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सुप्रीम कोर्ट गर्मी की छुट्टियों में करेगा 7,300 से ज्यादा मामलों की सुनवाई

Supreme Court to Continue Hearings During Summer: Over 7,300 Cases Including Bail Pleas to Be Heard
सुप्रीम कोर्ट ने Partial Court Working Days के दौरान 7,300 से ज्यादा मामलों की सुनवाई करने का फैसला किया है। अदालत ने कहा है कि बेल याचिकाओं समेत नए मामलों की भी गर्मियों में नियमित सुनवाई होगी।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने 2026 के “Partial Court Working Days” के दौरान भी बड़े पैमाने पर न्यायिक कामकाज जारी रखने का फैसला किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने घोषणा की है कि

1 जून से 10 जुलाई 2026 के बीच 7,300 से ज्यादा मामलों की सुनवाई की जाएगी। इस अवधि में केवल पुराने लंबित मामले ही नहीं, बल्कि नए दाखिल होने वाले मामले, बेल याचिकाएं और अत्यावश्यक मामलों की भी नियमित सुनवाई जारी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि अदालत इस दौरान हजारों मामलों की सुनवाई के लिए विशेष सूची तैयार कर रही है, ताकि लंबित मामलों का बोझ कम किया जा सके और जरूरी मामलों में तुरंत राहत मिलती रहे। इससे यह संदेश गया है कि छुट्टियों के दौरान भी न्यायिक प्रक्रिया में किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी।

क्या है Partial Court Working Days व्यवस्था?

सुप्रीम कोर्ट में हर साल गर्मियों के दौरान सीमित कार्य व्यवस्था लागू होती है। पहले इसे आमतौर पर “summer vacation” कहा जाता था, लेकिन अब अदालत इसे “Partial Court Working Days” कहती है।

इस दौरान अदालत पूरी तरह बंद नहीं रहती, बल्कि सीमित संख्या में बेंच काम करती हैं और जरूरी मामलों की सुनवाई होती है।

पिछले कुछ वर्षों में सुप्रीम कोर्ट पर लंबित मामलों का दबाव लगातार बढ़ा है। इसी वजह से अदालत अब गर्मियों की अवधि में भी नियमित सुनवाई व्यवस्था को ज्यादा सक्रिय बना रही है।

इस बार सुप्रीम कोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि केवल urgent matters ही नहीं, बल्कि fresh matters और regular hearing cases भी सूचीबद्ध किए जाएंगे। इससे litigants और वकीलों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

कितने मामलों की होगी सुनवाई?

सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के अनुसार Partial Court Working Days के लिए शुरुआत में:

13,565 miscellaneous matters और 10,567 regular hearing matters सूचीबद्ध किए गए थे। इसमें connected matters भी शामिल हैं।

इसके बाद अदालत ने screening process के जरिए उन मामलों को चुना जिनकी सुनवाई इस अवधि में की जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि करीब 3,102 miscellaneous matters और 4,232 regular hearing matters को final consideration में रखा गया है। यानी कुल मिलाकर 7,300 से ज्यादा मामलों की सुनवाई इस अवधि में हो सकती है।

यह संख्या बताती है कि सुप्रीम कोर्ट अब vacation period को भी सक्रिय judicial working period के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।

किस दिन किस तरह के मामलों की होगी सुनवाई?

सुप्रीम कोर्ट ने Partial Court Working Days के दौरान सुनवाई का पूरा schedule भी जारी किया है, ताकि वकीलों और पक्षकारों को पहले से स्पष्ट रहे कि किस दिन किस प्रकार के मामलों की सुनवाई होगी।

अदालत के अनुसार:

  • सोमवार, मंगलवार और शुक्रवार को miscellaneous matters की सुनवाई होगी।
  • जबकि बुधवार और गुरुवार को regular hearing matters लिए जाएंगे।

Miscellaneous matters में:

  • नए दाखिल मामले (fresh matters)
  • notice जारी होने के बाद वाले मामले
  • पहले से स्थगित मामले
  • अत्यावश्यक याचिकाएं

शामिल होंगी।

वहीं बुधवार और गुरुवार को नियमित सुनवाई वाले मामलों के साथ urgent miscellaneous matters की भी सुनवाई की जा सकेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि fresh matters की listing auto-listing system के अनुसार होगी। यानी जैसे ही किसी मामले की filing, re-filing और verification प्रक्रिया पूरी होगी, उसे उसी Partial Court Working Days अवधि में listing मिल सकती है।

