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इंटर्नशीप के नाम पर छात्रो से नहीं वसूली जा सकती मोटी फीस, राजस्थान हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण आदेश

Rajasthan High Court Rules Internship Fee Illegal in Ayurveda Colleges, Orders Relief to BAMS Student

बीएएमएस छात्र को बड़ी राहत,आयुर्वेद कॉलेज को बिना शुल्क एक वर्षीय रोटेटरी इंटर्नशिप कराने और उपस्थिति सही दर्ज करने के निर्देश

जयपुर। आयुर्वेद शिक्षा व्यवस्था से जुड़े एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसले में राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी मान्यता प्राप्त आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज को अपने ही संस्थान में इंटर्नशिप करने वाले छात्र से किसी प्रकार की फीस वसूलने का कोई अधिकार नहीं है।

हाईकोर्ट ने इस तरह की फीस वसूली को न केवल नियमों के विपरीत बल्कि छात्रों के शैक्षणिक अधिकारों का उल्लंघन भी बताया है।

यह अहम फैसला राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ के जज जस्टिस अनुरूप सिंघी ने धौलपुर निवासी राहुल पराशर द्वारा दायर याचिका पर दिया हैं.

हाईकोर्ट ने कॉलेज प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि छात्र को बिना किसी शुल्क के अनिवार्य एक वर्षीय रोटेटरी इंटर्नशिप पूरी करने दी जाए और उसकी उपस्थिति विधि के अनुसार सही तरीके से दर्ज की जाए।

क्या है पूरा मामला

याचिकाकर्ता राहुल पराशर ने बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी की पढ़ाई केशव आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, झालावाड़ से पूरी की थी।

पाठ्यक्रम पूर्ण होने के बाद नियमानुसार उसी कॉलेज में एक वर्ष की अनिवार्य रोटेटरी इंटर्नशिप करनी थी, जो किसी भी आयुर्वेद छात्र के लिए डिग्री प्राप्त करने की अंतिम और आवश्यक शर्त होती है.

याचिकाकर्ता राहुल पराशर का आरोप हैं कि कॉलेज प्रबंधन ने इंटर्नशिप शुरू कराने के बदले उनसे फीस की मांग की और जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो उन्हें इंटर्नशिप करने से रोका जाने लगा।

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि कॉलेज में उपस्थित रहने के बावजूद उनकी उपस्थिति जानबूझकर दर्ज नहीं की गई, जिससे उनका शैक्षणिक रिकॉर्ड प्रभावित हो रहा था।

याचिका में कहा गया कि इस विवाद को सुलझाने के लिए 10 सितंबर 2025 को छात्र और कॉलेज प्रबंधन के बीच एक लिखित समझौता हुआ था, जिसमें साफ तौर पर तय किया गया था कि राहुल पराशर बिना किसी शुल्क के कॉलेज में ही इंटर्नशिप करेंगे। इसके बावजूद कॉलेज ने समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया।

छात्र की दलील

याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत से कहा कि नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन एक्ट, 2020 और इंडियन मेडिसिन सेंट्रल काउंसिल (न्यूनतम शिक्षा मानक) विनियम, 2022 के क्लॉज-16 में यह स्पष्ट प्रावधान है कि जिस संस्थान से छात्र ने पढ़ाई की है, उसी संस्थान में इंटर्नशिप करने पर किसी भी प्रकार की फीस नहीं ली जा सकती।

अधिवक्ता ने कहा कि इंटर्नशिप कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि शैक्षणिक पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा है और इसके लिए फीस मांगना कानूनन गलत है।

कॉलेज द्वारा फीस की मांग और उपस्थिति दर्ज न करना छात्र के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

कॉलेज का पक्ष

वहीं कॉलेज प्रबंधन की ओर से अदालत में कहा गया कि वे छात्र को इंटर्नशिप कराने के लिए तैयार हैं और उनसे किसी प्रकार की फीस वसूलने का इरादा नहीं है।

कॉलेज के अधिवक्ता ने यह भी तर्क दिया कि इंटर्नशिप जॉइन करने की तिथि को लेकर दोनों पक्षों के बीच कुछ भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई थी, जिसके कारण विवाद बढ़ा।

कॉलेज की ओर से यह भी कहा गया कि अन्य कई छात्र बिना किसी समस्या के यहां इंटर्नशिप कर चुके हैं और कॉलेज ने कभी भी किसी इंटर्न से शुल्क नहीं लिया है।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद जस्टिस अनुरूप सिंघी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब छात्र और कॉलेज दोनों ही इंटर्नशिप के लिए तैयार हैं, तो विवाद को लंबा खींचने का कोई औचित्य नहीं है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि 2022 के विनियम पूरी तरह स्पष्ट हैं और उनके तहत इंटर्नशिप पर फीस लेना पूरी तरह अवैध है।

हाईकोर्ट ने माना कि इंटर्नशिप के दौरान छात्र न केवल सीखता है बल्कि मरीजों की सेवा भी करता है, ऐसे में उस पर आर्थिक बोझ डालना न्यायसंगत नहीं है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की प्रशासनिक या वित्तीय शर्त लगाकर छात्र को इंटर्नशिप से वंचित नहीं किया जा सकता।

कोर्ट के निर्देश

राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कॉलेज को आदेश दिए हैं कि वह याचिकाकर्ता राहुल पराशर को उसी कॉलेज में अनिवार्य एक वर्षीय रोटेटरी इंटर्नशिप पूरी करने दे.

इसके साथ ही इंटर्नशिप के लिए छात्र से किसी भी प्रकार की फीस या शुल्क की मांग नहीं करने और छात्र की उपस्थिति विधि और नियमों के अनुसार सही तरीके से दर्ज करने के आदेश दिए हैं.

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