जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय (RU) के कुलगुरु पद पर प्रो. अल्पना कटेजा की नियुक्ति को लेकर चल रहे विवाद में एक अहम मोड़ आ गया है।
राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने कुलपति की नियुक्ति को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ता प्रो. महिपाल सिंह सिहाग की अपील पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य सरकार के उच्च अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश उस अपील याचिका पर दिया, जिसमें याचिकाकर्ता ने एकलपीठ द्वारा लगाई गई 5 लाख रुपये की लागत जमा कराने की शर्त को चुनौती दी है।
क्या है मामला
दरअसल, प्रो. महिपाल सिंह सिहाग ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर कर राजस्थान विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. अल्पना कटेजा की नियुक्ति को चुनौती दी थी।
याचिका में क्वो वारंटो (Quo Warranto) की मांग की गई थी, जिसके माध्यम से अदालत से यह जांच कराने का अनुरोध किया गया कि संबंधित अधिकारी किस वैधानिक अधिकार के तहत उस पद पर आसीन हैं।
याचिकाकर्ता का आरोप था कि कुलगुरु की नियुक्ति के समय उनके खिलाफ दर्ज कथित आपराधिक मामलों की जानकारी छुपाई गई, जिससे वे इस पद के लिए अयोग्य हो जाती हैं। याचिका में 25 सितंबर 2023 को जारी नियुक्ति आदेश को शून्य और अमान्य घोषित करने की मांग की गई थी।
एकलपीठ ने उठाए थे बोना फाइड्स पर सवाल
इस याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता की बोना फाइड्स (निष्कपट मंशा) पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
एकलपीठ ने कहा था कि जनहित याचिका के नाम पर यदि कोई व्यक्ति निजी दुर्भावना, प्रतिशोध या प्रचार के उद्देश्य से कोर्ट का दरवाजा खटखटाता है, तो यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग माना जाएगा।
इसी आधार पर एकलपीठ ने याचिकाकर्ता को सात दिन के भीतर 5 लाख रुपये राजस्थान हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष जमा कराने का निर्देश दिया था।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया था कि यदि निर्धारित समय में राशि जमा नहीं की गई, तो याचिका स्वतः खारिज मानी जाएगी।
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खंडपीठ में दी गई चुनौती
एकलपीठ के इस आदेश से असंतुष्ट होकर प्रो. महिपाल सिंह सिहाग ने खंडपीठ के समक्ष अपील दायर की।
अपील में कहा गया कि इतनी बड़ी राशि जमा कराने की शर्त न्याय तक पहुंच में बाधा उत्पन्न करती है और इससे याचिकाकर्ता को सुनवाई का वास्तविक अवसर नहीं मिल पाता।
खंडपीठ ने अपील पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए राजस्थान विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. अल्पना कटेजा, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव, राजस्थान विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
अपीलकर्ता प्रो. महिपाल सिंह सिहाग की ओर से अधिवक्ता डॉ. सविता सिहाग ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा।