जयपुर/नई दिल्ली। देश के रिटायर्ड जजों के एसोसिएशन “एसोसिएशन ऑफ रिटायर्ड जजेज ऑफ सुप्रीम कोर्ट एंड हाई कोर्ट्स ऑफ इंडिया” ने बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस गौतम पटेल की पुत्री पर लंदन में हुए कथित हमले तथा पिछले कई महीनों से जस्टिस पटेल और उनके परिवार को मिल रही कथित जान से मारने की धमकियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसकी कड़ी निंदा की है।
संगठन ने केंद्र और राज्य सरकारों से मांग की है कि पूर्व न्यायाधीशों और उनके परिवारों की सुरक्षा के लिए ठोस और प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
संगठन के अध्यक्ष और राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस जे.के. रांका ने गुरूवार को एक बयान जारी कर कहा कि यह घटना केवल एक व्यक्ति या परिवार पर हमला नहीं है, बल्कि न्यायपालिका की गरिमा और न्यायिक स्वतंत्रता से जुड़े गंभीर प्रश्न भी खड़े करती है।
जस्टिस जे के रांका ने कहा कि जिन न्यायाधीशों ने अपने कार्यकाल के दौरान संविधान और कानून के अनुसार निष्पक्ष निर्णय दिए हैं, उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद भी किसी प्रकार के खतरे या प्रताड़ना का सामना नहीं करना चाहिए।
जस्टिस जे के रांका ने संगठन की ओर से जारी किए बयान में कहा हैं कि न्यायाधीश अपने संवैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए अनेक संवेदनशील मामलों में निर्णय देते हैं। कई बार उनके निर्णय किसी पक्ष के हित में होते हैं तो कई बार किसी पक्ष के विरुद्ध। ऐसे में कुछ असंतुष्ट तत्व न्यायाधीशों के प्रति दुर्भावना रख सकते हैं, जिसका असर उनके व्यक्तिगत जीवन और परिवार तक पहुंच सकता है।
जस्टिस रांका ने कहा कि संगठन का मानना है कि न्यायिक पद से सेवानिवृत्त होने के बाद भी ऐसे खतरे समाप्त नहीं होते। यदि किसी न्यायाधीश को उनके द्वारा दिए गए निर्णयों के कारण निशाना बनाया जाता है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानून के शासन के लिए चिंता का विषय है।
संगठन की ओर से कहा गया कि जस्टिस गौतम पटेल के परिवार के साथ हुई घटना इसी प्रकार की चिंताओं को और अधिक गंभीर बना देती है।
संगठन ने कहा कि यदि किसी पूर्व न्यायाधीश के परिवार के सदस्य को सार्वजनिक स्थान पर शारीरिक हमले का सामना करना पड़े और साथ ही परिवार को लगातार धमकियां भी मिल रही हों, तो यह केवल व्यक्तिगत सुरक्षा का मामला नहीं रह जाता बल्कि संस्थागत सुरक्षा का प्रश्न बन जाता है।
केंद्र और राज्य सरकारों से विशेष सुरक्षा व्यवस्था की मांग
एसोसिएशन ने भारत सरकार और सभी राज्य सरकारों से आग्रह किया है कि पूर्व न्यायाधीशों की सुरक्षा को लेकर एक व्यापक नीति बनाई जाए।
संगठन का कहना है कि वर्तमान समय में कई ऐसे मामले सामने आते हैं, जिनमें न्यायिक अधिकारियों को उनके फैसलों के कारण विरोध या धमकियों का सामना करना पड़ता है।
संगठन ने सुझाव दिया कि पूर्व न्यायाधीशों की सुरक्षा संबंधी जोखिमों का समय-समय पर आकलन किया जाए और आवश्यकता के अनुसार उन्हें तथा उनके परिवारों को सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
मुख्य न्यायाधीश के हस्तक्षेप की सराहना
बयान में संगठन ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) की भूमिका की भी सराहना की है। संगठन ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश ने मामले को गंभीरता से लेते हुए व्यक्तिगत स्तर पर हस्तक्षेप किया और यूनाइटेड किंगडम में भारतीय उच्चायुक्त (Indian High Commissioner) के समक्ष यह मुद्दा उठाया।
संगठन के अनुसार, इस हस्तक्षेप के बाद जस्टिस गौतम पटेल और उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उचित सुरक्षा व्यवस्था किए जाने का आश्वासन प्राप्त हुआ है।
एसोसिएशन ने इसे न्यायपालिका के प्रति संस्थागत संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण होती है।