राज्य बार काउंसिल के चुनाव सदस्य चुनाव से जुड़ी किसी भी निर्णय प्रक्रिया में शामिल नहीं होंगे- सुपरवाईजरी कमेटी
नई दिल्ली। राजस्थान और हिमाचल प्रदेश की राज्य बार काउंसिलों के चुनावी मामलों में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है।
हाई-पावर्ड इलेक्शन सुपरवाइजरी कमेटी ने 25 फरवरी 2026 को पारित अपने अंतरिम आदेश में राज्य हाई-पावर्ड इलेक्शन कमेटी द्वारा राज्य बार काउंसिलों के कार्यों को विशेष समितियों के अधीन रखने के आदेश पर रोक लगा दी है।
यह आदेश Supervisory Committee ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से दायर विशेष संख्या 45/2026 में दिया हैं.
क्या था मामला?
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने हाई-पावर्ड इलेक्शन कमेटी द्वारा पारित उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत राजस्थान और हिमाचल प्रदेश की राज्य बार काउंसिलों के सभी कार्यों को संबंधित राज्यों के एडवोकेट जनरल की अध्यक्षता में गठित विशेष समितियों की निगरानी में रखने का निर्देश दिया गया था।
इस पर सुनवाई करते हुए समिति के चेयरपर्सन, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस सुधांशु धूलिया, सदस्य जस्टिस रविशंकर झा (पूर्व मुख्य न्यायाधीश, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट) और वरिष्ठ अधिवक्ता वी. गिरी ने अंतरिम आदेश पारित किया।
विशेष समितियों के आदेश पर रोक
समिति ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि हाई-पावर्ड इलेक्शन कमेटी द्वारा राज्य बार काउंसिलों के सभी कार्यों को विशेष समितियों के अधीन रखने के आदेश पर फिलहाल रोक लगाई जाती है।
हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया कि चुनाव से संबंधित मामलों में जो अधिकार विशेष समितियों को दिए गए थे, वे अधिकार सीधे हाई-पावर्ड इलेक्शन कमेटी स्वयं प्रयोग कर सकेगी।
इसका अर्थ यह है कि चुनावी प्रक्रिया की निगरानी जारी रहेगी, लेकिन राज्य बार काउंसिलों के सामान्य प्रशासनिक कार्यों पर विशेष समितियों का नियंत्रण फिलहाल प्रभावी नहीं रहेगा।
उम्मीदवारों के लिए सख्त निर्देश
अंतरिम आदेश में चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कड़ा रुख अपनाया गया है।
समिति ने साफ कहा है कि जो भी सदस्य, जिसमें राज्य बार काउंसिल के अध्यक्ष भी शामिल हैं, आगामी चुनाव लड़ने वाले हैं, वे चुनाव से संबंधित किसी भी निर्णय प्रक्रिया में शामिल नहीं होंगे।
यदि कोई ऐसा सदस्य चुनाव संबंधी निर्णयों में भाग लेता पाया जाता है, तो उसे चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा।
पदाधिकारियों को निर्देश
आदेश में यह भी कहा गया है कि हिमाचल प्रदेश और राजस्थान बार काउंसिलों के सभी पदाधिकारी चुनाव संबंधी मामलों में हाई-पावर्ड इलेक्शन कमेटी के निर्देशों के अनुसार कार्य करेंगे।
चुनाव प्रक्रिया की संपूर्ण निगरानी और नियंत्रण हाई-पावर्ड इलेक्शन कमेटी के हाथ में रहेगा।
अगली सुनवाई 2 मार्च को
मामले की अगली सुनवाई 2 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है।