जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने लूणी नदी में लगातार बढ़ते औद्योगिक प्रदूषण और जहरीले अपशिष्ट के प्रवाह को लेकर राज्य सरकार व संबंधित विभागों की लापरवाही पर गहरी ना राज़गी व्यक्त करते हुए एक्शन प्लान पेश करने का आदेश दिया हैं.
जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि यह मामला केवल पर्यावरण संरक्षण का नहीं, बल्कि लूणी नदी के किनारे बसे जोधपुर, पाली और बालोतरा के हजारों लोगों के जीवन, आजीविका और स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय है।
यह टिप्पणी अदालत ने याचिकाकर्ता सांवळराम की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान की।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दिव्यमान सिंह राठौड़ ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि क्षेत्र की औद्योगिक इकाइयां बिना किसी मानक प्रक्रिया के विषैले रासायनिक अपशिष्ट को सीधे लूणी नदी और आसपास के खेतों में प्रवाहित कर रही हैं।
इस कारण न केवल नदी का जल दूषित हो गया है, बल्कि भूमिगत जल स्रोत भी जहरीले तत्वों से प्रभावित हो रहे हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि यह प्रदूषण केवल पर्यावरणीय असंतुलन का कारण नहीं बन रहा, बल्कि इससे स्थानीय लोगों का स्वास्थ्य गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है।
खेतों की उर्वरता खत्म हो रही है, पशुधन पर असर पड़ रहा है और पीने योग्य पानी तक विषैला हो चुका है।
हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि “पूर्व में भी कई बार आदेश दिए गए, लेकिन राज्य के जिम्मेदार अधिकारी अब तक आवश्यक संवेदनशीलता और तत्परता नहीं दिखा पाए हैं, जो अत्यंत चिंताजनक है।”
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को चेतावनी दी कि अब समय आ गया है कि राज्य सरकार, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिला प्रशासन और औद्योगिक इकाइयां सामूहिक रूप से ठोस कदम उठाएं।
हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में किसी भी प्रकार की शिथिलता आमजन के जीवन और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है, इसलिए सरकार को तत्काल कार्रवाई करनी होगी।
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता सज्जनसिंह राठौड़ ने अदालत को आश्वासन दिया कि दोषी औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कहा कि सरकार इस दिशा में सक्रिय है और लूणी नदी क्षेत्र के प्रदूषण नियंत्रण के लिए एक विस्तृत रिपोर्ट व कार्ययोजना अगली सुनवाई तक प्रस्तुत करेगी।
वहीं, प्रतिवादी की ओर से अधिवक्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए अल्प समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
हाईकोर्ट ने सभी प्रतिवादियों से अपेक्षा जताई कि वे मामले की गंभीरता को समझते हुए ईमानदारी और तत्परता के साथ कार्रवाई करें।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लूणी नदी का यह संकट केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि मानवीय आपदा का रूप ले चुका है, इसलिए प्रत्येक जिम्मेदार संस्था को अपनी भूमिका गंभीरता से निभानी होगी।
मामले की अगली सुनवाई 5 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है।