टॉप स्टोरी

चर्चित खबरें

Union Budget 2026-27: कानून मंत्रालय के बजट में लगातार कटौती, नि:शुल्क कानूनी सहायता को बढ़ावा, लेकिन ई-कोर्ट और डिजिटल न्यायिक ढांचे पर सवाल

Court Rulings Shape Rajasthan Budget 2026: Major Allocations for Schools, Road Safety, Mental Health and Aravalli Protection

नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा संसद में प्रस्तुत आम बजट 2026-27 ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार न्यायिक सुधारों के क्षेत्र में वित्तीय पुनर्संतुलन (Re-prioritisation) की नीति अपना रही है।

आम बजट में विधि एवं न्याय मंत्रालय का बजट 2026-27 में कम किया गया है, 2025-26 की तुलना में 489 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कटौती की गई है

जहां एक ओर विधि एवं न्याय मंत्रालय के कुल बजट में लगातार तीसरे वर्ष कटौती की गई है, वहीं दूसरी ओर गरीब, कमजोर और वंचित वर्गों को नि:शुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए अतिरिक्त संसाधन सुनिश्चित किए गए हैं।

यह बजट न्यायिक व्यवस्था में सामाजिक न्याय, डिजिटल सुधार और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाने की सरकारी कोशिशों को दर्शाता है, लेकिन साथ ही यह कई अहम सवाल भी खड़े करता है—खासतौर पर ई-कोर्ट परियोजना, डिजिटल न्यायिक अवसंरचना और तकनीकी विस्तार को लेकर।

कानून मंत्रालय का कुल बजट

बजट आंकड़ों पर नजर डालें तो विधि एवं न्याय मंत्रालय के कुल आवंटन में पिछले तीन वर्षों से लगातार गिरावट देखने को मिल रही है।

वित्त वर्ष 2024-25: ₹ 7,189.58 करोड़
वित्त वर्ष 2025-26: ₹ 4,998.24 करोड़
वित्त वर्ष 2026-27: ₹ 4,509.06 करोड़

अर्थात् 2025-26 की तुलना में 489 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कटौती की गई है। यदि 2024-25 से तुलना करें तो दो वर्षों में मंत्रालय के बजट में लगभग 2,680 करोड़ रुपये से अधिक की कमी आई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कटौती केवल संख्यात्मक नहीं है, बल्कि यह सरकार की बदलती प्राथमिकताओं का संकेत देती है, जहां न्यायिक क्षेत्र में खर्चों को पुनर्गठित किया जा रहा है।

न्यायिक क्षेत्र में खर्चों का पुनर्संतुलन

बजट भाषण और दस्तावेजों से संकेत मिलता है कि सरकार का फोकस निम्नलिखित बिंदुओं पर केंद्रित है—जिसमें सामाजिक न्याय और न्याय तक पहुंच, कमजोर वर्गों के लिए कानूनी सहायता, चयनित डिजिटल परियोजनाएं, तकनीकी संसाधनों का बेहतर उपयोग, अनावश्यक या दोहराव वाले खर्चों में कटौती शामिल हैं।

नि:शुल्क कानूनी सहायता के लिए 100 करोड़

कुल बजट में कटौती के बावजूद देशभर के विधिक सेवा प्राधिकरणों (Legal Services Authorities) के लिए अतिरिक्त राशि का प्रावधान सरकार की मंशा को साफ करता है।

पिछले वर्ष की तुलना में कानूनी सेवा प्राधिकरणों के बजट में सीधे 100 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की गई है।

2025-26: ₹ 200 करोड़
2026-27: ₹ 300 करोड़

जिसका सीधा फायदा गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर लोग, महिलाएं, अनुसूचित जाति और जनजाति, दिव्यांग व्यक्ति, वरिष्ठ नागरिक, आपदा या शोषण के शिकार लोगों को नि:शुल्क कानूनी सहायता, वकील, सलाह और प्रतिनिधित्व उपलब्ध कराने में होगा।

न्याय तक पहुंच (Access to Justice) को प्राथमिकता

विशेषज्ञों के अनुसार, यह बढ़ोतरी सरकार की उस सोच को दर्शाती है जिसमें न्याय तक पहुंच को सामाजिक न्याय की बुनियाद माना गया है।

इस अतिरिक्त बजट से लोक अदालतों की संख्या और क्षमता बढ़ेगी, मध्यस्थता और सुलह केंद्रों को मजबूती मिलेगी, कानूनी जागरूकता अभियान गांव-गांव तक पहुंच सकेंगे, महिलाओं और कमजोर वर्गों के मामलों का शीघ्र निपटारा संभव होगा।

यह कदम ऐसे समय में अहम माना जा रहा है, जब बड़ी संख्या में लोग आर्थिक कारणों से अदालत तक पहुंच नहीं बना पाते।

