जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर की द्रव्यवती नदी में अतिक्रमण और नदी क्षेत्र की जमीन से जुड़े मामलों को गंभीरता से लेते हुए जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) से पूरी जानकारी मांगी है।
हाईकोर्ट ने जेडीए को निर्देश दिया है कि बताए कि नदी क्षेत्र में कहां-कहां अतिक्रमण है और इन जमीनों से जुड़े कितने मामले अलग-अलग कोर्ट में चल रहे हैं।
इन मामलों में अभी क्या स्थिति है, इसकी जानकारी भी 31 अगस्त तक पेश करनी होगी।
एक्टिंग चीफ जस्टिस एसपी शर्मा और जस्टिस चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने पीएन मैंदोला की जनहित याचिका समेत अन्य याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया।
सुनवाई के दौरान द्रव्यवती नदी की हालत, अतिक्रमण और पहले पेश की गई न्यायमित्र की रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं होने का मुद्दा भी उठा।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से इस रिपोर्ट पर अपना जवाब पेश करने को कहा है।
अतिक्रमण और मुकदमों की पूरी जानकारी मांगी
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पीएन मैंदोला ने कहा कि द्रव्यवती नदी क्षेत्र की कई जमीनों के खसरों पर अतिक्रमण हो गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मामलों में जेडीए इन अतिक्रमणों को नियमों के तहत मंजूरी दे रहा है।
जेडीए की ओर से बताया गया कि नदी क्षेत्र में अतिक्रमण के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है।
हालांकि, कई लोग अलग-अलग कोर्ट से स्थगन आदेश ले आते हैं, जिससे कई मामलों में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाती।
इस पर हाईकोर्ट ने जेडीए से नदी क्षेत्र में हुए अतिक्रमण की पूरी जानकारी मांगी।
साथ ही, यह भी बताने को कहा कि इन जमीनों से जुड़े कितने मामले अलग-अलग कोर्ट में चल रहे हैं और वे किस स्तर पर हैं।
6 महीने बाद भी सरकार चुप
सुनवाई के दौरान न्यायमित्र अलंकृता शर्मा और शोभित तिवाड़ी ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने फरवरी में द्रव्यवती नदी को लेकर एक रिपोर्ट पेश की थी।
रिपोर्ट में नदी और रिवर फ्रंट से जुड़ी कई कमियों का जिक्र किया गया था।
न्यायमित्रों ने कहा कि रिपोर्ट पेश हुए करीब 6 महीने हो चुके हैं, लेकिन सरकार ने अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की है।
उन्होंने कहा कि अगर रिपोर्ट में कोई कमी है तो सरकार उसे बताए, लेकिन अगर रिपोर्ट में बताई गई बातें सही हैं तो उस पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने रिपोर्ट पर जवाब देने के लिए और समय मांगा। इस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि 6 महीने बाद भी सरकार समय मांग रही है।
इसके बाद कोर्ट ने सरकार को अंतिम मौका देते हुए न्यायमित्र की रिपोर्ट पर अपना जवाब पेश करने के निर्देश दिए।
रिपोर्ट में गंदे पानी का जिक्र
न्यायमित्र की ओर से पहले पेश की गई रिपोर्ट में द्रव्यवती नदी में प्रदूषण और गंदे पानी को लेकर भी गंभीर बातें सामने रखी गई थीं।
रिपोर्ट में बताया गया था कि नदी में कई जगहों पर बिना ट्रीटमेंट किया हुआ पानी छोड़ा जा रहा है। इसका असर चंदलाई बांध के पानी पर भी पड़ रहा है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि नदी क्षेत्र में कुछ जगहों पर अवैध तरीके से पंप लगाकर खेती की जा रही है।
इसके अलावा रिवर फ्रंट का भी कुछ जगहों पर गलत तरीके से इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई थी।
रिवर फ्रंट और STP की व्यवस्था पर भी सवाल
न्यायमित्र की रिपोर्ट में द्रव्यवती नदी के रिवर फ्रंट की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक कई जगहों पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं।
इसके अलावा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी एसटीपी और रिवर फ्रंट पर जरूरी संसाधनों की कमी की बात भी रिपोर्ट में कही गई थी। एसटीपी प्लांट पर सफाई की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।
यानी मामला सिर्फ नदी क्षेत्र की जमीन पर अतिक्रमण तक सीमित नहीं है।
नदी में गंदा पानी छोड़ने, अवैध पंपिंग, रिवर फ्रंट के इस्तेमाल और वहां की सुविधाओं से जुड़े मुद्दे भी हाईकोर्ट के सामने हैं।
31 अगस्त तक मांगा जवाब
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब जेडीए को 31 अगस्त तक द्रव्यवती नदी क्षेत्र में हुए अतिक्रमण और उनसे जुड़े मुकदमों की पूरी जानकारी देनी होगी।
जेडीए को यह भी बताना होगा कि इन जमीनों को लेकर मामले किस-किस कोर्ट में चल रहे हैं और अभी उनकी क्या स्थिति है।
राज्य सरकार को भी न्यायमित्र की रिपोर्ट पर अपना जवाब देना होगा।
इसके बाद हाईकोर्ट के सामने यह साफ होगा कि नदी क्षेत्र में कितनी जमीन पर अतिक्रमण है, कितने मामले अलग-अलग कोर्ट में चल रहे हैं और किन मामलों में कार्रवाई रुकी हुई है।
अब अगली सुनवाई में जेडीए और राज्य सरकार की रिपोर्ट पर नजर रहेगी।
इससे यह भी पता चलेगा कि द्रव्यवती नदी और उसके आसपास की जमीन को लेकर अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।