जयपुर। देश के सबसे बड़े ड्रग्स तस्करी रैकेट में शामिल आरोपियों में से एक आरोपी रवि दुदानी को राजस्थान हाईकोर्ट ने कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया है।
राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने भारत और एशिया में अब तक के सबसे बड़े मादक पदार्थ और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी रवि दुदानी की जमानत याचिका खारिज कर दी है।
जस्टिस प्रवीर भटनागर की एकलपीठ ने यह आदेश रवि दुदानी की ओर से दायर याचिका पर दिया है।
यह मामला देश के सबसे बड़े ड्रग्स नेटवर्क से जुड़ा हुआ है, जिसमें अवैध रूप से मेथाक्वालोन (Methaqualone) नामक प्रतिबंधित दवा के निर्माण और निर्यात का आरोप है।
यह है मामला
यह मामला 2016 का है। यह पूरा मामला एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स नेटवर्क से जुड़ा हुआ है, जिसमें मेथाक्वालोन (Methaqualone) नामक प्रतिबंधित दवा का अवैध निर्माण और निर्यात किया गया।
राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) की टीम को मुंबई से मिले इनपुट के आधार पर 28 अक्टूबर 2016 को उदयपुर के कलड़वास स्थित फैक्ट्री पर छापा मारा गया था।
यहां से डीआरआई ने 23 हजार 500 किलो एमडी ड्रग्स बरामद की, जिसकी अंतरराष्ट्रीय कीमत 8000 करोड़ रुपए से ज्यादा आंकी गई।
इनपुट के आधार पर टीम ने राजसमंद के गुड़ली और धोइंदा में भी छापेमारी की थी।
टीम ने मुख्य आरोपी सुभाष दुदानी, उसके भतीजे रवि दुदानी, परमेश्वर व्यास, अनिल मलकानी, संजय आर. पटेल, अतुल म्हात्रे, निर्मल दुदानी और गुंजन दुदानी को गिरफ्तार किया था।
रवि दुदानी 9 साल यानी 2016 से सेंट्रल जेल में हैं, जिन्हें पिछले साल मई 2025 में उदयपुर कोर्ट ने 20-20 साल की कैद की सजा सुनाई थी।
डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) द्वारा दर्ज किए गए इस प्रकरण में खुलासा हुआ कि हजारों किलोग्राम मादक पदार्थ देश से बाहर भेजे गए।
जांच एजेंसियों के अनुसार, करीब 37,000 किलोग्राम ड्रग्स का अवैध निर्यात किया गया, जबकि उदयपुर स्थित एक परिसर से लगभग 23,000 किलोग्राम ड्रग्स बरामद किए गए।
इन मादक पदार्थों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 8000 करोड़ रुपये तक आंकी गई है।
बचाव पक्ष की दलीलें
रवि दुदानी की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने जमानत के पक्ष में कई महत्वपूर्ण दलीलें देते हुए कहा कि आरोपी केवल एक कर्मचारी था और मुख्य आरोपी के निर्देशों पर कार्य करता था।
उसका ड्रग्स के अवैध व्यापार से कोई सीधा संबंध नहीं है।
आरोपी लंबे समय से न्यायिक हिरासत में है, जिससे उसके मौलिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। मामला का ट्रायल अभी शुरू भी नहीं हुआ है और इसमें लंबा समय लग सकता है।
आरोपी ने जांच में सहयोग किया है और उसके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है।
बचाव पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला देते हुए यह तर्क दिया कि लंबी हिरासत अपने आप में जमानत का आधार बन सकती है।
DRI ने किया जमानत का विरोध
राजस्थान हाईकोर्ट में दायर जमानत याचिका का ED और डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस की ओर से कड़ा विरोध किया गया।
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल भरत व्यास और अधिवक्ता अक्षय भारद्वाज ने अदालत में याचिका का विरोध करते हुए सरकार की ओर से दलील दी कि मामले की जांच डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) द्वारा की जा रही है, जिसमें चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं।
अधिवक्ता ने कहा कि जांच के दौरान उदयपुर स्थित एक परिसर से लगभग 23,000 किलोग्राम मादक पदार्थ बरामद किया गया, जबकि कुल मिलाकर करीब 37,000 किलोग्राम ड्रग्स के अवैध निर्यात की बात सामने आई।
इन ड्रग्स की अनुमानित बाजार कीमत हजारों करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।
डीआरआई ने कहा कि आरोपी रवि दुदानी ने अन्य सह-अभियुक्तों के साथ मिलकर इस अवैध कारोबार में भागीदारी निभाई और इस गतिविधि से अर्जित धन का उपयोग संपत्तियों की खरीद में किया।
अधिवक्ता ने यह भी कहा कि आरोपी संबंधित फर्म में भागीदार था और ड्रग्स की तस्करी से जुड़े आर्थिक लेन-देन में उसकी भूमिका रही है।
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं, जो यह दर्शाते हैं कि वह इस अवैध ड्रग्स नेटवर्क का हिस्सा था।
साथ ही यह भी बताया गया कि आरोपी पहले से ही एनडीपीएस एक्ट के तहत दोषसिद्ध हो चुका है और उसे 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा
सभी पक्षों की बहस सुनने के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 45 के तहत जमानत देने के लिए कठोर शर्तें निर्धारित हैं।
कोर्ट ने पाया कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि आरोपी प्रथम दृष्टया निर्दोष है।
कोर्ट ने कहा कि इसके अलावा, आरोपी के दोबारा अपराध में शामिल होने की संभावना को भी पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता।
कोर्ट ने यह भी माना कि हालांकि आरोपी लंबे समय से हिरासत में है, लेकिन केवल इस आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती, खासकर जब मामला अत्यंत गंभीर प्रकृति का हो और आरोपी पहले से ही दोषसिद्ध हो चुका हो।
हाईकोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि सह-अभियुक्त की जमानत याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है और सुप्रीम कोर्ट ने भी उस फैसले में हस्तक्षेप नहीं किया था।
जमानत याचिका खारिज
हाईकोर्ट ने सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए आरोपी रवि दुदानी की जमानत याचिका को खारिज करने का आदेश दिया।