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Breaking : योगेन्द्र सिंह शक्तावत बने राजस्थान बार काउंसिल के चेयरमैन, अंजली कौशिक वाइस चेयरमैन और राजेश पंवार बीसीआई सदस्य निर्वाचित

Rajasthan Bar Council Elections Today: Yogendra Sattawat Emerges as Key Contender for Chairman, Anjali Kaushik in Race for Vice-Chairperson

जोधपुर। राजस्थान बार काउंसिल के महत्वपूर्ण पदों के लिए हुए चुनाव में योगेन्द्र सिंह शक्तावत को चेयरमैन निर्वाचित किया गया है। वहीं, अंजली कौशिक वाइस चेयरमैन चुनी गई हैं। इसके अलावा राजेश पंवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के सदस्य के रूप में चुना गया है।

राजस्थान बार काउंसिल में राजेश पवार गुट का दबदबा

राजस्थान बार काउंसिल के बहुप्रतीक्षित चुनाव में आखिरकार योगेंद्र शक्तावत को चेयरमैन चुन लिया गया है।

वहीं, अंजली कौशिक वाइस चेयरमैन निर्वाचित हुई हैं।

वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश पवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के सदस्य के रूप में चुना गया है।

इन चुनावों में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि राजेश पवार के नेतृत्व वाले गुट ने अपनी रणनीति के दम पर निर्णायक बढ़त हासिल की और चुनावी समीकरणों को अपने पक्ष में कर लिया।

सतीख खांडल बने को चैयरमेन

आज हुए चुनाव में राजेश पंवार गुट से ही अधिवक्ता रतनाराम ठोलिया, अनामिका सांदू, सतीश खांडल और राजस्थान की पहली महिला वरिष्ठ अधिवक्ता गायत्री राठौड़ को-चैयरमेन नियुक्त हुई हैं

15 सदस्यों वाले गुट ने अंतिम समय तक बनाए रखी बढ़त

पिछले एक सप्ताह से ही राजेश पवार गुट अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटा था। इस गुट में करीब 15 सदस्य शामिल थे, जिन्होंने अंतिम समय तक अपना समीकरण बनाए रखा।

दूसरी ओर, भवनेश शर्मा और रणजीत जोशी की ओर से चुनावी समीकरण साधने की कोशिशें की गईं, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद वे अपनी रणनीति को निर्णायक सफलता में नहीं बदल पाए।

भूवनेश शर्मा और रणजीत जोशी की रणनीति क्यों हुई नाकाम?

राजस्थान बार काउंसिल के चुनाव में भूवनेश शर्मा और रणजीत जोशी की रणनीति पर सबकी नजरें थीं।

दोनों की कोशिश थी कि जयपुर और जोधपुर के सदस्यों को एकजुट कर अपने पक्ष में मजबूत समर्थन जुटाया जाए।

इस रणनीति के तहत न केवल भूवनेश शर्मा को आगे लाने की कोशिश हुई, बल्कि नीरज गुर्जर को भी जीत दिलाने के प्रयास किए गए।

हालांकि, चुनाव के अंतिम दौर में समीकरण बदलते नजर आए।

राजेश पवार गुट की रणनीति के सामने यह प्रयास सफल नहीं हो सके।

चुनावी घटनाक्रम से जुड़े लोगों के बीच यह चर्चा रही कि जिस रणनीतिक घेराबंदी के जरिए दूसरे पक्ष को कमजोर करने की कोशिश की जा रही थी, अंततः उसी में रणनीति बनाने वाले पक्ष को नुकसान उठाना पड़ा।

जयपुर की तिकड़ी ने बदले चुनावी समीकरण

इस चुनाव में जयपुर के अधिवक्ताओं की भूमिका बेहद अहम रही।

रजनीश गुप्ता, सतीश खांडल और प्रशांत शर्मा की तिकड़ी ने चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

राजेश पवार ने शुरुआत से ही समर्थन जुटाने की रणनीति पर काम किया।

उन्होंने पहले प्रशांत शर्मा को अपने साथ जोड़ने में सफलता हासिल की। इसके बाद सतीश खांडल का समर्थन भी उनके पक्ष में आया। इन संपर्कों के बाद धीरे-धीरे दूसरे सदस्य भी इस गुट से जुड़ते चले गए।

