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7 फरवरी राजस्थान लीगल राउंडअप: अदालतों के अहम निर्णय और दिन की बड़ी कानूनी घटनाएं

Rajasthan Legal Updates February 9: Major Court Decisions, Important Judicial Appointments and Key Legal News

CJI का राजस्थान दौरान अगले सप्ताह संभव

नई दिल्ली/जयपुर 7 फरवरी। भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत के अगले सप्ताह राजस्थान के दो दिवसीय दौरे पर आने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि उनके प्रस्तावित दौरे की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन न्यायिक सूत्रों के अनुसार वे 21 और 22 फरवरी को जयपुर और जोधपुर का दौरा कर सकते हैं।

प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार मुख्य न्यायाधीश जयपुर के सीतापुरा स्थित जेईसीसी में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से आयोजित दो दिवसीय साइबर क्राइम सेमिनार का उद्घाटन कर सकते हैं। इस सेमिनार में न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और साइबर कानून विशेषज्ञों के शामिल होने की संभावना है।

जयपुर कार्यक्रम के बाद मुख्य न्यायाधीश जोधपुर भी जा सकते हैं, जहां वे एक न्यायिक एवं विधिक कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। उनके संभावित दौरे को लेकर न्यायिक और प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू होने की चर्चा है।

सीजेआई के इस दौरे को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा हैं क्योकि शनिवार कार्यदिवस को लेकर राजस्थान की तीनों बार एसोसिएशन एक साथ विरोध कर रही हैं.

संभवतया अधिवक्ताओं के विरोध के बीच सीजेआई का राजस्थान दौरा कई चर्चाओं का कारण बन गया हैं.

सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस संदीप मेहता रहे सांभर दौरे पर

जयपुर 7 फरवरी। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस संदीप मेहता शनिवार को एक दिवसीय दौरे पर जयपुर पहुंचे।

जयपुर प्रवास के दौरान उन्होंने सांभर झील क्षेत्र का भ्रमण किया और प्राकृतिक सौंदर्य के साथ प्रवासी पक्षियों को निहारा। जस्टिस संदीप मेहता अपनी पत्नी के साथ पहुंचे और स्थानीय अधिकारियों ने उनका स्वागत किया।

दौरे के दौरान उन्होंने झील क्षेत्र की पर्यावरणीय महत्ता पर भी चर्चा की और संरक्षण के प्रयासों की जानकारी ली।

सांभर झील देश की प्रमुख खारे पानी की झीलों में शामिल है और हर वर्ष हजारों प्रवासी पक्षियों का निवास स्थल बनती है।

स्थानीय प्रशासन ने बताया कि जस्टिस मेहता का यह दौरा निजी कार्यक्रम के तहत था, लेकिन उनके आगमन से क्षेत्र में सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर विशेष तैयारियां की गईं। इस दौरान पर्यटकों और स्थानीय लोगों में भी उत्साह का माहौल देखने को मिला।

राजस्थान हाईकोर्ट में न्यायिक कार्य का बहिष्कार,

जोधपुर/जयपुर 7 फरवरी। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ और जयपुर पीठ में अधिवक्ताओं ने शनिवार को पूर्ण रूप से न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया और अदालतों की कार्यवाही में शामिल नहीं हुए।

अधिवक्ताओं का यह विरोध हाईकोर्ट फुल कोर्ट द्वारा प्रत्येक माह के दो शनिवार को कार्यदिवस घोषित किए जाने के फैसले के खिलाफ है।

Advocates Boycott Judicial Work in Rajasthan High Court Against Two Saturday Working Days Decision

जोधपुर और जयपुर बार एसोसिएशन का कहना है कि इस निर्णय से अधिवक्ताओं और वादकारियों दोनों को असुविधा हो रही है, इसलिए वे लगातार इसका विरोध कर रहे हैं। इस मुद्दे पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश द्वारा गठित पांच न्यायाधीशों की समिति की रिपोर्ट भी अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है, जिससे अधिवक्ताओं में असंतोष बना हुआ है।

