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श्रीनाथ विहार की विवादित जमीन पर तीसरे पक्ष की एंट्री पर रोक, JDA को राजस्थान हाईकोर्ट का नोटिस; 24 सितंबर को अगली सुनवाई

Shrinath Vihar Land Dispute: Rajasthan High Court Restricts Third-Party Rights, Issues Notice to JDA

जयपुर। जयपुर की श्रीनाथ विहार आवासीय योजना से जुड़ी विवादित जमीन पर फिलहाल तीसरे पक्ष की एंट्री पर रोक लग गई है।

राजस्थान हाईकोर्ट ने इस विवादित जमीन पर तीसरे पक्ष के अधिकार बनाने पर रोक लगाने का अंतरिम आदेश जारी किया है। साथ ही मामले में जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) समेत अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है।

यह याचिका राजदरबार पिंकसिटी डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दायर की गई है।

याचिका में श्रीनाथ विहार से जुड़े JDA अपीलीय प्राधिकारण और उपायुक्त, जोन-11 के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।

जस्टिस अनूप कुमार ढंड ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा कि फिलहाल विवादित जमीन पर किसी तीसरे पक्ष का नया अधिकार नहीं बनाया जाएगा।

हालांकि, यह रोक प्रतिवादियों को कोर्ट का नोटिस मिलने के बाद ही लागू होगी। इसके साथ ही, प्रतिवादी पक्ष चाहे तो इस रोक को हटाने के लिए कोर्ट में अलग से आवेदन भी दे सकता है।

मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर 2026 को होगी।

जमीन के डबल अलॉटमेंट का आरोप लगाया गया

यह मामला राजदरबार पिंकसिटी डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड की याचिका से जुड़ा है। कंपनी ने विवादित जमीन को लेकर JDA के पहले के फैसलों को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

विवादित जमीन को लेकर याचिकाकर्ता की ओर से डबल अलॉटमेंट का आरोप लगाया गया है।

उसका दावा है कि जिस जमीन को पहले एक दूसरी योजना यानी ‘नारायण नरसी विलेज’ से जोड़ा गया था, बाद में उसी जमीन को श्रीनाथ विहार आवासीय योजना से भी जोड़ दिया गया।

यही वजह है कि जमीन पर अधिकार को लेकर विवाद खड़ा हुआ।

2005-06 में जमीन सौंपने का दावा

याचिकाकर्ता की ओर से दावा किया गया है कि संबंधित जमीन वर्ष 2005-06 में उसकी योजना के लिए JDA को सौंप दी गई थी।

आरोप है कि जेडीए ने एक ही जमीन को पहले नारायण नरसी विलेज और बाद में श्रीनाथ विहार की विकास प्रक्रिया में शामिल कर दिया।

जमीन को श्रीनाथ विहार योजना में शामिल किए जाने पर याचिकाकर्ता ने आपत्ति उठाई।

इस विवाद को लेकर पहले JDA के स्तर पर कार्रवाई हुई और बाद में JDA अपीलीय अधिकरण से जुड़े आदेश भी सामने आए। याचिकाकर्ता ने इन्हीं आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

हालांकि, 2 सितंबर के हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश में इन आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया गया है।

पहले के आदेशों को दी गई हाईकोर्ट में चुनौती

याचिकाकर्ता ने JDA अपीलीय अधिकरण और जोन-11 के उपायुक्त की ओर से दिए गए पहले के आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

याचिका में विवादित जमीन पर अधिकार को लेकर अपना पक्ष रखा गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि जमीन पर उसके पहले से मौजूद दावे और अधिकारों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

हालांकि, अंतरिम आदेश में हाईकोर्ट ने जमीन के मालिकाना हक या डबल अलॉटमेंट के आरोप पर कोई अंतिम राय नहीं दी है।

तीसरे पक्ष का नया अधिकार नहीं बनाया जा सकेगा

जस्टिस अनूप कुमार ढंड ने अंतरिम व्यवस्था के तहत निर्देश दिया कि फिलहाल पक्षकार विवादित जमीन पर किसी तीसरे पक्ष का अधिकार नहीं बनाएंगे।

इसका मतलब है कि मुकदमे के लंबित रहने के दौरान ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाना चाहिए, जिससे जमीन को लेकर किसी नए व्यक्ति या पक्ष का अधिकार पैदा हो और बाद में मामले का फैसला होने पर नई कानूनी स्थिति खड़ी हो जाए।

यह रोक फिलहाल अंतरिम है। इसे अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।

प्रतिवादी रोक हटाने के लिए आवेदन दे सकते हैं

हाईकोर्ट ने फिलहाल प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने कहा है कि नोटिस मिलने के बाद प्रतिवादी पक्ष चाहे तो अंतरिम रोक हटाने के लिए अलग से आवेदन दे सकता है।

यानी प्रतिवादियों को अपना पक्ष रखने और विवादित जमीन पर लगी अंतरिम रोक को चुनौती देने का मौका दिया गया है।

24 सितंबर को आगे की सुनवाई

हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर 2026 को तय की है। उस दिन प्रतिवादियों का पक्ष सामने आने के बाद अंतरिम रोक को लेकर आगे का फैसला हो सकता है।

फिलहाल कोर्ट ने विवादित जमीन पर किसी नए व्यक्ति या पक्ष का हक बनाने पर रोक लगाई है। जमीन पर वास्तविक अधिकार किसका है और डबल अलॉटमेंट के आरोप सही हैं या नहीं, इस पर हाईकोर्ट ने अभी कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है।

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