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राजस्थान हाईकोर्ट ने जमानत पर सुनवाई करते हुए कहा-निर्दोष हैं आरोपी, जांच अधिकारी की लापरवाही से 8 महिने तक जेल में रहा दवा विक्रेता!

Rajasthan highcourt

पुलिस अधिकारियों की लापरवाही के चलते राज्य के एक दवा विक्रेता को 8 माह तक जेल में रहना पड़ा हैं. राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मामले में अब आरोपी को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं.

हाईकोर्ट ने जांच अधिकारी की लापरवाही से एक निर्दोष व्यक्ति के 8 महिने तक जेल में रहने को बेहद गंभीर माना हैं.

साथ ही हाईकोर्ट ने जयपुर रेंज के IG को आदेश दिए हैं कि जांच में लापरवाही करने वाले दोषी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच प्रारंभ करें.

निर्दोष हैं आरोपी

आमतौर कोई भी अदालत जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान किसी आरोपी के दोषी या निर्दोष होने के बारे में अपनी कोई राय व्यक्त नहीं करती हैं.

लेकिन इस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान ही आरोपी प्रथमदृष्टया निर्दोष बताया हैं.

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि प्रथम दृष्टया इस मामले में याचिकाकर्ता आरोपी के खिलाफ कोई अपराध नहीं बनता है.

हाईकोर्ट ने कहा कि हालाँकि, जमानत के इस चरण पर कोर्ट को मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं करनी चाहिए, लेकिन इस मामले की परिस्थितियाँ न्यायालय को अपना मत व्यक्त करने के लिए मजबूर कर रहीं हैं.

पुलिस अधिकारियों की लापरवाही

राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस प्रवीर भटनागर की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि जांच अधिकारी ने इस मामले की लापरवाहीपूर्वक जांच की, और यह सत्यापित करने का प्रयास ही नहीं किया कि याचिकाकर्ता ने संबंधित दवाएं अधिकृत विक्रेताओं से खरीदी थीं या नहीं.

कोर्ट ने कहा जिस जांच अधिकारी ने याचिकाकर्ता के विरुद्ध चार्जशीट की अनुशंसा की, उसका आचरण भी उपेक्षापूर्ण और गैर-जिम्मेदाराना था.

हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले के जांच अधिकारी के लापरवाह रवैये के कारण एक निर्दोष व्यक्ति को जेल भेज दिया गया, जो दिनांक 12 जनवरी 2025 से अब तक जेल में हैं.

सभी जांच अधिकारी कोर्ट में पेश

इस मामले की सुनवाई के दौरान केस से जुड़े रहे अब तक के सभी जांच अधिकारियों को कोर्ट ने तलब किया था, जिसके चलते तत्कालिन एसएचओं सुहैल खान, एसआई सुरेशसिंह, एसआई रामवतार, एसआई चन्द्रशेखर, एसआई अरूण कोर्ट में मौजूद रहें.

हाईकोर्ट के आदेश से दवाओं की खरीद और बिलों की जांच के साथ ड्रग इंस्टपेक्टर अशोक कुमार मीणा पेश हुए.

ड्रग इंस्टपेक्टर अशोक कुमार मीणा ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता आरोपी द्वारा खरीदी गई दवाएं वैध रूप से खरीदी गईं हैं.

क्या हैं मामला..

जनवरी 2025 से जयपुर जेल में बंद राजेन्द्र उर्फ विनोद ने राजस्थान हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की.

जस्टिस प्रवीर भटनागर की एकलपीठ राजेन्द्र उर्फ विनोद की ओर से दायर जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी.

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने ये तथ्य लाया गया कि जिस ट्रामाडोल (Tramadol) नामक प्रतिबंधित दवा को रखने के आरोप में याचिकाकर्ता पिछले 8 माह से जेल हैं, उसकी खरीद वैध रूप से अधिकृत एजेंसियों से कि गयी हैं.

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता हरि बारहेठ ने हाईकोर्ट को बताया कि जिन डिस्ट्रीब्यूटरों से दवा खरीद कि गयी उनसे लिए गए बिलों की प्रति भी पेश कि गयी, लेकिन पुलिस ने उसे जांच में शामिल नहीं किया.

याचिकाकर्ता राजेन्द्र की ओर से अदालत को बताया गया कि पुलिस ने उसे जानबुझकर इस मामले में झुठा फंसाया हैं जबकि उसके पास नवंबर 2026 तक वैध दवा विक्रय करने का लाइसेंस है.

Case Details:

Rajasthan High Court, Jaipur Bench

Case Title: Rajendra @ Vinod vs. State of Rajasthan

Case No.: S.B. Criminal Misc. Bail Application No. 6735/2025

Judge: Hon’ble Mr. Justice Praveer Bhatnagar

Order Date: 14 August 2025

Relevant Law: Section 483 of BNSS (Bail) and Sections 8/21 of NDPS Act

FIR No.: 24/2025, Police Station: Govindgarh, District Jaipur Rural

Petitioner: Rajendra @ Vinod, 33 years old, Proprietor of Ridhi Siddhi Medical and Provisional Store, Kajroli

Petitioner Advocate : Hari Bareth

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