बार एसोसिएशन के आह्वान पर फरवरी माह के दोनों शनिवार को न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया जा रहा है। बहिष्कार के कारण शनिवार को अदालतों में न्यायिक कार्य लगभग ठप रहा।

एडवोकेट रमेश पुरोहित का देशनोक में सम्मान

जोधपुर 7 फरवरी। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ के वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश पुरोहित को देशनोक स्थित करणी माता मंदिर ट्रस्ट द्वारा सम्मानित किया गया। विधि के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाते हुए ज्वलंत कानूनी मुद्दों को समाज के सामने प्रमुखता से उठाने तथा जन-जागरूकता अभियान चलाने के लिए ट्रस्ट ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया

सम्मान समारोह के दौरान ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने अधिवक्ता पुरोहित के सामाजिक एवं विधिक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से आमजन में कानून के प्रति जागरूकता बढ़ी है और लोगों को अपने अधिकारों के प्रति सजग होने की प्रेरणा मिली है।

इस अवसर पर करणी माता मंदिर ट्रस्ट की ओर से अधिवक्ता रमेश पुरोहित को मंदिर की पवित्र तस्वीर स्मृति-चिह्न के रूप में भेंट की गई। कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य लोगों ने भी उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर वकीलों का धरना

उदयपुर 7 फरवरी। उदयपुर में हाईकोर्ट की स्थायी बेंच स्थापित करने की मांग को लेकर अधिवक्ताओं ने कोर्ट परिसर के मुख्य द्वार पर धरना दिया। अधिवक्ताओं का कहना है कि वे पिछले चार दशकों से लगातार उदयपुर में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।

धरने पर बैठे अधिवक्ताओं ने बताया कि बेंच की स्थापना से दक्षिणी राजस्थान के हजारों वादकारियों को बड़ी राहत मिलेगी और उन्हें न्याय के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। अधिवक्ताओं ने यह भी कहा कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

वकीलों के निर्णय के अनुसार हर महीने की 7 तारीख को अधिवक्ता प्रतीकात्मक हड़ताल और धरना देकर अपनी मांग को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं। उन्होंने सरकार से शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की है।

पूर्व विधायक बलजीत यादव न्यायिक हिरासत में

जयपुर 7 फरवरी। जयपुर की पीएमएलए मामलों की विशेष अदालत ने पूर्व विधायक बलजीत यादव को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग और एमएलए फंड के दुरुपयोग के आरोपों में उन्हें गिरफ्तार किया था।

अदालत में ईडी की ओर से अधिवक्ता अवदेश तिवारी ने पक्ष रखते हुए तीन दिन की रिमांड की मांग की। वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ता कपिल गुप्ता ने गिरफ्तारी को अनुचित बताते हुए इसका विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।

मामले की अगली सुनवाई 9 फरवरी को निर्धारित की गई है। जांच एजेंसियों के अनुसार वित्तीय लेन-देन से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जांच अभी जारी है।

भाई बहन के दोहरे हत्याकांड में गुलशन को आजीवन कारावास

जयपुर 7 फरवरी। जयपुर के चर्चित भाई-बहन हत्याकांड मामले में जयपुर की एडीजे कोर्ट संख्या 3 के न्यायाधीश लोकेन्द्र सिंह शेखावत ने आरोपी गुलशन को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास तथा 60 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।

अभियोजन के अनुसार 5 मई 2022 को आरोपी ने शादी से इनकार किए जाने पर घर में घुसकर भाई-बहन की हत्या कर दी थी।

घटना के बाद आरोपी ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक कमल किशोर मीणा ने 19 गवाहों के बयान और 51 दस्तावेजी साक्ष्य अदालत में पेश किए।

मेडिकल रिपोर्ट और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी का अपराध सिद्ध मानते हुए कहा कि यह जघन्य अपराध है, इसलिए कठोरतम सजा न्यायसंगत है।

