टॉप स्टोरी

चर्चित खबरें

RCA जूनियर चयन समिति अध्यक्ष नरेश गहलोत को हटाने पर राजस्थान हाईकोर्ट की रोक, डि-अफिलिएट हो चुके डीसीए जोधपुर के अध्यक्ष धनंजय सिंह ने जारी किया था आदेश

Rajasthan High Court Puts Stay on Removal of RCA Junior Selection Committee Chief Naresh Kumar

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (आरसीए) से जुड़े एक अहम विवाद में जूनियर चयन समिति के अध्यक्ष नरेश गहलोत को अंतरिम राहत प्रदान करते हुए अध्यक्ष पद से हटाने संबंधी आदेश पर रोक लगा दी है।

हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया आरसीए के आदेश को आरसीए के संविधान और नियमों के विपरीत मानते हुए इसके क्रियान्वयन पर स्टे आदेश जारी किया है।

जस्टिस सुनील बेनीवाल ने यह आदेश नरेश गहलोत की याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए हैं.

हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार, सहकारिता विभाग, राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन की एडहॉक कमेटी सहित सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

क्या है पूरा मामला

याचिकाकर्ता नरेश गहलोत की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कुणाल विश्नोई ने अदालत के समक्ष दलील दी कि 2 नवंबर 2025 को जारी आदेश, जिसके तहत याचिकाकर्ता को आरसीए की जूनियर चयन समिति के अध्यक्ष पद से हटाया गया, पूरी तरह से अवैध और असंवैधानिक है।

अधिवक्ता ने दलील दी कि यह आदेश ऐसे व्यक्ति के हस्ताक्षरों से जारी किया गया, जिसे उस समय किसी भी प्रकार का अधिकार प्राप्त नहीं था।

अधिवक्ता ने बताया कि आरसीए द्वारा 11 अक्टूबर 2025 को जिला क्रिकेट संघ जोधपुर (डीसीए) को अयोग्य घोषित करते हुए डि-अफिलिएट कर दिया गया था।

इस निर्णय के बाद उसी दिन से डीसीए जोधपुर के अध्यक्ष धनंजय सिंह का पद स्वतः समाप्त हो गया था।

इसके बावजूद, 2 नवंबर 2025 का विवादित आदेश उनके हस्ताक्षरों से जारी किया गया, जो कि नियमों के स्पष्ट उल्लंघन का मामला है।

एडहॉक कमेटी की भूमिका पर भी सवाल

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी बताया गया कि उक्त आदेश आरसीए की एडहॉक कमेटी के कन्वीनर की मौजूदगी और अनुमति के बिना जारी किया गया।

अधिवक्ता ने कहा कि कन्वीनर ने स्वयं अदालत के समक्ष स्पष्ट किया है कि उन्होंने न तो किसी बैठक को बुलाया था और न ही किसी ऐसे निर्णय को मंजूरी दी थी। ऐसे में आदेश की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

हाईकोर्ट का रुख

राजस्थान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलीलों को सुनने के बाद प्रथम दृष्टया माना कि 2 नवंबर 2025 का आदेश आरसीए के संविधान और नियमों के अनुरूप नहीं है।

हाईकोर्ट ने कहा कि जब किसी पदाधिकारी को अधिकार प्राप्त ही नहीं था, तो उसके द्वारा पारित आदेश को वैध नहीं माना जा सकता।

इसी आधार पर हाईकोर्ट ने विवादित आदेश के प्रभाव और संचालन पर रोक लगाते हुए अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अंतरिम राहत मामले के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी।

हाईकोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद अब राज्य सरकार, सहकारिता विभाग और आरसीए की एडहॉक कमेटी सहित अन्य पक्षों को अपना जवाब दाखिल करना होगा।

सबसे अधिक लोकप्रिय