ई-कोर्ट परियोजना: 300 करोड़ की कटौती

जहां एक ओर कानूनी सहायता के बजट में बढ़ोतरी हुई है, वहीं ई-कोर्ट परियोजना के बजट में कटौती ने न्यायिक और तकनीकी विशेषज्ञों को चिंता में डाल दिया है।

ई-कोर्ट परियोजना के बजट में 300 करोड़ रुपये की सीधी कटौती की गई है।

2025-26: ₹ 1,500 करोड़
2026-27: ₹ 1,200 करोड़

ई-कोर्ट परियोजना का उद्देश्य अदालतों को पेपरलेस बनाना, ऑनलाइन फाइलिंग को बढ़ावा देना, वर्चुअल सुनवाई को नियमित बनाना, केस मैनेजमेंट सिस्टम को मजबूत करना और न्यायिक डेटा का डिजिटल प्रबंधन करना है।

डिजिटल ढांचे में कटौती

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे समय में, जब अदालतों में लाखों मुकदमे लंबित हैं, जजों की संख्या सीमित है और सुनवाई में देरी आम समस्या बनी हुई है, ऐसे में डिजिटल ढांचे में कटौती न्यायिक सुधारों की गति को प्रभावित कर सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ई-कोर्ट परियोजना केवल तकनीकी सुविधा नहीं, बल्कि न्यायिक दक्षता बढ़ाने का माध्यम है।

ई-कोर्ट्स फेज-III – 300 करोड़ की कटौती

कानून मंत्रालय की महत्वाकांक्षी ई-कोर्ट्स परियोजना (e-Courts Project) के चरण-III के तहत देश की सभी अधीनस्थ अदालतों को डिजिटल बनाने के उद्देश्य से केंद्रीय बजट 2026-27 में ₹ 1,200 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

बजट दस्तावेज़ के अनुसार, इस परियोजना के लिए बजट अनुमान में ₹ 1,500 करोड़ प्रस्तावित थे, लेकिन अंतिम रूप से ₹ 1,200 करोड़ ही आवंटित किए गए हैं।

यानी सीधे तौर पर 300 करोड़ की कटौती की गई है।

ई-कोर्ट्स परियोजना राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना (National e-Governance Plan) के अंतर्गत वर्ष 2007 से लागू की जा रही है। इसका उद्देश्य भारतीय न्यायपालिका को सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) के माध्यम से सशक्त बनाना है। इस परियोजना का चरण-II वर्ष 2023 में पूरा हो चुका है।

गौरतलब है कि सितंबर 2023 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ई-कोर्ट्स परियोजना के चरण-III को एक केंद्रीय क्षेत्र योजना (Central Sector Scheme) के रूप में मंजूरी दी थी, जिसे चार वर्षों में लागू किया जाना है।

इस चरण के लिए कुल ₹ 7,210 करोड़ रुपये की स्वीकृति पहले ही दी जा चुकी है।

हालांकि, वार्षिक बजट में कटौती यह संकेत देती है कि सरकार खर्चों को चरणबद्ध और नियंत्रित रखना चाहती है।

E-Courts Mission Project: 100 करोड़ की वृद्धि

ई-कोर्ट्स के कुल बजट में कटौती के बीच ई-सीएम (ई-कोर्ट्स मिशन मोड प्रोजेक्ट) के तहत कुछ मदों में बढ़ोतरी को आंशिक राहत माना जा रहा है।

ई-सीएम बजट

2025-26: ₹ 200 करोड़
2026-27: ₹ 300 करोड़

यह राशि मुख्य रूप से देशभर की अदालतों में आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर, सर्वर क्षमता, डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन, सॉफ्टवेयर अपग्रेड तथा न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर खर्च की जाएगी।

डिजिटल प्रशिक्षण और साइबर सुरक्षा की चुनौती

विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल न्यायपालिका केवल तकनीक से नहीं, बल्कि मानव संसाधनों के प्रशिक्षण से सफल होगी।

ई-सीएम के तहत बढ़ा हुआ बजट जजों और कोर्ट स्टाफ के प्रशिक्षण, साइबर सुरक्षा उपायों और डेटा संरक्षण को मजबूत कर सकता है, जो डिजिटल न्याय व्यवस्था के लिए अनिवार्य हैं।

ईवीएम बजट में बड़ी बढ़ोतरी

केंद्र सरकार ने आम बजट 2026-27 में कानून मंत्रालय के तहत ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) के लिए बजट में बड़ी बढ़ोतरी की है।

वित्त वर्ष 2026-27 में ईवीएम के लिए 99.21 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जबकि 2025-26 में इसके लिए मात्र 18.72 करोड़ रुपये का प्रावधान था। इस प्रकार बजट में लगभग 80 करोड़ रुपये की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

सबसे अधिक लोकप्रिय