15 ग्राम स्मैक मामले में 2 साल की सजा

जोधपुर 7 फरवरी। जोधपुर स्थित एनडीपीएस न्यायालय ने 13 वर्ष पुराने अवैध मादक पदार्थ तस्करी के मामले में आरोपी को दोषी करार देते हुए दो वर्ष के कठोर कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।

विशेष न्यायाधीश मधुसूदन मिश्रा ने फैसला सुनाते हुए कहा कि पुलिस जांच और प्रस्तुत साक्ष्यों से यह साबित हुआ कि आरोपी के पास से 15 ग्राम स्मैक बरामद हुई थी।

यह मामला 6 मार्च 2013 को बनाड़ थाना क्षेत्र में दर्ज हुआ था, जिसके बाद लंबी न्यायिक प्रक्रिया चली।

राज्य सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक ने प्रभावी पैरवी करते हुए अदालत के सामने पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत किए।

अदालत ने कहा कि मादक पदार्थों से जुड़े अपराध समाज के लिए गंभीर खतरा हैं, इसलिए ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई आवश्यक है। निर्णय के बाद पुलिस प्रशासन ने इसे नशा तस्करी के खिलाफ महत्वपूर्ण संदेश बताया।

राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर में रक्तदान शिविर का आयोजन

जयपुर, 7 फरवरी। राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ में शनिवार को सामाजिक सरोकार का परिचय देते हुए रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया।

यह शिविर रोटरी क्लब जयपुर और राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

शिविर का उद्घाटन बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव सोगरवाल और महासचिव दीपेश शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि रक्तदान मानवता की सेवा का सबसे बड़ा माध्यम है और समाज में जरूरतमंदों की सहायता के लिए ऐसे शिविरों का नियमित आयोजन आवश्यक है।

शिविर के दौरान अधिवक्ताओं के साथ-साथ कई महिला प्रतिभागियों ने भी स्वेच्छा से रक्तदान कर सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण प्रस्तुत किया। आयोजकों के अनुसार रक्तदान शिविर में अपेक्षा से अधिक लोगों ने भाग लिया, जिससे रक्त संग्रहण का लक्ष्य सफलतापूर्वक प्राप्त किया जा सका।

अलवर जिला बार एसोसिएशन का शपथ ग्रहण

अलवर 7 फरवरी। अलवर जिला बार एसोसिएशन का शपथ ग्रहण समारोह शनिवार को अलवर शहर के महल चौक में आयोजित किया गया.

समारोह में केद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, वन मंत्री संजय शर्मा सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में जिला जज अनंत भंडारी, एसपी सुधीर चौधरी और बार एसोसिएशन के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने भी भाग लिया।

अध्यक्ष अभिमन्यु सिंह चौहान और अन्य पदाधिकारियों ने अधिवक्ताओं के हितों की रक्षा और न्यायिक व्यवस्था को मजबूत बनाने का संकल्प लिया।

समारोह के दौरान वक्ताओं ने अधिवक्ताओं की भूमिका को न्याय व्यवस्था की आधारशिला बताते हुए उनके लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया।

जिला जज अनंत भंडारी ने नए पदाधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए बार और बेंच के संबंधों का सौहार्दपूर्ण रहना अत्यंत आवश्यक है।

अलवर नए न्यायालय परिसर में जमीन को लेकर मांग

अलवर 7 फरवरी।अलवर जिला बार एसोसिएशन के शपथ ग्रहण समारोह में नए न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं के लिए जमीन आवंटन का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया।

अध्यक्ष अभिमन्यु सिंह चौहान ने कहा कि 1465 वर्ग गज जमीन पहले ही मिल चुकी है, लेकिन अधिवक्ताओं के चैंबर और अन्य सुविधाओं के लिए अतिरिक्त जमीन की आवश्यकता है।

उन्होंने मांग रखी कि नए भवन में पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं कराया गया तो अधिवक्ता वहां स्थानांतरित नहीं होंगे।

