जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल (EMRS) के प्रिंसिपल पप्पू लाल मीणा के ट्रांसफर मामले में महत्वपूर्ण आदेश देते हुए संबंधित प्राधिकरण को निर्देश दिए हैं कि उनकी पोस्टिंग राजस्थान के निकटवर्ती राज्यों में स्थित किसी EMRS स्कूल में करने पर विचार किया जाए।
राजस्थान हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अधिकारी नई प्रतिनिधित्व याचिका पर सात दिन के भीतर निर्णय लें।
मामला EMRS बरनाला, बामनवास (सवाई माधोपुर) में कार्यरत प्रिंसिपल पप्पू लाल मीणा से जुड़ा है, जिनका 24 अप्रैल 2026 को तेलंगाना के खम्मम जिले स्थित EMRS सिंगरेनी में तबादला कर दिया गया था।
इसके खिलाफ उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच में रिट याचिका दायर की। मामले की सुनवाई जस्टिस आनंद शर्मा ने करते हुए यह आदेश दिए हैं.
याचिकाकर्ता ने खुद का ट्रांसफर राजस्थान में ही निकटवर्ती क्षेत्र में करने की मांग कि थी जिसका विभाग ने कड़ा विरोध करते हुए प्रिसिंपल पर गंभीर आरोप होने की बात कही.
याचिका में दलील
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवकता राजीव सोगरवाल ने कोर्ट को बताया गया कि 17 फरवरी 2026 को उन्हें CCS (CCA) Rules, 1965 के तहत विभागीय जांच की संभावना के चलते निलंबित किया गया था।
बाद में अपील के पश्चात 24 अप्रैल 2026 को उनका निलंबन आदेश वापस ले लिया गया, लेकिन उसी दिन उन्हें राजस्थान से करीब 1600 किलोमीटर दूर तेलंगाना ट्रांसफर कर दिया गया।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट में दलील दी कि यह तबादला प्रशासनिक आवश्यकता के बजाय दंडात्मक प्रकृति का प्रतीत होता है।
अधिवक्ता ने कहा कि राजस्थान सहित आसपास के राज्यों में EMRS प्रिंसिपल के कई पद रिक्त पड़े हैं, इसके बावजूद इतनी दूर स्थानांतरण करना उचित नहीं है। साथ ही यह भी बताया गया कि ट्रांसफर निरस्त करने के लिए दी गई प्रतिनिधित्व याचिका को 7 मई 2026 को खारिज कर दिया गया था।
सरकार का इनकार
वहीं केंद्र सरकार की ओर अधिवक्ता संजय महला और सुनिता महला ने याचिका का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि प्रिसिंपल पप्पू लाल मीणा के खिलाफ गंभीर शिकायतें है जिन्हे खुली अदालत में पढकर सुनाया भी नहीं जा सकता.
केन्द्र सरकार ने कहा कि याचिकाकर्ता का तबादला पूर्णतः प्रशासनिक कारणों से किया गया है। जवाब में यह भी कहा गया कि सेवा शर्तों के अनुसार कर्मचारी का देश में कहीं भी स्थानांतरण किया जा सकता है तथा ट्रांसफर सेवा का सामान्य हिस्सा है।
केन्द्र सरकार की ओर से अधिवक्ता संजय महला ने कोर्ट में समक्ष स्पष्ट किया कि सरकार किसी हाल ही में प्रिंसिपल का तबादला राजस्थान में नही कर सकती.
न्यायिक हस्तक्षेप सीमित
दोनो पक्षों की दलीले सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश में माना कि ट्रांसफर मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप सीमित होता है और केवल दुर्भावना या नियमों के उल्लंघन के मामलों में ही कोर्ट दखल देता है।
हालांकि अदालत ने यह भी माना कि यदि याचिकाकर्ता के खिलाफ जांच प्रस्तावित है तो उन्हें ऐसे स्थान पर पदस्थ किया जाना चाहिए, जहां से वे राजस्थान में संभावित जांच में आसानी से शामिल हो सकें।
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि प्रतिवादियों ने इस तथ्य का खंडन नहीं किया कि राजस्थान के निकटवर्ती राज्यों में EMRS प्रिंसिपल के कई पद खाली हैं।
ऐसे में अदालत ने याचिकाकर्ता को नई प्रतिनिधित्व याचिका देने की स्वतंत्रता देते हुए सक्षम प्राधिकारी को निर्देश दिए कि वे राजस्थान के आसपास के किसी राज्य में स्थित EMRS स्कूल में पोस्टिंग देने पर उचित आदेश पारित करें।
अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रतिनिधित्व प्राप्त होने के सात दिन के भीतर निर्णय लिया जाए। इसके साथ ही रिट याचिका का निस्तारण कर दिया गया।