इस व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि गर्मियों के दौरान भी नए मामलों की सुनवाई लंबित न हो और litigants को लंबे इंतजार का सामना न करना पड़े। अदालत विशेष रूप से बेल याचिकाओं, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अत्यावश्यक राहत से जुड़े मामलों की नियमित सुनवाई जारी रखना चाहती है।

बेल याचिकाओं पर भी जारी रहेगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने सबसे महत्वपूर्ण स्पष्टता बेल मामलों को लेकर दी है। अदालत ने कहा है कि Partial Court Working Days के दौरान दाखिल होने वाली fresh bail pleas भी इसी अवधि में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की जाएंगी।

इसका मतलब यह है कि:

बेल मामलों के लिए litigants को vacation खत्म होने तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में सुनवाई लगातार जारी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि life and liberty से जुड़े मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी।

कानूनी हलकों में इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पहले गर्मियों की अवधि में कई मामलों की सुनवाई लंबी अवधि तक टल जाती थी।

अत्यावश्यक मामलों के लिए भी व्यवस्था जारी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि किसी मामले में extreme urgency हो, तो वकील या पक्षकार अदालत की Mentioning Branch के सामने उसका उल्लेख कर सकते हैं।

इसके लिए अदालत के पुराने circulars और guidelines लागू रहेंगे। यानी emergency stay matters, life and liberty issues या अन्य अत्यावश्यक याचिकाएं विशेष उल्लेख के जरिए जल्दी सुनवाई के लिए पेश की जा सकेंगी।

अदालत ने संकेत दिया है कि urgent judicial access को गर्मियों की अवधि में भी प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।

Hybrid Hearing व्यवस्था भी जारी रहेगी

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि hybrid hearing system जारी रहेगा। यानी वकील, Advocate-on-Record और parties-in-person वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी अदालत में पेश हो सकेंगे।

कोर्ट ने कहा कि virtual appearance के दौरान भी निर्धारित dress code लागू रहेगा। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने वाले वकीलों को black coat और band या black tie पहनना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कोविड काल में virtual hearing व्यवस्था शुरू की थी। बाद में अदालत ने hybrid model को जारी रखा। अब अदालत ने Partial Court Working Days के दौरान भी इसे बनाए रखने का फैसला किया है।

इस व्यवस्था से दूसरे राज्यों के वकीलों और litigants को राहत मिल सकती है, क्योंकि कई मामलों में दिल्ली आना जरूरी नहीं होगा।

Adjournment Letter को लेकर भी राहत

सुप्रीम कोर्ट ने उन मामलों को लेकर भी राहत दी है जहां Advocate-on-Record या party-in-person किसी वास्तविक कारण से पेश नहीं हो सकते।

अदालत ने कहा कि existing guidelines के अनुसार adjournment letters circulate किए जा सकते हैं। इससे genuine circumstances वाले मामलों में अनावश्यक dismissal या adverse orders से बचाव हो सकेगा।

लंबित मामलों का दबाव कम करने की कोशिश

सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या लगातार बड़ी चुनौती बनी हुई है। हजारों appeals, bail petitions, constitutional matters और civil disputes वर्षों से लंबित हैं।

इसी पृष्ठभूमि में अदालत अब hybrid hearings, auto-listing systems,vacation benches और continuous hearing models को ज्यादा सक्रिय तरीके से इस्तेमाल कर रही है।

Partial Court Working Days के दौरान 7,300 से ज्यादा मामलों की संभावित सुनवाई को backlog reduction strategy का हिस्सा माना जा रहा है।

वकीलों और litigants पर असर

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से litigants को तेजी से listing मिलने की संभावना बढ़ेगी। खासकर बेल मामलों और urgent petitions में देरी कम हो सकती है।

दूसरी ओर वकीलों के लिए भी यह संकेत है कि गर्मियों की अवधि अब पूरी तरह non-working phase नहीं रह गई है।

Hybrid hearing जारी रहने से दूसरे राज्यों के वकीलों, senior citizens और parties-in-person को भी सुविधा मिलेगी। इससे procedural delays कम करने में मदद मिल सकती है।

यह कदम अदालत की उस नई कार्यप्रणाली का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें न्यायिक कामकाज को पूरे साल अधिक सक्रिय और लगातार बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।

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