जयपुर। राजस्थान की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली 108 एम्बुलेंस सेवा से जुड़े एक वाहन चालक को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है।
राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर की एकलपीठ ने वर्ष 2013 से 108 एम्बुलेंस में पायलट (चालक) के रूप में कार्यरत मान सिंह राजपूत की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) एवं अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता की सेवाएं समाप्त नहीं की जाएंगी।
याचिका में दलीलें
याचिकाकर्ता मान सिंह राजपूत की ओर से अधिवक्ता तनवीर अहमद ने याचिका में दावा किया कि वह पिछले 13 वर्षों से 108 एम्बुलेंस सेवा में लगातार कार्यरत हैं और मरीजों को आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने जैसे महत्वपूर्ण दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।
इसके बावजूद उन्हें आज भी संविदा कर्मचारी के रूप में रखा गया है तथा मात्र लगभग ₹12,000 प्रतिमाह वेतन दिया जा रहा है।

याचिका में गंभीर आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार आउटसोर्सिंग और निजी सेवा प्रदाताओं के माध्यम से कर्मचारियों से वर्षों तक नियमित प्रकृति का कार्य करवाकर उन्हें स्थायी कर्मचारियों को मिलने वाले वैधानिक लाभों से वंचित कर रही है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि 108 एम्बुलेंस सेवा कोई अस्थायी परियोजना नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा है और इसमें कार्यरत चालक स्थायी एवं सतत प्रकृति का कार्य कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता तनवीर अहमद ने सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों—Jaggo बनाम Union of India (2024), Shripal बनाम Nagar Nigam Ghaziabad (2025) तथा Dharam Singh बनाम State of U.P. (2025)—का हवाला देते हुए कहा कि लंबे समय से नियमित कार्य कर रहे संविदा कर्मचारियों को संरक्षण और समानता का अधिकार प्राप्त है।
साथ ही State of Punjab बनाम Jagjit Singh के फैसले का हवाला देते हुए नियमित वेतनमान के न्यूनतम लाभ देने की मांग की गई।
याचिका में राजस्थान संविदा नियुक्ति नागरिक पद नियम, 2022 का भी उल्लेख किया गया है, जिसके अनुसार पांच वर्ष से अधिक सेवा देने वाले संविदाकर्मियों को विशेष संरक्षण और लाभ दिए जाने का प्रावधान है।
याचिकाकर्ता ने स्वयं को इन लाभों का पात्र बताते हुए सेवा नियमित करने अथवा नियमित वेतनमान प्रदान करने की मांग की है।
अंतरिम राहत
जस्टिस आनन्द शर्मा की एकलपीठ ने मामले को प्रथम दृष्टया विचारणीय मानते हुए सरकार सहित प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए और अंतरिम राहत प्रदान की।
हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, यदि याचिकाकर्ता वर्तमान में सेवा में कार्यरत हैं, तो उनकी सेवाएं अगली सुनवाई तक समाप्त नहीं की जाएंगी।