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ना जांच, ना चार्जशीट, ना रिकॉर्ड, ना कोई डिसपैच रजिस्टर में रिकॉर्ड, फिर नौकरी से किया बर्खास्त, हाईकोर्ट की सख्ती से बड़ा खुलासा

Rajasthan High Court Pulls Up DLB Director: No Charge Sheet, No Inquiry, No Records in Mahua Nagar Palika Employee Case

महुआ नगरपालिका कर्मचारी प्रकरण में हाईकोर्ट की कड़ी फटकार, DLB निदेशक कोर्ट में हुए उपस्थित, तत्कालिन EO सुरेंद्र मीणा के निलंबन आदेश जारी

जयपुर, 8 दिसंबर

राज्य में किसी सेवारत कर्मचारी को बिना किसी जांच, बिना किसी चार्जशीट, बिना किसी रिकॉर्ड और बिना डिसपैच की कार्रवाई किए क्या नौकरी से बर्खास्त किया जा सकता हैं…!

राजस्थान हाईकोर्ट की फटकार के बाद सोमवार को इस तरह के मामले का बड़ा खुलासा हुआ हैं कि महुआ नगरपालिका, दौसा में कार्यरत कर्मचारी टीकम सिंह को बिना किसी आधार, जांच, बिना चार्जशीट के ही नौकरी से निकाल दिया गया था.

रिकॉर्ड ही नहीं..

सोमवार को इस मामले में DLB निदेशक प्रतीक जुयकर चंद्रशेखर कोर्ट में पेश हुए.

DLB निदेशक ने कोर्ट में स्वीकार किया हैं कि महुआ नगरपालिका में कार्यरत कर्मचारी टिकम सिंह की सेवा से जुड़ा रिर्काड नहीं हैं.

निदेशक ने यह स्वीकार किया कि विभाग के रिकॉर्ड में न तो कोई चार्जशीट उपलब्ध है, न कोई जांच रिपोर्ट, न सेवा समाप्ति से जुड़े दस्तावेज, और न ही डिस्पैच रजिस्टर में किसी आदेश की प्रविष्टि दर्ज है.

निदेशक ने विभागीय गलती को स्वीकार करते हुए इस मामले में तत्कालिन EO सुरेंद्र मीणा के निलंबन के आदेश कोर्ट के सामने पेश किए हैं.

7 दिन में पुन: नियुक्ति

DLB निदेशक की ओर से किए गए खुलासे के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई हैं.

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता कर्मचारी टीकम सिंह को एक सप्ताह में पुनः नियुक्त (reinstatement) करने का आदेश दिया हैं.

हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 15 दिसबंर तय की हैं.

ये हैं मामला

याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवकता तनवीर अहमद ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता टिकम सिंह को वर्ष 2018 में सफाई कर्मचारी के पद पर नियुक्त किया गया था और वर्ष 2020 में उनकी सेवा की पुष्टि भी कर दी गई थी.

लेकिन वर्ष 2021 में उसे महुआ नगरपालिका में ट्रांसफर कर दिया गया। इसके बाद 2024 में निलंबन आदेश, वेतन रोकने, वार्षिक वेतन वृद्धि (AGI) रोकने और सेवा समाप्ति से जुड़े कई आदेश जारी हुए, जिनमें से अधिकांश उन्हें ना तो सही तरीके से उपलब्ध कराए गए और ना ही किसी वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया गया.

भ्रष्टाचार में शामिल होने से…

अधिवक्ता ने कहा कि याचिकाकर्ता कर्मचारी के खिलाफ ना तो कोई चार्जशीट सही तरीके से दी गई और ना ही न ही कोई जांच बैठाई गई.

अधिवकता ने कहा कि सेवा पुस्तिका में दर्ज कई आदेशों के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई.

याचिका में यह भी कहा गया कि RTI के माध्यम से भी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई और कई आदेशों की एंट्री गलत तरीके से दर्ज दिखाई दी

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी सुरेंद्र कुमार मीणा द्वारा मनमाने ढंग से कार्रवाई की गई और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने से इंकार करने पर उन्हें लगातार प्रताड़ित किया गया.

मामले में 10 अक्टूबर 2025 को सुनवाई के दौरान डायरेक्टर एलबी को हाईकोर्ट ने आदेश दिए थे, लेकिन उसकी पालना नहीं कि गयी.

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि 10 अक्टूबर 2025 को DLB निदेशक से स्पष्ट निर्देश/स्टेटमेंट पेश करने के लिए कहा गया था, परंतु आज की सुनवाई में भी विभाग की ओर से कोई जवाब नहीं आया.

जिसके बाद हाईकोर्ट ने DLB निदेशक को 8 दिसंबर 2025 को दोपहर 2 बजे स्वयं कोर्ट में उपस्थित रहने के ओदश दिए हैं.

इस आदेश की पालना में DLB निदेशक आज कोर्ट में पेश हुए थे.

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