फर्जी मुकदमा दर्ज कराने के मामले में बरी

जयपुर 7 फरवरी। जयपुर की अदालत में न्यायाधीश लीमा यादव ने जमीन विवाद में फर्जी मुकदमा दर्ज कराने से जुड़े मामले में आरोपी कल्याण सहाय और सुनीता देवी सहित अन्य आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।

अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आईपीसी की धाराओं 147, 149, 323, 341, 452 और 427 के तहत आरोप साबित करने के लिए ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका।

पुलिस शिप्रा पथ थाना क्षेत्र से संबंधित इस मामले में आधा दर्जन आरोपियों को गिरफ्तार कर चालान पेश किया था।

बचाव पक्ष के अधिवक्ता सुरेश शर्मा ने तर्क दिया कि गवाहों के बयान विरोधाभासी हैं और विश्वसनीय साक्ष्य नहीं हैं। अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया।

दी बार एसोसिएशन वक्फ, जयपुर की बैठक

जयपुर 7 फरवरी। जयपुर में दी बार एसोसिएशन वक्फ की प्रबंध कार्यकारिणी की बैठक आयोजित की गई, जिसमें वर्ष 2025 के चुनाव नियमों के अंतर्गत चार अधिवक्ताओं को कार्यकारिणी सदस्य मनोनीत किया गया।

बैठक में चुनाव नियम-2025 के अंतर्गत अब्दुल हसनैन खान, संजय माहेश्वरी, मोहम्मद रेहान और अबरार अहमद को कार्यकारिणी सदस्य मनोनीत किया गया।

बैठक में अध्यक्ष अब्दुल वाहिद नकवी, महासचिव मोहम्मद असलम खान, उपाध्यक्ष इकरारुल्लाह खान और वसीम खान, संयुक्त सचिव नौशाद कुरैशी, सांस्कृतिक सचिव मोहम्मद रफीक खान, लाइब्रेरी सचिव अब्दुल अहद नकवी, कोषाध्यक्ष इरफान अहमद, उपकोषाध्यक्ष महेंद्र कुमार सोनी और कार्यकारिणी सदस्य साजिद वाहिद उपस्थित रहे। बैठक में संगठन के आगामी कार्यक्रमों और अधिवक्ताओं के हितों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।

आयुष नर्सेज को हाईकोर्ट से अंतरिम राहत, डिजिटल अटेंडेंस पर फिलहाल दंडात्मक कार्रवाई नहीं

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ ने आयुष विभाग के नर्सिंग कर्मियों से जुड़े डिजिटल अटेंडेंस विवाद में आयुष नर्सेज को अंतरिम राहत दी हैं.

हाईकोर्ट ने आदेश दिया हें करते हुए स्पष्ट किया कि मोबाइल एप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराने में आने वाली तकनीकी समस्याओं के कारण फिलहाल किसी भी नर्सिंग कर्मचारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

राज्य आयुष नर्सेज महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष छीतर मल सैनी की ओर से दायर कि गयी याचिका में कहा गया था कि कई स्वास्थ्य केंद्रों और ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क और तकनीकी समस्याओं के कारण मोबाइल एप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराना कई बार संभव नहीं हो पाता, जिसके कारण कर्मचारियों को अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष ने तर्क दिया कि जब तक डिजिटल प्रणाली पूरी तरह तकनीकी रूप से सक्षम और त्रुटिरहित नहीं हो जाती, तब तक कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करना उचित नहीं है।

हाईकोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद इस तर्क को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग को नोटिस जारी किया और जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही अगली सुनवाई तक कर्मचारियों के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी।

जस्टिस कुलदीप माथुर और जस्टिस मुकेश राजपुरोहित पाली दौरे पर

पाली 7 फरवरी। राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस कुलदीप माथुर और जस्टिस मुकेश राजपुरोहित शनिवार को पाली दौरे पर रहें.

