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स्वास्थ्य सेवाओं में नैतिक आचरण के साथ मरीजों के अधिकारों का सरंक्षण जरूरी,स्वास्थ्य सेवा में जवाबदेही पर पैनल चर्चा आयोजित

जयपुर, 24 अगस्त। जयपुर के नारायणा अस्पताल और सेंटवेव संस्था कि ओर से चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवा में मरीजों के अधिकारों का सरंक्षण, नैतिकता और जवाबदेही विषय पर एक दिवसीय विशेष पैनल चर्चा का आयेाजन किया गया.

इस पैनल चर्चा में स्वास्थ्य सेवा में जवाबदेही, मरीजों के अधिकार और डॉक्टरों के कामकाज में नैतिकता जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा कि गयी.

पैनल चर्चा का आयोजन दो चरणों में किया गया, जिसके प्रथम चरण में कानूनी नजरिए और मरीजों के अधिकारों पर चर्चा कि गयी.

कानूनी पैनल कि चर्चा में राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस जे के रांका, जस्टिस अतुल कुमार जैन, राजस्थान बार काउंसिल चैयरमेन भुवनेश शर्मा, राजस्थान यूनिवर्सिटी कि डॉ. संजुला थानवी, एडवोकेट लोकेश शर्मा एडवोकेट लोकेश शर्मा, एडवोकेट गौरव राठौड़ और राजस्थान एज्यूकेशन ट्रस्ट की कानूनी रिसर्च इंटन रूपाली ने अपने विचार रखें.

पैनल चर्चा के दूसरे चरण में चिकित्सा नजरिए कि चर्चा में नारायणा अस्पताल के डायरेक्टर बलविंदर सिंह वालिया, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. प्रदीप कुमार गोयल, फोरेंसिक वैज्ञानिक प्रो. जी.के. माथुर, डॉ. राकेश चित्तौड़ा, डॉ. चंद्रिका प्रसाद शर्मा और डॉ. विजय कपूर ने अपने विचार रखें.

पैनल चर्चा में सेंटवेव संस्था की निदेशक शिवाली गुप्ता और प्रो. डॉ.आराधना परमार ने भी अपने विचार रखे और कहा कि मरीज और डॉक्टर के बीच भरोसे और बातचीत को मजबूत करना जरूरी है.

पैनल चर्चा में बार अध्यक्ष भूवनेश शर्मा ने चिकित्सा उपचार के कानूनी मुद्दों से संबंधित व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए आम लोगों के लिए इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव दिया.

डॉ. चंद्रिका प्रसाद शर्मा,आरएचजेएस ने सरकारी अस्पतालों सहित अस्पताल सेवाओं की निगरानी प्रक्रिया में बदलाव करने का सुझाव देते हुए कहा कि इस प्रक्रिया से निश्चित रूप से भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा.

चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने एकमत से माना कि आपातकालीन परिस्थितियों में डॉक्टरों की सुरक्षा और निश्चिंत सेवा सुनिश्चित करने के लिए मरीज और चिकित्सक के बीच पारदर्शी एवं निरंतर संवाद अत्यंत आवश्यक है.

स्पष्ट संचार और पारस्परिक विश्वास से न केवल विवादों की संभावना कम होती है बल्कि स्वस्थ वातावरण भी बनता है.

पैनल का सामूहिक मत रहा कि चिकित्सक समाज की अमूल्य धरोहर हैं और उन्हें भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना समाज की जिम्मेदारी है। इसी से वे पूरी निष्ठा और आत्मविश्वास के साथ मरीजों को उपचार प्रदान कर सकते हैं.

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