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दिव्यांग कर्मचारियों को बार-बार मेडिकल जांच के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता : राजस्थान हाईकोर्ट

Rajasthan High Court Says Disabled Employees Cannot Be Forced to Undergo Repeated Medical Examination

दिव्यांग अभ्यर्थी को राजस्थान हाईकोर्ट ने दी अंतरिम राहत, दंडात्मक कार्रवाई पर रोक

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने दिव्यांगजनों के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित करते हुए स्पष्ट संदेश दिया है कि दिव्यांग कर्मचारियों को बार-बार दिव्यांगता परीक्षण के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

जस्टिस अनिल कुमार उपमन ने याचिकाकर्ता हरिओम शर्मा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है।

हाईकोर्ट ने राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड (RVPNL) को याची के विरुद्ध किसी भी प्रकार की उत्पीड़क अथवा दंडात्मक कार्रवाई करने पर भी रोक लगा दी है।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता देवकृष्ण पुरोहित ने अदालत को बताया कि हरिओम शर्मा की नियुक्ति वर्ष 2022 में स्टेनोग्राफर पद पर दिव्यांग श्रेणी के अंतर्गत हुई थी।

इसके बाद राजस्थान सरकार द्वारा वर्ष 2025 में जारी एक परिपत्र के आधार पर पिछले पांच वर्षों में नियुक्त दिव्यांग कर्मचारियों की पुनः दिव्यांगता जांच करवाई जा रही है।

याचिका में कहा गया कि यदि दोबारा परीक्षण में दिव्यांगता का प्रतिशत कम पाया जाता है तो संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू की जा रही है, जो कि दिव्यांग व्यक्तियों के संवैधानिक एवं वैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।

प्रार्थी की ओर से अदालत के समक्ष यह भी तर्क रखा गया कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र को बिना वैधानिक प्रक्रिया अपनाए चुनौती नहीं दी जा सकती।

याचिका में कहा गया कि बार-बार मेडिकल बोर्ड के समक्ष पेश होने के लिए विवश करना दिव्यांग कर्मचारियों के सम्मान और अधिकारों के खिलाफ है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने पूर्व में पारित एक महत्वपूर्ण निर्णय Anadu Vs. State of Rajasthan का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि यदि किसी अभ्यर्थी के पास सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी वैध दिव्यांगता प्रमाण पत्र मौजूद है, तो चयन के बाद पुनः मेडिकल बोर्ड द्वारा परीक्षण आवश्यक नहीं माना जा सकता।

हाईकोर्ट ने मामले को विचारणीय मानते हुए विभाग से जवाब तलब किया है तथा अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता के विरुद्ध कोई भी कठोर अथवा उत्पीड़क कदम नहीं उठाने के निर्देश दिए हैं।

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