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भरतपुर उचैन के पूर्व प्रधान हिमांशु अवाना पर 8 लाख का जुर्माना, तथ्य छुपाने पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई कड़ी फटकार

Supreme Court Recalls Its Own Order After Uchain’s Former Pradhan Hid Facts; Imposes ₹8 Lakh Penalty

अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवमंगल शर्मा की सलाह पर सरकार ने दायर कि थी आदेश रिकॉल की एप्लीकेशन, कोर्ट ने कि मंजूर

नई दिल्ली, 14 नवंबर

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण और अभूतपूर्व फैसले में अपने ही फैसले को वापस लेते हुए भरतपुर में उचैन के पूर्व प्रधान हिमांशु अवाना पर 8 लाख का जुर्माना लगाया हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला राजस्थान सरकार की ओर से दायर किए गए फैसले को रिकॉल करने के प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए ये आदेश दिया हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही 1 सिंतबर को दिए अपने ही एक्स-पार्टी आदेश को वापस ले लिया हैं.

हिमांशु को कोर्ट की फटकार

पूर्व विधायक जोगिंदर सिंह अवाना के बेटे हिमांशु अवाना को तथ्य छुपाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने हिमांशु अवाना पर 8 लाख का जुर्माना लगाते हुए कहा कि गलत तथ्यों के आधार पर अंतरिम आदेश हासिल करना “कोर्ट को गुमराह करने की गंभीर कोशिश” है.

कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता हिमांशु अवाना ने 1 सितंबर 2025 का आदेश गलत तथ्यों के आधार पर लिया है, ​इसलिए इसे वापस लिया जाता हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई आवश्यक है ताकि न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग पर रोक लग सके.

इसलिए याचिकाकर्ता पर 8 लाख का जुर्माना उदाहणीय फैसला होगा.

अधिवक्ता को भी फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ताओं को भी फटकार लगाई हैं..

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि “वकील का असली घर कोर्टरूम होता है, न कि मुवक्किल का घर।”

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि “वकील अदालत के अधिकारी हैं; उनसे पूर्ण सत्यता की अपेक्षा की जाती है।”

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोर्ट में राहत मांगने वाला कोई भी व्यक्ति पूर्ण और स्पष्ट तथ्य प्रस्तुत करने के लिए बाध्य है.

तथ्यों को छिपाना न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता पर सीधा प्रहार है और यह आचरण बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.

सरकार का पक्ष

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवमंगल शर्मा, पैनल एडवोकेट अनीशा रस्तोगी और निर्वाचन विभाग की ओर से ASG एस. वी. राजू, नव निर्वाचित प्रधान राम अवतार सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनींदर सिंह पेश होते हुए मामले में याचिकाकर्ता पर गलत तथ्य कोर्ट में रखने की जानकारी दी.

राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता के पक्ष में दिए गए सुप्रीम कोर्ट एक्स पार्टी आदेश के लिए दिए गए तथ्यों का कड़ा विरोध किया.

सरकार और निर्वाचन विभाग ने कोर्ट से कहा कि याचिकाकर्ता हिमांशु अवाना—जो पंचायत समिति उचैन, भरतपुर के पूर्व प्रधान हैं—द्वारा तथ्यों को बहुत ही गलत तरीके से और छुपाकर केवल अपने पक्ष के तथ्य रखे हैं.

तारीखवार सरकार ने रखे तथ्य

सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवमंगल शर्मा, पैनल एडवोकेट अनीशा रस्तोगी ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता ने जानबूझकर महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाकर सुप्रीम कोर्ट को गुमराह किया.

सरकार ने कहा कि हिमांशु ने याचिका दायर करते समय न केवल तथ्य छिपाए बल्कि स्वयं को अभी भी प्रधान बताकर कोर्ट से अंतरिम राहत हासिल कर ली.

सरकार की ओर से कोर्ट में आकड़ो और तारीख वार तथ्य पेश किए गए. जिसके अनुसार

हिमांशु अवाना के खिलाफ आरोप पर जांच रिपोर्ट के आधार पर 11 फरवरी 2024 को निलंबित किया गया था.

हाईकोर्ट का आदेश

निलंबन आदेश को चुनौती देने पर राजस्थान हाईकोर्ट ने 19 मार्च 2024 को केवल निलंबन पर स्टे दिया, लेकिन अविश्वास प्रस्ताव पर नहीं.

हाईकोर्ट ने 12 अगस्त 2024 को कहा कि अविश्वास प्रस्ताव पर टिप्पणी करना उचित नहीं है.

उचैन पंचायत समिति में पूर्व प्रधान हिमांशु अवाना के खिलाफ 12 अगस्त 2024 को 15 में से 13 सदस्यों ने उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित किया था.

जिसके बाद 14 अगस्त 2024 को उनका पद विधिवत रिक्त घोषित कर दिया गया.

नए प्रधान का हो चुका निर्वाचन

पद रिक्त होने पर नियमानुसार 16 फरवरी 2025 को नए निवार्चन में राम अवतार सिंह नए प्रधान के रूप में निर्वाचित हो चुके थे.

साथ ही हिमांशु अवाना का अविश्वास प्रस्ताव को चुनौती देने वाला सिविल सूट भी गैर-अभियोजन के कारण खारिज हो चुका था.

सरकार ने कहा कि फिर भी याचिकाकर्ता ने इनमें से एक भी तथ्य न तो अपनी रिट याचिका में बताया और न ही सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के समय जानकारी दी.

सरकार ने कोर्ट में कहा कि निर्वाचन आयोग द्वारा उपचुनाव पूरी तरह संपन्न कराए जा चुके थे.

इसके बावजूद हिमांशु ने WP (C) 818/2025 दायर कर स्वयं को कार्यरत प्रधान बताते हुए ग़लत तथ्य सुप्रीम कोर्ट मे पेश किए.

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