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सरकारी जमीन पर कब्जे को नहीं किया जा सकता नियमित, जयपुर की 87 कॉलोनियों के नियमन पर राजस्थान हाईकोर्ट की रोक

Rajasthan highcourt

सरकारी जमीनों पर कब्जे को नियमन के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने अहम आदेश दिया हैं राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी जमीन पर कब्जे को कैसे नियमन किया जा सकता है. हाईकोर्ट ने मिलीभगत कर सरकारी जमीनों पर कब्जा कराने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त टिप्प्णी की हैं.

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने सरकारी जमीनों पर कब्जे से बनी राजधानी जयपुर की 87 कॉलोनियों के नियमन पर रोक लगा दी हैं.

जस्टिस एसपी शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने ये आदेश पब्लिक अगेंस्ट करप्शन की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए हैं.

8 सप्ताह में कब्जे हटाए..

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के 12 मार्च के नियमन सर्कुलर पर रोक लगाते हुए ये आदेश दिए हैं.

साथ ही हाईकोर्ट ने सरकारी जमीन पर कब्जे कर बसी कॉलोनियों के कब्जे को 8 सप्तह में हटाकर रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं

किसानों से ली गई जमीन

पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्था की ओर से अधिवक्ता पूनमचंद भंडारी ने पैरवी करते हुए अदालत को बताया कि राजधानी के सांगानेर क्षेत्र सहित जिस जमीन पर यह कॉलोनियां बसी है. वह जमीन हाउसिंग बोर्ड ने करोड़ो रूपए का मुआवजा देकर किसानों से अवाप्त की हैंं.

आम जनता के पैसे से अवाप्त कि गयी जमीन को अधिकारियों ने भूमाफियाओं से मिलीभगत करके सरकारी जमीनों पर कब्जा करवा दिया और सोसायटी ने इन जमीनों पर प्लॉट काट दिए.

बहस सुनने के बाद राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार के 12 मार्च के नियमन सर्कुलर पर रोक लगाते हुए सरकारी जमीन पर कब्जे से बनी कॉलोनियों के नियमन पर रोक लगा दी हैं. साथ ही अदालत ने आदेश दिए हैं. अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए, जिनकी निगरानी में यह अवैध कब्जे हुए।

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