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सब-इंस्पेक्टर के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट भी नहीं हो रहा तामील, हाईकोर्ट ने कहा इससे बदतर स्थिति नहीं हो सकती, जोधपुर आईजी तलब

Rajasthan High Court Slams Police: Arrest Warrant Against SI Not Executed, Jodhpur IG Summoned

जोधपुर। राजस्थान पुलिस अपने ही एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ कोर्ट द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट को तामील नहीं करा पा रही है।

राजस्थान हाईकोर्ट ने इस बेहद गंभीर मामले में पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए सख्त रुख अपनाया है।

राजस्थान हाईकोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि यदि एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट ही लागू नहीं हो पा रहा है, तो यह न्याय व्यवस्था के लिए अत्यंत चिंताजनक और शर्मनाक स्थिति है।

हाईकोर्ट ने अब इस मामले में अगली सुनवाई 28 मई को जोधपुर रेंज के आईजी को कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए हैं।

जस्टिस फरजंद अली की एकलपीठ ने यह आदेश गुनवंत लाल नागदा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।

याचिका में कहा गया कि केस के जांच अधिकारी (IO) खुद ही अदालत के आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

ट्रायल कोर्ट की रिपोर्ट के अनुसार, इस केस में जांच अधिकारी सब-इंस्पेक्टर कमल सिंह को 27 मई 2025 को गवाह के रूप में पेश किया गया था, लेकिन समय की कमी के कारण उनका बयान अधूरा रह गया।

ट्रायल कोर्ट ने उन्हें 10 जून 2025 को फिर से पेश होने का आदेश दिया।

लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि वह निर्धारित तारीख पर अदालत में पेश ही नहीं हुए।

इसके बाद ट्रायल कोर्ट ने उनके खिलाफ बार-बार गिरफ्तारी वारंट जारी किए—लेकिन हर बार नतीजा शून्य रहा।

वारंट जारी हुए, तारीखें बढ़ती रहीं, लेकिन पुलिस अधिकारी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी।

“इससे बदतर हालात नहीं हो सकते”-हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मामले में राजस्थान पुलिस के व्यवहार को लेकर सख्त नाराजगी जताई है।

जस्टिस फरजंद अली ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ जारी वारंट तक लागू नहीं हो पा रहा है।”

अदालत ने इसे न्यायिक प्रक्रिया के साथ गंभीर खिलवाड़ बताते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में कानून का शासन कमजोर होता है और आम जनता का भरोसा डगमगा सकता है।

आईजी जोधपुर रेंज को तलब, सीधे जवाब मांगा

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने जोधपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) को तत्काल प्रभाव से तलब कर लिया है।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आईजी अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हों और यह स्पष्ट करें कि पुलिस अधिकारी अपने कर्तव्यों में क्यों विफल हो रहे हैं और पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान करें।

हाईकोर्ट का सख्त आदेश: अब एडिशनल एसपी करेगा गिरफ्तारी

हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है कि नया गिरफ्तारी वारंट जारी किया जाए और उसे सीधे आईजी को भेजा जाए।

इसके साथ ही अदालत ने साफ आदेश दिया, अब एडिशनल एसपी स्तर का अधिकारी इस गिरफ्तारी की जिम्मेदारी संभालेगा।

इसके साथ ही अगली सुनवाई से पहले आरोपी पुलिस अधिकारी को कोर्ट में पेश करना अनिवार्य होगा।

केवल गिरफ्तारी नहीं-अब होगी विभागीय कार्रवाई

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि सिर्फ गिरफ्तारी कर लेना काफी नहीं होगा।

हाईकोर्ट ने कहा कि वारंट जारी होने के बाद जिन-जिन अधिकारियों की भूमिका रही, उनकी पूरी सूची पेश की जाए और यह बताया जाए कि उनके खिलाफ क्या विभागीय कार्रवाई प्रस्तावित है।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामले पहले भी सामने आ चुके हैं।

हाईकोर्ट ने कहा कि “गणेश राम बनाम राज्य” केस में दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन भी सही तरीके से नहीं किया गया।

कोर्ट ने बेहद नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर पुलिस अधिकारी ही अदालत के आदेशों का पालन नहीं करेंगे, तो आम नागरिकों से कानून के पालन की उम्मीद कैसे की जा सकती है?

अगली सुनवाई: 28 मई

हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अगली सुनवाई 28 मई 2026 तय की है।

इस दिन आईजी की मौजूदगी में जवाबदेही तय होगी, साथ ही गिरफ्तारी की स्थिति पर रिपोर्ट पेश की जाएगी।

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