जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर एक बार फिर न्यायिक गतिविधियों के केंद्र में आने जा रही है। शनिवार, को कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के पृथ्वीराज चौहान ऑडिटोरियम में रिटायर्ड जजों की भूमिका पर विशेष संगोष्ठी “द बेंच बियॉन्ड रिटायरमेंट: एडीआर के विकास और आम जनता के लिए कानूनों की जागरूकता में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की भूमिका” का आयोजन होगा.
इस कार्यक्रम में देशभर से सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज भाग लेंगे।
देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत मुख्य अतिथि के रूप में इस कार्यक्रम में शिरकत करेंगे.
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी इस कार्यक्रम को संबोधित करेंगे।

कार्यक्रम की रूपरेखा
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 9:30 बजे गणमान्य अतिथियों के स्वागत के साथ होगी।
राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की प्रस्तुति, दीप प्रज्वलन और अतिथियों का सम्मान कार्यक्रम के प्रारंभिक चरण का हिस्सा रहेगा।
इसी दौरान नालसा (NALSA) का थीम सॉन्ग भी प्रस्तुत किया जाएगा, जो विधिक सेवा प्राधिकरण की भूमिका को दर्शाएगा।
समारोह में एसोसिएशन ऑफ रिटायर्ड जजेस ऑफ सुप्रीम कोर्ट एवं हाई कोर्ट्स ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष जस्टिस के.एल. शर्मा स्वागत भाषण देंगे।
पूर्व मुख्य न्यायाधीश, सिक्किम हाई कोर्ट एवं राजस्थान चैप्टर के अध्यक्ष जस्टिस एन.के. जैन का परिचयात्मक उद्बोधन होगा.
कार्यक्रम में राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस वी.एस. दवे भी अपने विचार रखेंगे, जो इस विषय के व्यावहारिक पहलुओं पर प्रकाश डालेंगे।
इसके अलावा राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ‘विजन स्टेटमेंट’ प्रस्तुत करेंगे, जिसमें वे भविष्य की न्यायिक दिशा और रिटायर्ड जजों की भूमिका को स्पष्ट करेंगे।
महत्वपूर्ण घोषणाएं और विमोचन
कार्यक्रम के दौरान एक पुस्तक और स्मारिका का विमोचन भी किया जाएगा, जो इस विषय से संबंधित महत्वपूर्ण विचारों और अनुभवों को संकलित करेगी।
यह प्रकाशन न्यायिक क्षेत्र के छात्रों, अधिवक्ताओं और आम नागरिकों के लिए उपयोगी साबित होगा।
मुख्यमंत्री और CJI का संबोधन
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इस कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे और राज्य में न्यायिक सुधारों, कानूनी जागरूकता और ADR तंत्र के विस्तार पर अपने विचार रखेंगे।
उनका संबोधन राज्य सरकार की न्यायिक प्राथमिकताओं को दर्शाएगा।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत का कीनोट एड्रेस होगा।
उनके संबोधन में न्यायपालिका के वर्तमान परिदृश्य, लंबित मामलों के समाधान, ADR की उपयोगिता और सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की संभावित भूमिका पर गहन चर्चा होने की संभावना है।
उनका अनुभव और दृष्टिकोण इस विषय को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण साबित होगा।
सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण?
भारत में न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में ADR (Alternative Dispute Resolution) जैसे माध्यम—मध्यस्थता, सुलह, पंचाट—इन समस्याओं का प्रभावी समाधान प्रस्तुत करते हैं।
सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के पास अनुभव और ज्ञान का विशाल भंडार होता है, जिसका उपयोग ADR तंत्र को मजबूत करने में किया जा सकता है।
यह संगोष्ठी इसी विचार को केंद्र में रखकर आयोजित की जा रही है कि किस प्रकार रिटायर्ड जज अपनी विशेषज्ञता का उपयोग कर न्यायिक प्रणाली को सहयोग दे सकते हैं और आम जनता तक कानून की जानकारी पहुंचा सकते हैं।
कानूनी जागरूकता पर विशेष फोकस
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य आम जनता में कानूनी जागरूकता बढ़ाना भी है। आज भी देश के कई हिस्सों में लोग अपने अधिकारों और कानूनी प्रक्रियाओं के बारे में पूरी तरह से जागरूक नहीं हैं।
ऐसे में सेवानिवृत्त न्यायाधीश समाज में जागरूकता फैलाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
NALSA और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (RSLSA) के माध्यम से विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम पहले से चलाए जा रहे हैं, लेकिन इस संगोष्ठी के जरिए इन प्रयासों को और गति देने की योजना है।
सम्मान समारोह और समापन
कार्यक्रम के अंत में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीशों का सम्मान किया जाएगा और उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किए जाएंगे। यह सम्मान उनके योगदान को सराहने का प्रतीक होगा।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ होगा, जिसके बाद सभी अतिथि एक समूह फोटो के लिए एकत्रित होंगे। अंत में हाई टी का आयोजन भी रखा गया है, जहां अनौपचारिक चर्चा और संवाद का अवसर मिलेगा।