि वह अपनी पसंद या नापसंद के आधार पर किसी का नाम सर्विलांस रजिस्टर या हिस्ट्रीशीट में दर्ज करे।

हाईकोर्ट ने भरतपुर एसपी द्वारा याचिकाकर्ता के खिलाफ खोली गई हिस्ट्रीशीट के आदेश को मनमाना, असंवैधानिक और कानून के विपरीत बताया है।

हाईकोर्ट ने भरतपुर एसपी के 23 अप्रैल 2025 के आदेश रद्द करते हुए भुसावर थाना पुलिस को आदेश दिया है कि यदि याचिकाकर्ता का नाम हिस्ट्रीशीट या सर्विलांस रजिस्टर में दर्ज है, तो उसे तत्काल हटाया जाए।

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