नई दिल्ली, 16 सितम्बर 2025
देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में जातीय भेदभाव की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को सख्त निर्देश दिए.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यूजीसी आठ हफ्तों के भीतर ठोस और प्रभावी नियम तैयार कर अधिसूचित करे, ताकि इस तरह की घटनाओं पर लगाम लगाई जा सके.
सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश एक जनहित याचिका पर दिए हैं जिसमें कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जातीय भेदभाव के मामलों को गंभीर बताते हुए तत्काल एक नियामक ढांचे की मांग की गई हैं.
याचिका में कहा गया कि भेदभाव का शिकार बनने वाले छात्रों को मानसिक तनाव झेलना पड़ता है और कई मामलों में यह स्थिति आत्महत्या जैसी त्रासद घटनाओं तक पहुँच जाती है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि अब तक अदालत कई बार दिशानिर्देश और आदेश जारी कर चुका हैं.
फिर भी घटनाएँ थमने का नाम नहीं ले रही हैं। अदालत ने कहा कि शिक्षा संस्थानों की ज़िम्मेदारी है कि वे छात्रों के समानता और गरिमा के अधिकार की रक्षा सुनिश्चित करें।
सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी को निर्देश दिया कि नियम बनाते समय सभी हितधारकों और विशेषज्ञों के सुझावों को शामिल करें और प्रस्तावित नियमों में संस्थानों पर अनिवार्य रोकथाम उपाय लागू करने, शिकायत निवारण तंत्र को और मजबूत बनाने तथा लापरवाह संस्थानों पर सख्त जवाबदेही तय करने पर विशेष नियम बनाए जाए.
सुप्रीम कोर्ट ने मामले कि सुनवाई 8 सप्ताह बाद तय करते हुए यूजीसी को नियम बनाने की प्रक्रिया पूरी कर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के आदेश दिए हैं.