दोनो न्यायाधिशों ने पाली जिला बार एसोसिएशन की ओर से आयोजित शपथग्रहण समारोह में ​शिरकत की और नव निर्वाचित पदाधिकारियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई.

पाली जिला न्यायालय में आगमन पर दोनो न्यायाधिशों का जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेंद्र कुमार ने दोनों न्यायाधीशों का स्वागत किया।

कार्यक्रम में बार एसोसिएशन पाली के अध्यक्ष पी.एम. जोशी सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे।

इस अवसर पर न्यायालय परिसर में डाकघर, ई-मित्र केंद्र और शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर का उद्घाटन किया गया।

न्यायाधीशों ने न्यायिक व्यवस्थाओं को और अधिक प्रभावी बनाने तथा आमजन को त्वरित न्याय उपलब्ध कराने के लिए सभी से सहयोग की अपील की।

बाल विवाह मुक्त भारत अभियान पर विधिक सेमिनार

चित्तौड़गढ़, 7 फरवरी । जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और बाल अधिकारिता विभाग के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को “बाल विवाह मुक्त भारत अभियान” के तहत विधिक जागरूकता सेमिनार आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारी, विधि विद्यार्थी और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। विशेषज्ञ वक्ताओं ने बाल विवाह निषेध अधिनियम के कानूनी प्रावधानों, शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया और इसके सामाजिक दुष्परिणामों पर विस्तृत जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक बाल विवाह समाप्त करना और 2026 तक इसकी दर में उल्लेखनीय कमी लाना है।

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को बाल विवाह रोकने और समाज में जागरूकता फैलाने की सामूहिक शपथ दिलाई गई, ताकि इस कुप्रथा के उन्मूलन के लिए जनसहभागिता बढ़ाई जा सके।

डोडा-चूरा तस्करी मामले में नासिर मिरासी को 15 वर्ष की सजा

भीलवाड़ा 7 फरवरी। भीलवाड़ा के डोडा-चूरा तस्करी मामले में संबंधित विशेष अदालत ने ट्रक मालिक नासिर मिरासी को दोषी ठहराते हुए 15 वर्ष के कठोर कारावास और 1.5 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।

प्रकरण के अनुसार 12 मई 2016 को एनएच-79 पर नाकाबंदी के दौरान तत्कालीन थाना प्रभारी रामअवतार चौधरी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने ट्रक की तलाशी ली, जिसमें 638 किलोग्राम डोडा-चूरा बरामद हुआ था।

जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अदालत में आरोप-पत्र पेश किया।

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 12 गवाह और 92 दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिन्हें अदालत ने पर्याप्त माना।

अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी गंभीर सामाजिक अपराध है, इसलिए ऐसे मामलों में कठोर दंड आवश्यक है ताकि अपराध पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।

नीच कहने पर दर्ज हुई FIR मामले में हाईकोर्ट से आरोपी को अंतरिम राहत, गिरफ्तारी पर रोक

जोधपुर 7 फरवरी। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने नागौर जिले में दर्ज एक आपराधिक मामले में आरोपी को अंतरिम राहत देते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।

जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की एकलपीठ ने यह याचिकाकर्ता नथमल भाटी की ओर से दायर याचिका पर दिया हैं.

याचिकाकर्ता पर आरोप हैं उसने शिकायतकर्ता को “जातिसूचक गालियां नीच जैसे शब्द निकाल कर अपमानित किया।”

अधिवक्ता मनीष टॉक ने अदालत में तर्क दिया कि एफआईआर में लगाए गए आरोपों के आधार पर अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत अपराध बनना प्रथम दृष्टया स्थापित नहीं होता। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय का भी हवाला दिया गया।

मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने राज्य की ओर से लोक अभियोजक को नोटिस स्वीकार करने का निर्देश दिया और निजी प्रतिवादी को नोटिस जारी करने के आदेश दिए। साथ ही, अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए उसे जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया गया।

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