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BCI में बड़े बदलाव की मांग, सुप्रीम कोर्ट पहुंची याचिका; चेयरमैन मनन मिश्रा के लंबे कार्यकाल पर सवाल, सीमा तय करने की मांग

Supreme Court Plea Seeks Term Limits for BCI Chairman, Raises Questions Over Manan Mishra's Long Tenure

नई दिल्ली: बार काउंसिल ऑफ इंडिया यानी बीसीआई के कामकाज में बड़े संस्थागत सुधार की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन की कुर्सी पर कोई व्यक्ति आखिर कितने समय तक रह सकता है?, क्या बार-बार चुनाव जीतकर एक ही व्यक्ति लंबे समय तक इस पद पर बना रह सकता है?, बीसीआई के चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के कार्यकाल की सीमा तय होनी चाहिए या नहीं?

बीसीआई चेयरमैन की कुर्सी पर उठे ये सारे सवाल अब सुप्रीम कोर्ट की चौखट तक पहुंच गए हैं।

बीसीआई के कामकाज और उसके शीर्ष पदों को लेकर दाखिल इस याचिका में चेयरमैन और वाइस चेयरमैन का कार्यकाल 2 साल तय करने की मांग की गई है।

साथ ही कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति अपने पूरे जीवन में 3 बार से ज्यादा चेयरमैन या वाइस चेयरमैन न बन सके।

याचिका में बीसीआई के मौजूदा चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के लंबे कार्यकाल का भी खास तौर पर जिक्र किया गया है।

इसमें कहा गया है कि वह नवंबर 2014 से लगातार चेयरमैन हैं।

याचिका में सवाल उठाया गया है कि बीसीआई के शीर्ष पद पर एक ही व्यक्ति लंबे समय तक क्यों बना रहे।

क्या इससे नए लोगों और अलग-अलग राज्यों के प्रतिनिधियों के लिए नेतृत्व का रास्ता सीमित नहीं हो रहा?

इतना ही नहीं याचिका में बीसीआई के चेयरमैन पद के लिए रोटेशन सिस्टम बनाने की भी मांग की गई है, ताकि अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को भी नेतृत्व का मौका मिल सके।

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2 साल का हो चेयरमैन का कार्यकाल

यह याचिका एडवोकेट एम. वरदन ने दाखिल की है। उनकी ओर से एडवोकेट संदीप पांडे और राजेश सिंह चौहान पैरवी कर रहे हैं।

याचिका में एडवोकेट्स एक्ट की धारा 4(3) के एक प्रावधान को चुनौती दी गई है।

इस प्रावधान के मुताबिक, बीसीआई का कोई सदस्य तब तक पद पर बना रह सकता है, जब तक उसके उत्तराधिकारी का चुनाव नहीं हो जाता।

इसलिए चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के लिए 2 साल का तय कार्यकाल होना चाहिए।

यानी चेयरमैन का कार्यकाल कितना होगा, यह साफ होना चाहिए।

बार-बार चुनाव जीतकर एक ही व्यक्ति लंबे समय तक इस पद पर बना न रहे, इसके लिए भी सीमा तय होनी चाहिए।

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3 टर्म से ज्यादा नहीं

याचिका में इससे भी आगे बढ़कर एक व्यक्ति के लिए अधिकतम 3 टर्म की सीमा तय करने की मांग की गई है।

याचिका में मांग की गई है कि कोई व्यक्ति अपने पूरे जीवन में अधिकतम 3 बार ही चेयरमैन या वाइस चेयरमैन बन सके।

चाहे ये टर्म लगातार हों या अलग-अलग समय पर, सीमा 3 टर्म की ही रहे।

याचिका में यह भी कहा गया है कि इस सीमा से बचने के लिए किसी दूसरे पद या व्यवस्था के जरिए उसी व्यक्ति को वही या लगभग वही अधिकार नहीं दिए जाने चाहिए।

यानी 3 टर्म पूरे होने के बाद अंतरिम व्यवस्था, कमेटी, नामांकन, दोबारा चुनाव या किसी दूसरे पद के रास्ते से उसी व्यक्ति को फिर वही ताकत देने की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।

मनन मिश्रा के लंबे कार्यकाल पर सवाल

याचिका में मौजूदा बीसीआई चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के कार्यकाल का भी जिक्र किया गया है।

मनन मिश्रा पहली बार 2012 में बीसीआई चेयरमैन चुने गए थे। इसके बाद 17 अप्रैल 2014 से 9 नवंबर 2014 तक बीरी सिंह सिनसिनवार चेयरमैन रहे।

फिर 9 नवंबर 2014 को मनन मिश्रा दोबारा इस पद पर लौटे और तब से लगातार चेयरमैन बने हुए हैं।

मार्च 2025 में वह रिकॉर्ड 7वीं बार लगातार चेयरमैन चुने गए।

इस तरह नवंबर 2014 से उनका लगातार कार्यकाल अब करीब 12 साल का हो चुका है।

याचिका में इसी लंबे कार्यकाल को लेकर सवाल उठाया गया है।

सवाल यह है कि जब चेयरमैन का कार्यकाल 2 साल का है, तो बार-बार चुनाव जीतकर एक ही व्यक्ति इतने लंबे समय तक इस पद पर कैसे बना रह सकता है?