राजेश पवार की रणनीति की खास बात यह रही कि उन्होंने आक्रामक प्रचार के बजाय शांत रहकर सदस्यों के बीच सहमति बनाने पर ध्यान दिया।

एक-एक सदस्य से संपर्क साधते हुए उन्होंने ऐसा समीकरण तैयार किया, जिसने अंतिम समय में उनके गुट की स्थिति मजबूत कर दी।

बीसीआई सदस्य के लिए एक साल का कार्यकाल, हर वर्ष बदलेगा प्रतिनिधि

इस चुनाव से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है।

जानकारी के अनुसार, गुट के भीतर बार काउंसिल ऑफ इंडिया में प्रतिनिधित्व को लेकर भी सहमति बनी है।

इसके तहत बीसीआई में जाने वाले सदस्य को एक वर्ष के लिए जिम्मेदारी देने और प्रत्येक वर्ष प्रतिनिधि बदलने की व्यवस्था पर सहमति बनाई गई है।

इस व्यवस्था की शुरुआत वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश पवार से हुई है, जिन्हें बीसीआई सदस्य चुना गया है।

यदि इस सहमति को निर्धारित योजना के अनुसार लागू किया जाता है, तो आने वाले वर्षों में दूसरे सदस्यों को भी बीसीआई में प्रतिनिधित्व का अवसर मिल सकता है।

यह व्यवस्था केवल एक पद पर नियुक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि गुट के भीतर भविष्य के नेतृत्व और प्रतिनिधित्व को लेकर बनाई गई दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

अगले पांच वर्षों के लिए नेतृत्व को लेकर सहमति का दावा

चुनावी समीकरणों के बीच यह भी सामने आया है कि संबंधित गुट में अगले पांच वर्षों तक नेतृत्व और प्रतिनिधित्व को लेकर एक व्यापक सहमति बनाई गई है।

इसके तहत चेयरमैन, वाइस चेयरमैन, को-चेयरमैन और बीसीआई सदस्य जैसे महत्वपूर्ण पदों पर अलग-अलग सदस्यों को अवसर देने की योजना बताई जा रही है।

हालांकि, इस व्यवस्था का वास्तविक स्वरूप, पदों के आवंटन की प्रक्रिया और भविष्य में इसके क्रियान्वयन की स्थिति आधिकारिक पुष्टि के बाद ही स्पष्ट होगी।

बीसीआई चैयरमेन से न​जदीकी भी नहीं आई काम

इन चुनावों में सबसे महत्वपूर्ण बात रही कि राजस्थान बार काउंसिल के चुनावों को लेकर बीसीआई चैयरमेन मनन ​मिश्रा खुद नजर बनाए हुए थे.

यहां तक कि चुनाव से ठीक पूर्व राजस्थान के दौरे को लेकर भी कई चर्चाए हुई.

इसके बावजूद भूवनेश शर्मा अपनी जीत दर्ज नही करा पाए

चुनाव ने दिखाया संगठनात्मक रणनीति का असर

राजस्थान बार काउंसिल के इन चुनावों ने स्पष्ट कर दिया कि केवल व्यक्तिगत दावेदारी के आधार पर जीत हासिल करना आसान नहीं है।

सदस्यों के बीच संवाद, समर्थन जुटाने की रणनीति और अंतिम समय तक समीकरणों को बनाए रखना निर्णायक साबित हो सकता है।

योगेंद्र सत्ताव के चेयरमैन और अंजली कौशिक के वाइस चेयरमैन चुने जाने के साथ ही राजेश पवार के बीसीआई सदस्य बनने से इस चुनाव में उनके गुट की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।

दूसरी ओर, भूवनेश शर्मा और रणजीत जोशी की रणनीति अपेक्षित परिणाम हासिल नहीं कर सकी।

अब देखना होगा कि नया नेतृत्व राजस्थान बार काउंसिल के कामकाज, अधिवक्ताओं के हितों और संगठन की भावी दिशा को किस तरह आगे बढ़ाता है।

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