हालांकि, यह याचिकाकर्ता की मांग और उसमें उठाया गया सवाल है।

सुप्रीम कोर्ट ने अभी इस मामले में कोई फैसला नहीं दिया है।

28 में से 20 राज्यों को नहीं मिला मौका

याचिका में बीसीआई के नेतृत्व में राज्यों के प्रतिनिधित्व को लेकर भी सवाल उठाया गया है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि पिछले 30 साल में 28 राज्यों में से 20 राज्यों के प्रतिनिधि बीसीआई चेयरमैन नहीं बने।

यानी देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले प्रतिनिधियों को बीसीआई के शीर्ष पद पर पहुंचने का बराबर मौका नहीं मिला है।

इसी वजह से याचिका में चेयरमैन पद के लिए पारदर्शी और तय रोटेशन सिस्टम बनाने की मांग की गई है। इससे अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को भी समय-समय पर बीसीआई का नेतृत्व करने का मौका मिल सकेगा।

NALSAR विवाद के बाद उठे सवाल

यह याचिका ऐसे समय सामने आई है, जब बीसीआई चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा से जुड़ा NALSAR विवाद भी चर्चा में है।

NALSAR हैदराबाद के 2026 बैच के लॉ छात्रों ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस सूर्यकांत को यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनाए जाने पर आपत्ति जताई थी।

इसके बाद बीसीआई ने छात्रों के एनरोलमेंट को लेकर सख्त आदेश जारी किया।

हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद यह आदेश वापस ले लिया गया।

बाद में मनन कुमार मिश्रा ने साफ किया कि छात्रों के खिलाफ कोई जांच नहीं होगी और उनके भविष्य को कोई नुकसान नहीं पहुंचने दिया जाएगा।

नई याचिका में इसी घटनाक्रम का भी जिक्र किया गया है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि इस विवाद ने बीसीआई में फैसले लेने के तरीके और शीर्ष पद पर मौजूद अधिकारों के इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

हालांकि, याचिका में उठाए गए सवाल सिर्फ किसी एक फैसले तक सीमित नहीं हैं। इसमें बीसीआई के नेतृत्व, कार्यकाल और कामकाज की पूरी व्यवस्था में सुधार की मांग की गई है।

नए लोगों को भी मिले मौका

याचिका में सवाल उठाया गया है कि क्या सिर्फ चुनाव होने से किसी संस्था में लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत हो जाती है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि अगर चुनाव के बाद भी वही लोग बार-बार बड़े पदों पर लौटते रहें, तो नए लोगों, नए विचारों और अलग-अलग राज्यों की आवाज को मौका कैसे मिलेगा?

इसी वजह से याचिका में कार्यकाल की सीमा और क्षेत्रीय रोटेशन दोनों की मांग की गई है।

मांग सिर्फ चेयरमैन के पद तक सीमित नहीं है।

याचिका में बीसीआई के कामकाज, वित्तीय व्यवस्था और नियामक भूमिका में जवाबदेही मजबूत करने की भी बात कही गई है।

अब सुप्रीम कोर्ट के रुख का इंतजार

फिलहाल इस याचिका में उठाई गई मांगों पर सुप्रीम कोर्ट का रुख सामने आना बाकी है।

याचिका में बीसीआई के चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के लिए 2 साल का तय कार्यकाल, अधिकतम 3 टर्म और राज्यों के बीच रोटेशन की मांग की गई है।

अगर इन मांगों पर आगे सुनवाई होती है और कोई व्यवस्था तय होती है, तो इसका असर बीसीआई की पूरी नेतृत्व व्यवस्था पर पड़ सकता है।

यानी मामला सिर्फ मनन कुमार मिश्रा के कार्यकाल तक सीमित नहीं है।

याचिका में बीसीआई के शीर्ष पदों पर कार्यकाल की सीमा, बार-बार उसी व्यक्ति के लौटने और अलग-अलग राज्यों को नेतृत्व का मौका देने जैसे बड़े सवाल उठाए गए हैं।

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